भारत-अमेरिका व्यापार समझौता : टैरिफ से राहत, निर्यात को रफ्तार
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम बिजनेस

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता : टैरिफ से राहत, निर्यात को रफ्तार

भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते से भारत का निर्यात बढ़ेगा। साथ ही, टैरिफ में राहत और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा से भारतीय किसानों, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेक्टर को फायदा होगा

Written byसुमित मेहतासुमित मेहता
Feb 18, 2026, 07:40 am IST
inबिजनेस
‘किसानों का रखा गया है पूरा ध्यान’
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अहम अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अमेरिका का बाजार लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का माना जाता है। कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100% ध्यान रखा गया है। भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। इस सौदे से अमेरिकी बाजार में हमारे कृषि उत्पादों जाएंगी। जिससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

‘किसानों का रखा गया है पूरा ध्यान’ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अहम अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अमेरिका का बाजार लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का माना जाता है। कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100% ध्यान रखा गया है। भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। इस सौदे से अमेरिकी बाजार में हमारे कृषि उत्पादों जाएंगी। जिससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जारी संशोधित फैक्टशीट ने कई अहम संकेत दिए हैं। नए दस्तावेज से स्पष्ट होता है कि बातचीत के दौरान भारत ने अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया। प्रारंभिक बयानों में जिन मुद्दों पर अमेरिका ने अपेक्षाकृत कठोर रुख अपनाया था, उनमें अब काफी नरमी आई है। इस व्यापार समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। इसके बाद जारी संयुक्त वक्तव्यों और व्हाइट हाउस की फैक्टशीट में टैरिफ, कृषि उत्पादों, ऊर्जा आयात तथा डिजिटल व्यापार से जुड़े कई बिंदुओं को प्रमुखता से रखा गया था।

हालांकि, हालिया संशोधनों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें विशेष रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़ा विषय, जैसे दालों को पूरी तरह संरक्षित श्रेणी में रखना, यह दर्शाता है कि भारत ने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, 500 अरब डॉलर की खरीद को बाध्यकारी बनाने के बजाय संभावित लक्ष्य के रूप में दर्शाना, डिजिटल सेवा कर को हटाने का उल्लेख समाप्त करना और पूरे समझौते को ‘अंतरिम’ स्वरूप बताना-ये सभी परिवर्तन दस्तावेज की प्रकृति को अधिक संतुलित और लचीला बनाते हैं। ये परिवर्तन संकेत देते हैं कि भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और राजस्व नीति से जुड़े अपने स्वायत्त अधिकारों पर समझौता नहीं किया।

दूरगामी परिणाम

यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता एक दशक से अधिक समय बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में बड़ा बदलाव लाने वाला है। टैरिफ वृद्धि और व्यापारिक टकराव के दौर के बाद इस समझौते से भारतीय वस्तुओं की व्यापक श्रेणी पर अमेरिका के दंडात्मक टैरिफ, जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक था, 18 प्रतिशत तक कम तो होंगे ही, यह भारत का सबसे बड़े निर्यात बाजार के साथ रणनीतिक साझेदारी का पुनर्गठन भी है। आगे शुल्क दरें और घटाने व चुनिंदा उत्पादों पर शून्य कर का वादा भी है। बदले में भारत ने ऊर्जा (तेल), पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी) और उच्च प्रौद्योगिकी के अमेरिकी सामानों के लिए बाजार खोलने तथा अमेरिका की आपूर्ति-श्रृंखला व भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं से अधिक तालमेल बिठाने पर सहमति दी है।

भारत के लिए इसके परिणाम बहुत दूरगामी हैं। यह समझौता निर्यात को फिर से गति दे सकता है, श्रम-प्रधान उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है, लाखों नौकरियां पैदा कर सकता है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार तेजी से टुकड़ों में बंट रहा है, यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में तेजी से जोड़ने की क्षमता रखता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो कुल निर्यात का 18 प्रतिशत है। इसमें कपड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा व समुद्री उत्पाद शामिल हैं।

हालांकि, पिछले एक साल में अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्ता तनावपूर्ण हो गया, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर जवाबी और अतिरिक्त टैरिफ लगाए। भले इसे संरक्षणवादी रणनीति के हिस्सें के रूप में पेश किया गया, लेकिन भारत पर इसका असर गहरा पड़ा। श्रम-प्रधान निर्यात वस्तुओं पर शुल्क दरें 50 प्रतिशत पहुंचने से उनकी कीमतों की प्रतिस्पर्धात्मकता बुरी तरह कम हुई, जिससे ऑर्डर रद्द हुए, लाभ सिमटा और निर्यात केंद्रों में रोजगार के अवसर घटने लगे। उद्योग संगठनों ने पहले चेताया था कि लंबे टैरिफ से सालाना 45-50 अरब डॉलर के निर्यात को नुकसान हो सकता है, जिससे करोड़ों नौकरियों पर खतरा मंडराएगा। नए समझौते को इसी संकट का समाधान माना जा रहा है।

