बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को 13वें संसदीय चुनाव हुए। यह चुनाव अगस्त 2024 में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद बने अंतरिम प्रशासन को बदलने के लिए कराया गया। इसमें तारिक रहमान की अगुवाई में बीएनपी ने एक तिहाई बहुमत से सत्ता में वापसी की। कुल 300 में से 299 सीटों पर हुआ, क्योंकि एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण मतदान रद्द हो गया था। लेकिन, देश की निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस चुनाव को अलोकतांत्रिक बता रही हैं। लेकिन क्यों? इतना ही नहीं हसीना ने यूनुस को लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला करार दिया।
शेख हसीना का बयान
निर्वासन में रह रही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस चुनाव को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इसे फर्जी, अवैध और असंवैधानिक बताया। उनका कहना है कि मोहम्मद यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता संभाली है। उनके नेतृत्व में यह चुनाव जनता के वोटिंग अधिकारों और लोकतंत्र की भावना की अनदेखी करता है। हसीना ने कहा कि अवामी लीग और उसके समर्थकों को बाहर रखकर यह चुनाव पहले से तय धोखा था।
चुनाव में हुई कथित गड़बड़ियां
हसीना ने आरोप लगाया कि 11 फरवरी की शाम से ही मतदान केंद्रों पर कब्जा किया गया। गोलीबारी हुई, पैसे देकर वोट खरीदे गए, बैलेट पेपर पर जबरन मुहर लगाई गई और एजेंटों से जबरदस्ती परिणाम पत्रों पर हस्ताक्षर कराए गए। 12 फरवरी की सुबह मतदान बहुत कम रहा, कई केंद्र लगभग खाली रहे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार सुबह 11 बजे तक सिर्फ 14.96 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। उनका कहना है कि यह जनता का बहिष्कार दिखाता है। अवामी लीग के समर्थकों, मतदाताओं और अल्पसंख्यक समुदायों पर डराने-धमकाने, गिरफ्तार करने और हमले की घटनाएं हुईं। ढाका जैसे इलाकों में मतदाता सूची में असामान्य तरीके से नाम बढ़ाए गए।
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यूनुस पर आरोप
शेख हसीना ने यूनुस पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने उन्हें सत्ता पर अवैध कब्जा करने वाला बताया और कहा कि उनके तहत चुनाव जनता के अधिकारों की उपेक्षा करता है। कुछ रिपोर्टों में हसीना ने यूनुस को ‘हत्यारा और फासीवादी’ भी कहा, लेकिन मुख्य बयान में फोकस चुनाव की वैधता पर रहा।
हसीना की मांगें
शेख हसीना ने छह मुख्य मांगें की हैं, इसके तहत उन्होंने चुनाव को रद् करने, मुहम्मद यूनुस का इस्तीफा, सभी राजनीतिक कैदियों, शिक्षकों, पत्रकारों और पेशेवरों को रिहा, झूठे केसों को वापस लेने और आवामी लीग पर से प्रतिबंध को हटाने के बाद निष्पक्ष, स्वतंत्र और समावेशी चुनाव के लिए तटस्थ कार्यवाहक सरकार बनाकर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।
















