मुंबई में 11 जुलाई 2006 को हुए सिलसिलेवार ट्रेन बम धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इन धमाकों में 189 लोगों की जान गई थी और 820 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में 12 आरोपियों को विशेष MCOCA कोर्ट ने दोषी ठहराया था, जिसमें 5 को मौत की सजा और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन, हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया, जिसके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि आरोपियों को अभी जेल वापस नहीं जाना होगा।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 22 जुलाई 2025 को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की बेंच के सामने इस मामले को तुरंत सुनवाई के लिए उठाया। मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और तत्काल सुनवाई की जरूरत है। चीफ जस्टिस ने इस बात पर ध्यान दिया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद 8 आरोपी पहले ही जेल से रिहा हो चुके हैं। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए 24 जुलाई 2025 की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले पर रोक लगा दी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों को अभी जेल वापस नहीं जाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में अब जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी संवेदनशील है, क्योंकि धमाकों में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया था। पीड़ितों में से एक, चिराग चौहान, जो अब व्हीलचेयर पर हैं, ने हाईकोर्ट के फैसले पर निराशा जताई और कहा कि “न्याय की हत्या हो गई।” दूसरी ओर, बरी हुए आरोपियों ने राहत की सांस ली है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस मामले में नया मोड़ ला सकता है।
महाराष्ट्र सरकार के तर्क
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने सबूतों को गलत तरीके से खारिज किया। खास तौर पर, एक आरोपी से 500 ग्राम RDX की बरामदगी को हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नकार दिया, क्योंकि RDX को लैक सील से सील नहीं किया गया था। सरकार का तर्क है कि RDX एक ज्वलनशील पदार्थ है, इसलिए उसे सील नहीं किया गया, और इसकी बरामदगी की प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया था। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा कि MCOCA के तहत सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं।
मामले की पृष्ठभूमि
7/11 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में सात बम धमाकों ने मुंबई की लोकल ट्रेनों को निशाना बनाया था। ये धमाके पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेनों में सिर्फ 11 मिनट के भीतर हुए थे। विशेष MCOCA कोर्ट ने सितंबर 2015 में 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इनमें कमाल अंसारी, मोहम्मद फैसल शेख, एहसान कुतबुद्दीन सिद्दीकी, नवेद हुसैन खान और आसिफ खान को मौत की सजा, जबकि तनवीर अहमद, मोहम्मद माजिद, शेख मोहम्मद अली, मोहम्मद साजिद, मुजम्मिल शेख, सुहैल महमूद और जमीर अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। एक अन्य आरोपी, वहीद शेख, को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। लेकिन 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
