सुधारात्मक कदम

इसी पृष्ठभूमि में नए व्यापार समझौते को सुधारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। भारत के आर्थिक कार्य विभाग के आकलन के अनुसार, समझौते से पहले उच्च अमेरिकी शुल्कों के कारण लगभग 48.2 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। इनमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, रसायन और कुछ चयनित इंजीनियरिंग वस्तुएं शामिल हैं। अब जब शुल्क घटकर 18 प्रतिशत रह गया है और आगे उदारीकरण की उम्मीद है, तो निर्यातक अपनी खोई प्रतिस्पर्धा फिर से हासिल कर सकेंगे। वैश्विक मांग और समझौते की गति के आधार पर अगले 12-24 महीनों में भारत का अमेरिकी निर्यात 15-30 प्रतिशत बढ़ सकता है। यहां तक कि 15 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी से भी निर्यात 100 अरब डॉलर छू लेगा, जो वित्त वर्ष 2025 से 13-14 अरब डॉलर ज्यादा होगा। आशावादी स्थिति में आपूर्ति-श्रृंखलाओं के भारत की ओर झुकने से लाभ और भी बड़ा हो सकता है।

अर्थव्यवस्था को लाभ

यह व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा, खासकर निर्यात-आधारित विकास को गति देने में। अनुमान है कि बढ़ा निर्यात मध्यम अवधि में जीडीपी वृद्धि को 0.3–0.5 प्रतिशत बढ़ाएगा। अमेरिकी निर्यात मजबूत होने से आयात का दबाव संतुलित होगा, विदेशी क्षेत्र स्थिर रहेगा। साथ ही, डॉलर प्रवाह बढ़ने से भारतीय रुपये पर भी अच्छा असर पड़गा, जिससे रुपया स्थिर होगा और उसमें उतार-चढ़ाव कम होगा। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद इसका असर देखने को मिला, जब भारतीय रुपया मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 90 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस व्यापार समझौते से वस्त्र-परिधान, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग-ऑटो कंपोनेंट्स, रसायन, समुद्री उत्पाद व चमड़ा उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। सबसे अधिक लाभ वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है, जो अमेरिकी निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत है। यह क्षेत्र अत्यंत मूल्य-संवेदनशील है और पहले लगे उच्च् शुल्कों के झटके ने भारतीय परिधानों को वियतनाम, बांग्लादेश और मध्य अमेरिका के आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले गैर-प्रतिस्पर्धी बना दिया था। शुल्कों में कमी के बाद अब भारतीय निर्यातक एक बार फिर प्रतिस्पर्धा में लौट आए हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, अगले दो वर्ष में अमेरिका को वस्त्र निर्यात 20-25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे 6-8 अरब अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त निर्यात राजस्व प्राप्त हो सकता है।

‘किसानों का रखा गया है पूरा ध्यान’

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अहम अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अमेरिका का बाजार लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का माना जाता है। कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100% ध्यान रखा गया है। भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। इस सौदे से अमेरिकी बाजार में हमारे कृषि उत्पादों जाएंगी। जिससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

निर्यात बढ़ेगा

रोजगार के लिहाज से भी इसका महत्व कम नहीं है। वस्त्र और परिधान उद्योग में 3.5 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों की है। निर्यात में सुधार से न केवल खोए हुए रोजगार की बहाली होने की उम्मीद है, बल्कि कताई, बुनाई, प्रसंस्करण और परिधान निर्माण के विभिन्न क्लस्टरों में लगभग 2 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना भी है।
अमेरिका को होने वाला रत्न एवं आभूषण निर्यात (लगभग 9-10 अरब डॉलर सालाना) उच्च शुल्कों से सबसे अधिक था। कम लाभ और वैकल्पिक मांग के कारण छोटी सी शुल्क वृद्धि ने भी बड़ा नुकसान किया। अब शुल्क कम होने से हीरे, सोने के आभूषण व जड़ाऊ उत्पाद प्रतिस्पर्धी होंगे।

