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होम भारत

‘सत्ता हमारे लिए सुख नहीं, सेवा का माध्यम’

बजट सत्र की शुरुआत में संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव दिया, प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश-

Written byPanchjanyaPanchjanya
Feb 17, 2026, 10:00 am IST
inभारत, विश्लेषण
राज्य सभा में राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव बोलते हुए प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी

राज्य सभा में राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव बोलते हुए प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी

पिछला साल विकसित भारत की यात्रा में तेजी से प्रगति का रहा है, जिसमें हर क्षेत्र और समाज के सभी वर्गों में बदलाव साफ दिख रहा है। देश बहुत तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। हर नागरिक महसूस करता है कि देश एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां रुकने या पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं है, बस तेजी से आगे बढ़ना है, लक्ष्य हासिल करना है और उसे पाने के बाद ही चैन की सांस लेनी है, और इसी दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। जहां दुनिया के सबसे अमीर देश बूढ़े हो रहे हैं, वहीं भारत एक ऐसा देश है जिसकी युवा आबादी बढ़ रही है। भारत के प्रति दुनिया का आकर्षण काफी बढ़ा है और भारत की प्रतिभा को वैश्विक पहचान मिली है।

आज भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। कोविड के बाद की दुनिया में, जैसे-जैसे वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है, एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है और निष्पक्ष विश्लेषण से भारत की ओर एक साफ झुकाव दिख रहा है। हाल ही में हमने नौ महत्वपूर्ण ट्रेड समझौते किए हैं, जिसमें 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ “सभी समझौतों की जननी” भी शामिल है। पिछली सरकारों ने भारत को ऐसी स्थिति में छोड़ दिया था जहां कोई भी देश व्यापार समझौता करने को तैयार नहीं था, जबकि मौजूदा स्थिति इसके बिल्कुल उलट है जहां विकसित देश भारत के साथ पार्टनरशिप करने के लिए उत्सुक हैं। हमारी सरकार की ज्यादातर ऊर्जा पिछली गलतियों को सुधारने और भारत की वैश्विक छवि को फिर से बनाने में लगी है।

इन मौकों का सबसे ज्यादा फायदा भारत के युवाओं को मिलेगा। देश को अपने युवाओं की ताकत पर गर्व है, अब उनके लिए वैश्विक बाजार खुल गया है, जिससे हर जगह मौके मिल रहे हैं। देश उनका साथ दे रहा है और दुनिया उनके योगदान का इंतजार कर रही है। विपक्षी दल दशकों तक केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहे हैं, फिर भी उनकी पहचान भ्रष्टाचार और नाकाम शासन की ही बनी हुई है। आज जब विधेयकों पर चर्चा होती है, तो गर्व से बात की जाती है, लेकिन पहले सौदों पर चर्चा से सिर्फ बोफोर्स जैसे घोटाले सामने आते थे, क्योंकि वे सरकारें सिर्फ अपनी जेबें भरने पर ध्यान देती थीं, नागरिकों की जिंदगी बेहतर बनाने पर नहीं।

बैंकिंग में किए सुधार

2014 से पहले ‘फोन बैंकिंग’ का दौर था, जहां नेताओं के फोन कॉल से करोड़ों रुपए बांटे जाते थे। गरीबों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था और उन्हें बैंक तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी ने कभी बैंक के दरवाजे नहीं देखे थे। उस समय के सत्ताधारी नेताओं ने अपने साथियों को अरबों रुपए दिलवाए, जो उस पैसे को अपनी निजी संपत्ति समझते थे। उस समय बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी। हमने कई बैंकिंग सुधार किए। इसके परिणामस्वरूप, बैंक गहरी समस्याओं से आजाद हुए, उनकी हालत में लगातार सुधार हुआ। जिन्हें पहले बैंकों में प्रवेश नहीं मिलता था, अब उन्हें आसानी से लोन मिल रहा है। वे लोग व्यवसाय कर पा रहे हैं। मुद्रा योजना के जरिए युवाओं को बिना गारंटी के 30 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के लोन दिए गए हैं ताकि वे अपने व्यवसायों को बढ़ा सकें। ग्रामीण महिलाएं, स्वयं-सहायता समूहों के जरिए, अब बड़े सपने देख रही हैं और आजादी से खड़ी हैं, जिसमें 10 करोड़ महिलाओं को सीधे वित्तीय मदद मिली है।

2014 से पहले पीएसयू को ऐसी संस्थाओं के रूप में देखा जाता था जो फेल होने, ढहने या बंद होने वाली थीं। लेकिन हमारी सरकार ने हिम्मत दिखाई और लगातार सुधार लागू किए। जो पीएसयू विपक्ष के शासन में बंद होने की कगार पर थे, वे अब लाभ कमा रहे हैं। पीएसयू अब मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रहे हैं, रिकॉर्ड रोजगार पैदा कर रहे हैं और देश और विदेश में बड़े ऑर्डर हासिल करके विश्व स्तर पर विस्तार कर रहे हैं। पिछली सरकारों में 10 करोड़ छोटे किसानों की अनदेखी की गई। हमने छोटे किसानों का दर्द समझा और जमीनी हकीकत को समझते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की। कम समय में ही 4 लाख करोड़ रुपए सीधे छोटे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे उन्हें नई ताकत मिली है और वे बड़े सपने देख पा रहे हैं।

नीति के आधार पर चल रहा देश

जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन परियोजना तीन दशकों तक, यानी दो पीढ़ियों तक रुकी रही, लेकिन हमारी सरकार ने इसे पूरा किया। अरुणाचल और असम को जोड़ने वाले बोगीबील पुल सालों से रुका हुआ था। हमने प्रगति के तहत इसकी समीक्षा की और इसे पूरा किया, जिससे असम और पूरे पूर्वोत्तर को बहुत फायदा हुआ। हमारी सरकार न सिर्फ परियोजनाओं को समय पर पूरा करती है, बल्कि अक्सर तय समय से पहले ही पूरा कर देती है। आज देश नीति के आधार पर चल रहा है। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर चलते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

मैं कांग्रेस की इम्प्लीमेंट नीति की मिसाल देना चाहता हूं। गुजरात के लिए जब नर्मदा डैम की योजना बनाई गई, तब मैं पैदा भी नहीं हुआ था। सरदार पटेल के निधन के बाद नेहरू जी ने इसकी शुरुआत कराई। कमाल की बात यह है कि जब मैं प्रधानमंत्री बना, तब इसका उद्घाटन किया गया। मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए इस डैम के लिए तीन दिन तक अनशन किया। किसानों के लिए मैंने अपने आपको दांव पर लगा दिया था। राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को गद्दार कहा, क्योंकि वह सिख हैं।

यह सिखों का अपमान है। उन्होंने इस सदन के एक सांसद को ‘गद्दार’ कहा। उनका अहंकार चरम पर है। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले किसी और को गद्दार नहीं कहा, यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। यह सिखों के प्रति उस नफरत का इजहार था जो कांग्रेस में भरी हुई है। रवनीत बिट्टू उस परिवार के सदस्य हैं, जिसने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे लोग कांग्रेस को डुबो देंगे।

मोहब्बत की दुकान में जो आग भरी पड़ी है, उसका परिणाम है इसलिए ये मोदी की कब्र खोदने का नारा लेकर चल रहे हैं। कांग्रेस के शाही परिवार को देश ने दशकों तक अवसर दिया, लेकिन आपने परिवार के लिए देश को दाव पर लगाया। कांग्रेस के राज में लाल किले से गरीबी हटाओ का नारा लगाया गया, लेकिन गरीबी हटाने के लिए क्या किया, किसी ने नहीं बताया। आज 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को पीछे छोड़ा है। 2014 से पहले 18 हजार गांव ऐसे थे, जिनको बिजली का मतलब नहीं पता था।

सत्ता हमारे लिए सुख नहीं सेवा का माध्यम है। हमने मुद्रा योजना के तहत लाखों करोड़ों का लोन दिया, इससे स्वरोजगार को बल मिला। कांग्रेस ने कभी स्टार्टअप कल्चर को बल नहीं दिया। ये तो अपने घर के स्टार्टअप को भी ठीक नहीं कर पा रहे। हमारी सरकार ने आज 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप को सपोर्ट किया।

हम पाकिस्तानी आतंकियों को घर में घुसकर जवाब देते हैं। ऑपरेशन सिंदूर किया जाता है तो इनको परेशानी होती है। हम माओवादी आतंक से निपटने के लिए कदम उठाते हैं, हमने सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया इसलिए वे मोदी की कब्र खोदते हैं। कांग्रेस की परेशानी कुछ और है वे पचा नहीं पा रहे कि मोदी यहां तक पहुंचा कैसे और पहुंचा तो पहुंचा अब तक टिका कैसे। ये तो मानकर बैठे थे प्रधानमंत्री पद इनके परिवार की जागीर है।

अपमान करना विपक्ष की संस्कृति

लोगों का अपमान करना विपक्ष की आदत और संस्कृति बन गई है। विपक्ष ने हाल ही में भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया। लोकसभा में भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो पाई। यह सर्वोच्च संवैधानिक पद का गंभीर अपमान है। जब एक गरीब, आदिवासी परिवार की महिला सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचती है, तो उसका अपमान करना न केवल उसका अपमान है, बल्कि आदिवासी समुदाय, महिलाओं, संविधान और खुद देश का भी अपमान है। मैं राज्यसभा सांसद सदानंदन मास्टर का उदाहरण देना चाहता हूं। उन्होंने राजनीतिक बदले की भावना के कारण अपने दोनों पैर खो दिए, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने विनम्रता और बिना किसी कड़वाहट के देश की सेवा करना जारी रखा। ऐसे व्यक्ति बलिदान और सेवा की भावना का प्रतीक हैं और उन्हीं जैसे अनगिनत कार्यकर्ताओं के समर्पण से ही देश को भारत की प्रगति के लिए जीने और काम करने की प्रेरणा मिलती है। हमने देश के लिए जीना सीख लिया है और एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि युवाओं के लिए मजबूत जमीन तैयार हो सके।

Topics: सेवा का माध्यमबैंकिंग सुधाररिफॉर्मपरफॉर्म और ट्रांसफॉर्म: सरकारअर्थव्यवस्थाअधोसंरचना‘मेक इन इंडिया’पुनरुद्धारविकसित भारतवैश्विक छविपाञ्चजन्य विशेषमुद्रा योजनातुष्टीकरण बनाम संतुष्टीकरणसद की गरिमा
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