हाल के बजट सत्र 2026 में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण और व्यवहार ने राजनीतिक चर्चाओं में विवाद पैदा किया है। बजट पर चर्चा के दौरान उनके तीखे हमलों, विशेष रूप से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को ‘सरेंडर मोड’ बताने और सरकार पर ‘भारत माता को बेचने’ के आरोपों ने सदन में हंगामा मचा दिया। उनके अनर्गल टिप्पणियों के कुछ हिस्सों को सदन से हटा भी दिया गया। कई विश्लेषकों और विपक्षी दलों ने इसे निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।
संसद में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के उदाहरण
भाषण की प्रकृति: बजट बहस में राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जैसे सेना और राष्ट्रीय हितों को ‘बेचना’। इनमें से कुछ हिस्से expunged (हटाए गए) कर दिए गए। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे ‘baseless’ और ‘buffoonery’ कहा, साथ ही राहुल पर संसद से वॉकआउट करने और बिना जवाब सुने आरोप लगाने की आदत बताई।
अल्पसंख्यक सांसद को ‘ट्रेटर’ कहना: पूर्व कांग्रेस सांसद और अब बीजेपी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को ‘ट्रेटर’ (गद्दार) कहकर संबोधित करने की घटना ने बड़ा विवाद खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सिख समुदाय का अपमान बताया और इसे ‘deeply offensive’ करार दिया।
मंत्री की मीडिया बातचीत में बीच में दाखिल होना: संसद के बाहर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और अश्विनी वैष्णव की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राहुल गांधी ने बीच में घुसकर “Let’s do it together” कहते हुए हाथ पकड़ने की कोशिश की, जिसे मंत्री ने ठुकरा दिया। कांग्रेस ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया, लेकिन इसे असंसदीय व्यवहार माना गया।
सोशल मीडिया पर आक्रामक आईटी सेल की भूमिका
राहुल गांधी के समर्थक और कांग्रेस आईटी सेल की आक्रामकता में हाल के महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ट्रोल-स्टाइल पोस्ट, मीम्स और हमलों में वृद्धि देखी गई है। हालांकि, यह आक्रामकता जमीनी स्तर पर वोट में तब्दील नहीं हो पा रही है, क्योंकि सोशल मीडिया की यह ‘क्रांति’ वास्तविक मतदाता आधार तक नहीं पहुंच रही।
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संसद सत्र के बाद राहुल गांधी की ‘गायब’ होने की प्रवृत्ति
संसद सत्र समाप्त होने के बाद राहुल गांधी अक्सर विदेश यात्राओं पर निकल जाते हैं। हाल ही में विंटर सेशन के दौरान भी जर्मनी यात्रा की खबरें आईं, जिस पर बीजेपी ने तंज कसा। क्या इस बार भी संसद खत्म होते ही वे ‘गोपनीय क्रांति’ के लिए विदेश चले जाएंगे? यह सवाल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मोदी का तंज: ‘गांधी टाइटल का चोर खानदान’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला, कहा कि वे “महात्मा गांधी का सरनेम भी चुरा लिया” और राजनीति को “अपने घर की खेत की मूली” की तरह मानते हैं। मोदी ने इसे परिवारवादी राजनीति का प्रतीक बताया, जहां कांग्रेस ‘चोर खानदान’ की तरह व्यवहार करती है। यह टिप्पणी राहुल गांधी के व्यवहार पर सीधा कटाक्ष थी।
क्या राहुल गांधी विपक्ष का प्रभावी चेहरा बन पाएंगे?
राहुल गांधी का हालिया संसदीय व्यवहार, सोशल मीडिया पर आक्रामकता और विदेश यात्राओं की प्रवृत्ति ने उन्हें ट्रोल की छवि दी है। जबकि उनके भाषणों में सरकार पर हमले तेज हैं, लेकिन कई घटनाएं जिम्मेदारी की कमी दर्शाती हैं। वोट बैंक पर इसका असर सीमित दिख रहा है। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या वे संसद में अधिक परिपक्व और प्रभावी भूमिका निभा पाते हैं या यही ट्रोल-स्टाइल जारी रहता है।

