विश्लेषकों का अनुमान है कि विशेष रूप से मध्यम मूल्य वर्ग के आभूषण खंड में निर्यात 10-15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी एशियाई केंद्रों से अपनी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल करने में मदद मिलेगी। इंजीनियरिंग निर्यात (औद्योगिक मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स, विद्युत उपकरण, धातु उत्पाद) अमेरिका को होने वाले गैर-पारंपरिक निर्यात की रीढ़ हैं। ये वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखलाओं का हिस्सा हैं, जहां शुल्क अंतर मायने रखता है। यह सौदा भारत को ‘चीन+1’ विनिर्माण केंद्र बनाता है। इससे मध्यम अवधि में इंजीनियरिंग वस्तु्ओं के निर्यात में 12-18 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जो एमएसएमई को फायदा पहुंचाएगी। रसायन क्षेत्र, खासकर विशेष रसायन (स्पेशलिटी केमिकल्स) मूल्य-लोच से कम और दीर्घकालिक अनुबंधों से अधि‍क प्रभावित होता है। फिर भी, शुल्क कटौती वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला विविधीकरण के बीच भारत को भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनाएगी। इस क्षेत्र में 10-12 प्रतिशत निर्यात वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें बड़ा लाभ विशेष रसायन, कृषि-रसायन मध्यवर्ती व परफॉर्मेंस केमिकल्स में केंद्रित रहेंगे।

झींगा, समुद्री खाद्य व चमड़ा पहले उच्च शुल्कों से बुरी तरह प्रभावित थे। अब शुल्क कटौती से अमेरिकी खरीदारों के पूछताछ बढ़े हैं। समुद्री निर्यात (खासकर झींगा) में 15-20 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है। इससे आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात की तटीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तिर प्रदेश के चमड़ा-फुटवियर क्लस्टर्स में भी रोजगार सृजन और भर्तियों में फिर से तेजी आने की उम्मीवद है। इस समझौते का सबसे बड़ा राजनीतिक-सामाजिक फायदा रोजगार सृजन है। वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण व समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र उच्च शुल्कों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।

रोजगार सृजन

अब निर्यात सुधार से उद्योग संगठनों का अनुमान है कि इस समझौते से अगले दो साल में 3-5 लाख नौकरियां सृजित होंगी, चाहे प्रत्यक्ष हो या लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग जैसे अप्रत्यक्ष प्रभावों से। तिरुपुर, सूरत, मुरादाबाद व कोलकाता क्लस्टर्स में पहले ही बर्खास्त श्रमिकों को वापस बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है। उच्च शुल्क झेल चुके क्षेत्र अब ज्यादा लाभ में हैं। वस्त्र-परिधान क्षेत्र, जहां ऑर्डर में तेज गिरावट आई थी, अब मूल्य-प्रतिस्पर्धा लौट आई है। दबाव वाले रत्न-आभूषण में भी खरीदारों की रुचि बढ़ी है। समुद्री उत्पाद, विशेषकर झींगा निर्यातक, लातिनी अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता दोबारा पाने से लाभान्वित हो रहे हैं।

हालांकि पूर्ण पुनरुद्धार में समय लगेगा, किंतु दिशा स्पष्ट है। उच्च शुल्कों से सबसे प्रभावित क्षेत्र अब मुख्य लाभार्थी बन रहे हैं। अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 18 प्रतिशत रह गया है, जबकि चुनिंदा श्रेणियों के लिए शून्य-शुल्क पहुंच पर बातचीत जारी है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, रणनीतिक रूप से महत्विपूर्ण क्षेत्रों की लगभग 10 अरब डॉलर की वस्तु्एं भविष्य में शुल्क-मुक्त हो सकती हैं। कार्यान्वयन विवरण से सटीक संख्या स्पष्ट होगी, लेकिन कुल मिलाकर गहरा उदारीकरण ही लक्ष्य है।

यह सौदा पारस्परिक है। इसके तहत भारत से अपेक्षा की जा रही है कि वह कुछ प्रमुख क्षेत्रों में अमेरिका से आयात बढ़ाएगा। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका से लगभग 45.7 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का आयात किया था। इनमें कच्चा तेल और एलएनजी (लगभग 14 अरब डॉलर), बहुमूल्य धातुएं और रत्न (5 अरब डॉलर), मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण (करीब 4.4 अरब डॉलर), विद्युत उपकरण (लगभग 3.4 अरब डॉलर) के साथ-साथ एयरोस्पेस, रक्षा व उच्च-प्रौद्योगिकी उपकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिकी पूंजीगत वस्तुअओं और प्रौद्योगिकी आयात पर कम टैरिफ के बदले में हुए समझौते ने भारत को यह सौदा करने में मदद की है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कोई व्यापक मुक्त व्यापार समझौता नहीं है, लेकिन संभवतः उससे भी अधिक प्रभावशाली है। यह व्यवधान के एक दौर के बाद एक रणनीतिक पुनर्संतुलन को दर्शाता है, जो भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंधों में से एक में निश्चितता व भरोसा बहाल करता है। भारत के लिए यह समझौता आर्थिक अवसर और रणनीतिक हितों का एक दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है। निर्यात वृद्धि, रोज़गार सृजन व आपूर्ति शृंखला में एकीकरण ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब वैश्विक व्यापार शुद्ध आर्थिक तर्कों की बजाय लगातार अधिक भू-राजनीतिक कारकों से प्रभावित हो रहा है।

