फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। मैक्रों 18 से 20 फरवरी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट के लिए भारत आ रहे हैं। इसी बीच डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) अगले हफ्ते मीटिंग करने वाली है, जिसमें 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
DAC की मीटिंग और बड़ा प्रस्ताव
टाइम्स ऑफ इंडिया ने रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा कि DAC की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। ये मीटिंग फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने वाली है। इसमें कई बड़े डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रस्तावों पर चर्चा होगी, लेकिन सबसे अहम है 114 राफेल जेट्स का डील। इसकी अनुमानित कीमत 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। AoN मिलने के बाद टेक्निकल और कमर्शियल नेगोशिएशंस शुरू होंगे। ये डील पिछले महीने डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से पहले ही क्लियर हो चुकी है। अब DAC से हरी झंडी मिलने के बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को फाइनल अप्रूवल के लिए जाएगी।
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डील में क्या-क्या शामिल है
इस डील में कुल 114 राफेल जेट्स आएंगे। इनमें से 18 जेट्स फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से आएंगे, यानी तैयार हालत में। बाकी जेट्स भारत में ही बनाए जाएंगे, जिसमें 60% तक इंडिजिनस कंटेंट (स्वदेशी हिस्सा) होगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि कुल 114 में से करीब 80% जेट्स भारत में ही प्रोड्यूस होंगे।
इंडियन एयर फोर्स (IAF) को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल मिलेंगे। ये ज्यादातर भारत में डसॉल्ट एविएशन और भारतीय प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के साथ मिलकर बनेंगे।
क्यों इतनी जल्दी और जरूरी है ये डील
भारतीय वायुसेना अभी सिर्फ 30 फाइटर स्क्वाड्रन्स चला रही है, जबकि स्वीकृत ताकत 42 स्क्वाड्रन्स की है। यानी कमी बहुत है। ऊपर से पाकिस्तान और चीन से खतरे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान-चीन की स्ट्रैटेजिक साझेदारी और पाकिस्तान-बांग्लादेश के बढ़ते रिश्ते से रीजनल सिक्योरिटी चिंताएं बढ़ गई हैं। राफेल को 4.5-जेनरेशन का बहुत मजबूत मल्टी-रोल फाइटर माना जाता है। इसमें मीटियोर, स्कॉल्प मिसाइल्स और लेजर-गाइडेड बम जैसे घातक हथियार हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भी इसकी ताकत दिख चुकी है। डील पूरी होने पर IAF के पास कुल 150 राफेल हो जाएंगे। इसके अलावा इंडियन नेवी के पास 26 राफेल (कैरियर-कंपैटिबल वर्जन) होंगे।
क्यों जरूरी है ये डील
ये डील इसलिए भी जल्दी जरूरी है क्योंकि भारत का अपना फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) आने में अभी काफी समय लगेगा। कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करने का प्रोसेस चल रहा है। दूसरी तरफ तेजस MkIA का प्रोडक्शन धीमा है क्योंकि इसमें लगने वाला इंजन अमेरिकी कंपनी GE से आता है और उसमें देरी हो रही है। इसलिए फिलहाल राफेल जैसे साबित और ताकतवर प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ाना समझदारी है। मैक्रों की विजिट के दौरान डील को फाइनल शेप देने की भी संभावना है।













