हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने यूक्रेन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अब हंगरी का दुश्मन बन गया है। दरअसल, यूक्रेन चाहता है कि यूरोपीय संघ रूस से तेल और गैस खरीदना बंद कर दे, खासकर हंगरी के लिए। ओरबान ने कहा, “यूक्रेनियंस को ब्रसेल्स में यह लगातार मांग बंद करनी चाहिए कि हंगरी को सस्ती रूसी एनर्जी से अलग किया जाए।”
मुख्य वजह: रूसी तेल और गैस पर दबाव
यह बात उन्होंने 7 फरवरी 2026 को पश्चिमी शहर ज़ोम्बाथेली में एक रैली के दौरान कही। ओरबान का कहना है कि यूक्रेन लगातार ब्रसेल्स (यूरोपीय संघ की राजधानी) में दबाव डाल रहा है कि हंगरी को सस्ती रूसी एनर्जी से काट दिया जाए। यूक्रेन चाहता है कि यूरोपीय संघ रूस से तेल और गैस खरीदना बंद कर दे, खासकर हंगरी के लिए। ओरबान ने कहा, “यूक्रेनियंस को ब्रसेल्स में यह लगातार मांग बंद करनी चाहिए कि हंगरी को सस्ती रूसी एनर्जी से अलग किया जाए।”
उनका सीधा शब्द था – “जब तक यूक्रेन यह मांग करता रहेगा कि हंगरी को सस्ती रूसी एनर्जी से काटा जाए, तब तक यूक्रेन सिर्फ हमारा विरोधी नहीं, बल्कि हमारा दुश्मन है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो हंगरी के घरों में बिजली-गैस के बिल बहुत तेजी से बढ़ जाएंगे। आम परिवारों पर यह बहुत भारी पड़ेगा। उन्होंने एक आंकड़ा भी दिया कि बिना सब्सिडी के हर परिवार को सालाना करीब 10 लाख फोरिंट (हंगेरियन करेंसी) ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
हंगरी का रुख रूस के साथ
हंगरी ने शुरू से ही रूस-यूक्रेन संघर्ष में अलग रास्ता अपनाया है। वे यूक्रेन को हथियार नहीं भेज रहे हैं। ओरबान बार-बार कहते हैं कि इस समस्या का हल बातचीत से निकालना चाहिए, न कि और हथियार भेजकर। वे मानते हैं कि यूरोपीय संघ के सैंक्शंस और रूसी एनर्जी बंद करने की कोशिशें यूरोप के लिए खुद को नुकसान पहुंचा रही हैं।
हंगरी ने हाल ही में यूरोपीय संघ के खिलाफ मुकदमा भी ठोका है। उन्होंने इसे “आत्मघाती” कदम बताया है कि रूसी एनर्जी पर बैन लगाया जा रहा है। हंगरी अभी भी रूस से तेल और गैस लेता है, क्योंकि यह उनकी अर्थव्यवस्था और लोगों के लिए सस्ता पड़ता है।
यूक्रेन का EU में शामिल होना
ओरबान ने दोहराया कि वे यूक्रेन के यूरोपीय संघ में शामिल होने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि यूक्रेन के साथ कोई सैन्य या आर्थिक गठबंधन हंगरी के लिए मुसीबत लेकर आएगा। वे मानते हैं कि इससे और बड़ी परेशानियां पैदा होंगी।
NATO और रूस में सीधा युद्ध
ओरबान ने पहले भी कई बार चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो NATO और रूस के बीच पूरा युद्ध छिड़ सकता है। वे इसे बहुत खतरनाक मानते हैं और कहते हैं कि यूरोप को शांति की तरफ बढ़ना चाहिए, न कि और उलझना। यह सब कुछ मिलाकर हंगरी की नीति साफ दिखती है – वे रूस के साथ अपने रिश्ते बचाना चाहते हैं, सस्ती एनर्जी जारी रखना चाहते हैं और यूक्रेन की उन मांगों से सहमत नहीं हैं जो हंगरी की जनता पर बोझ डालें।











