मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल होने पर मुंबई में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। जिसमें राष्टीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संघ के उद्भव के बारे में बात की। उन्होंने बताया संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है। अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है।
मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है। हमारा काम बिना किसी के विरोध किए है। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को पावर नहीं चाहिए। जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं, उन्हें करने के लिए संघ है।
उन्होंने कहा कि बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना। ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे। संघ ने पहले से तय किया – सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है….भारत में रहने वाले सभी हिन्दू ही हैं।

















