बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस झूठ फैलाने से बाज नहीं आते हैं और वे अपने देश में अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर भी झूठ फैलाते हैं और यह मानते ही नहीं हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ कुछ गलत भी हो रहा है और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर वे यही कहते हैं कि यह सब भारत की मीडिया का प्रोपोगैंडा है या फिर भारत फेक न्यूज़ फैला रहा है।
एक बार फिर से मोहम्मद यूनुस से ब्रिटिश अमेरिकन पत्रकार मेहदी हसन के साथ उसके मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Zeteo के लिए इंटरव्यू में शेख हसीना के निर्वासन के बाद धार्मिक भेदभाव या धर्म के आधार पर होने वाले अत्याचारों पर प्रश्न किये गए। मोहम्मद यूनुस से जब पूछा गया कि बांग्लादेश में हो रही हिंदुओं पर हिंसा पर डोनाल्ड ट्रम्प तक ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी, इस पर उनका क्या कहना है तो मोहम्मद यूनुस का कहना था कि ये सब फेक न्यूज़ है।
मोहम्मद यूनुस ने कहा कि ट्रम्प को कोई जानकारी नहीं है। इस पर मेहदी हसन ने कहा कि आप कह रहे हैं कि हिंदुओं के खिलाफ कोई हिंसा नहीं हुई? और फिर वे कहते हैं कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी तोडफोड और हिंसा की कई घटनाओं को हाल ही में रिपोर्ट किया है, जैसे कि हिन्दू संत को गिरफ्तार करना, मॉब वाइअलन्स आदि। तो यह सब हुआ था?
इस पर मोहम्मद यूनुस ने कहा कि भारत की खासबात इस समय फेक न्यूज़ है। इस पर मेहदी हसन ने कहा कि यह हो सकता है कि भारत ने बढ़ाचढ़ा कर कहा हो, मगर आप कह रहे हैं कि हिंदुओं के साथ हिंसा हुई ही नहीं! इस पर मोहम्मद यूनुस का कहना था कि कुछ घटनाएं होती हैं, पड़ोसियों में झगड़े होते हैं, जैसे हिन्दू है और उसका एक मुस्लिम पड़ोसी है, तो जमीन को लेकर कुछ समस्या है, जैसे दो पड़ोसियों में होती है, तो आप इसे हिन्दू-मुस्लिम कहेंगे? ऐसा नहीं है।
मोहम्मद यूनुस का कहना है कि हिंदुओं के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है, सरकार इस मुद्दे पर बहुत अलर्ट है। उन्होनें कहा कि यही एक मामला है, जिस पर भारत दबाव बनाता है, और मोहम्मद यूनुस का कहना है कि जब भी वे बांग्लादेश के हिंदुओं से बात करते हैं तो यही कहते हैं कि यह मत कहें कि मैं हिन्दू हूँ तो मेरी रक्षा करें, बल्कि यह कहें कि मैं इस देश का नागरिक हूँ, और मुझे उस सुरक्षा पाने का अधिकार है, जो राज्य किसी भी नागरिक को देता है।
मोहम्मद यूनुस ने अपने देश में हो रही हिंदुओं पर हिंसा को नकारा ही नहीं है, बल्कि उन्होनें इसे भारत का प्रोपोगैंडा करार दिया है। उन्होनें कहा कि भारत ही ऐसी झूठी खबरें चलाता है, जबकि वे यह भूल गए कि भारत नहीं, बल्कि उनकी मीडिया में ही हिंदुओं को लेकर तमाम अत्याचारों के समाचार लगातार आते रहते हैं।
चटगांव में भड़की हिंसा के लिए भारत को ठहराया जिम्मेदार, भारत ने दिया उत्तर
हाल ही में बांग्लादेश में चटगांव में चकमा और बंगाली समुदाय के लोगों के बीच भड़के जातीय संघर्ष के लिए भी बांग्लादेश ने भारत को जिम्मेदार ठहराया था। इस हिंसा में बौद्ध मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया था और साथ ही मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर्स का प्रयोग बंगाली भीड़ को उकसाने के लिए किया गया गया था। इस हिंसा में कम से कम चार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
इसे लेकर अंतरिम सरकार के गृह मंत्री जहांगीर आलम चौधरी ने आरोप लगाया था कि इस अशान्ति के पीछे भारत है। अब इस आरोप को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इन झूठे और निराधार आरोपों को सिरे से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार देश में कानून और व्यवस्था को कायम नहीं रख पा रही है और दूसरों पर दोष मढ़ रही है।
उन्होनें यह भी कहा कि चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा, आगजनी और भूमि हड़पने वाले स्थानीय चरमपंथियों की कार्रवाई पर गौर कराना बेहतर होगा।
मोहम्मद यूनुस को अपने गिरेबान में झांकना होगा
भारत पर किसी भी प्रकार की हिंसा का आरोप लगाने से पहले मोहम्मद यूनुस को अपने गिरेबान में झाँकना होगा। यह वहाँ की अपनी रिपोर्ट्स हैं जो यह कह रही हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं या कहें अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं। वे यह नहीं बताते कि कैसे बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या लगातार कम होती गई? सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मोहम्मद यूनुस के इस इंटरव्यू को लेकर कहा कि मोहम्मद यूनुस एक झूठे व्यक्ति हैं। उन्होनें मीडिया की आवाज को बंद किया है। zahid zara नामक यूजर ने लिखा कि बांग्लादेश के अधिकतर आउटलेट उनके साथियों के नियंत्रण में है और जहां पर ऐसी हर खबर दबा दी जाती है, जो उनके शासन की कुछ भी आलोचना करती है।
Dr. Yunus the ultimate liar, a global fraud, and the worst fascist in history.
He has choked the voice of the media. Most of Bangladesh’s major outlets are under the control of his allies, where any news critical of the regime is strictly suppressed.Independent bloggers who try… https://t.co/PQDUiB8KEv
— Zahid Zaha (@zaha_zahid) October 2, 2025
अभी जुलाई में ही बांग्लादेश हिन्दू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउन्सल ने यह कहा था कि वर्ष 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश से जाने के बाद से धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की लगभग 2400 घटनाएं हुई थीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होनें अंतरिम सरकार पर यह भी आरोप लगाया था कि मोहम्मद यूनुस की सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को “झूठी घटनाएं” कहकर नकार दिया था।
अक्टूबर 2025 में जब मोहम्मद यूनुस ने यूएन के एक इंटरव्यू में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुई हिंसा को नकार दिया था तो हिन्दू, बौद्ध ईसाई यूनिटी काउन्सल ने निराशा व्यक्त की थी।
हालांकि मोहम्मद यूनुस ने 2024 में सितंबर में यह भी कहा था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर जो हमले हुए हैं, वे राजनीतिक हैं धार्मिक नहीं।

