अब चुनौती क्रियान्वयन की है। यह सुनिश्चित करने की कि निर्यातक अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करें, लॉजिस्टिक्स और अनुपालन में सुधार हो तथा प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने वाले सुधारों को आगे बढ़ाया जाए। यदि इसे सही ढंग से किया गया, तो भारत–अमेरिका व्यापार समझौता एक नए दौर की शुरुआत का संकेत बन सकता है। ऐसा दौर जिसमें भारत केवल वैश्विक व्यापार का लाभार्थी नहीं, बल्कि उसका एक प्रमुख शिल्पकार भी होगा।

 

Topics: डिजिटल सेवाश्रम-प्रधान उद्योगरुपये की मजबूतीरणनीतिक साझेदारीटैरिफ में बदलावइंजीनियरिंगरत्न-आभूषणपाञ्चजन्य विशेषसमुद्री उत्पाद रोजगार अनुमानIndia US trade agreementजीडीपी वृद्धिटैरिफ में कटौतीनिर्यात को रफ्ताररोजगार सृजनवना
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कैप्टन स्मित मछार

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दुनिया कर रही सलाम, फिर भारत का लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम चुप क्यों ?

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

Smartphone Shastra and Gen Z Indian Youth Analysis Swami Vishalanand Panchjanya

स्मार्टफोन, शास्त्र और संवाद: दिशाहीन विरोध प्रदर्शनों के बीच क्या सोच रहा आज का भारतीय युवा? पढ़ें विशेष विश्लेषण

हनुमान अंश : जड़ों की ओर लौटता सिनेमा

अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

35 सवाल, 15 साल का डाटा और घुसपैठ का नेटवर्क: डेमोग्राफी चेंज पर गृह मंत्रालय की जांच से क्यों मची हलचल?

हरिपुर कालसी में हरिघाट के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ स्वामी चिदानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर अरुण गिरि जी महाराज

हरिपुर : विरासत का पुनरुत्थान

Load More

ताज़ा समाचार

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Borivali Mumbai Rashtra And Dharm Panchjanya News

भारतीय ज्ञान संपदा की संपूर्ण विश्व को जरुरत: बोरीवली में बोले सरसंघचालक जी- ‘भारत की ओर उम्मीद से देख रही दुनिया’

कल का मौसम: 3 अक्टूबर को देश के किन राज्यों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

PM मोदी से बोले कैप्टन मच्छार- हनुमानजी ने बचा लिया, जब भी दर्द में होता हूं ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ता हूं

चित्र प्रतीकात्मक

उजड़ता पंजाब: 6 महीने में मां ने खोया दूसरा बेटा! नशे की ओवरडोज से सुनाम में युवक की मौत, परिजनों में हाहाकार

सांकेतिक चित्र

पंजाब बॉर्डर पर BSF की बड़ी कार्रवाई: तरनतारन में घुसपैठ कर रहे 2 पाकिस्तानी तस्कर ढेर, 1 अंधेरे का फायदा उठाकर फरार!

Rampur Tiraha Kand CM Pushkar Singh Dhami Tributes Uttarakhand State Activists Statue Panchjanya

रामपुर तिराहा सभा में CM धामी का बड़ा ऐलान: गांवों में लगेंगी आंदोलनकारियों की मूर्तियां, ई-लाइब्रेरी का होगा निर्माण!

Akhil Bharatiya Vyas Sangh Kashi National Convention Jagadguru Balak Devacharya Panchjanya

काशी में गरजा व्यास संघ: कन्वर्जन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z को राम भक्ति से जोड़ने का प्रस्ताव!

Uttarakhand Religious Tourism Record Pilgrims Badrinath Kedarnath Kainchi Dham CM Dhami Panchjanya

देवभूमि में टूटा रिकॉर्ड: उत्तराखंड में 1.16 करोड़ से अधिक पहुंचे श्रद्धालु, CM धामी बोले- अर्थव्यवस्था को मिली ताकत!

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

धर्म और राष्ट्र अलग नहीं…  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

सड़क पर ब्रेकर बनाने के विवाद में RSS कार्यकर्ता की हत्या, दबंगों ने लाठी- डंडों से किया था हमला

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies