वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर देश में लंबे समय से चली आ रही बहस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के करीब है। हाल ही में हुई समिति की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक साथ चुनाव कराने से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन नहीं करता।
पूर्व सीजेआई गवई ने समिति को बताया कि यदि यह कानून लागू होता है, तो इससे न तो भारत की संघीय संरचना कमजोर होगी और न ही लोकतांत्रिक शासन प्रणाली पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनका मानना है कि यह प्रस्ताव संविधान की मूल भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य देश में चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद को ऐसा कानून बनाने का पूरा अधिकार है, भले ही इसका असर राज्यों पर भी पड़े।
देशहित में एक साथ चुनाव जरूरी- जेपीसी की अध्यक्षता कर रहे भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने गवई के समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समिति के काम को मजबूती मिली है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे अपने राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर देशहित में इस विधेयक का समर्थन करें। चौधरी ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सरकारी संसाधनों की बचत होगी, प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव कम पड़ेगा और विकास कार्यों में निरंतरता आएगी। वन नेशन, वन इलेक्शन से जुड़ा यह विधेयक आमतौर पर 129वें संविधान (संशोधन) विधेयक के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है, ताकि बार-बार चुनावों से होने वाले खर्च और व्यवधान को कम किया जा सके। इस प्रस्ताव के तहत चुनावी ढांचे में केवल समय-सीमा से जुड़ा बदलाव किया जाएगा, जबकि मतदाताओं के अधिकार और चुनाव की प्रक्रिया मूल रूप से वही बनी रहेगी।
संविधान के दायरे में ‘एक साथ चुनाव’ वैध: पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई- पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि संसद के पास संविधान के दायरे में रहते हुए संशोधन करने का अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे। बाद में राजनीतिक अस्थिरता और सरकारों के गिरने के कारण यह व्यवस्था टूट गई। ऐसे में अब यदि इसे दोबारा लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, तो इसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

















