अमेरिका ने यूक्रेन पर चुनाव कराने का दबाव बढ़ा दिया है। मूल रूप से यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की का कार्यकाल मई 2024 में खत्म हो चुका था, लेकिन युद्ध की वजह से मार्शल लॉ लगा हुआ है और चुनाव नहीं हो पाए। अब ट्रंप प्रशासन की तरफ से साफ कह दिया जा रहा है कि जल्द से जल्द वोट डलवाने चाहिए।
अमेरिका की तरफ से क्या दबाव है?
ट्रंप ने कई बार ज़ेलेंस्की से कहा है कि चुनाव होने चाहिए। उनकी टीम में स्पेशल एंवॉय स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशर (ट्रंप के दामाद) शामिल हैं। हाल ही में अबू धाबी और मियामी में हुई मीटिंग्स में अमेरिकी टीम ने यूक्रेन के अधिकारियों से कहा कि चुनाव “जल्दी” करवाओ। तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका ने मई में ही चुनाव और रूस के साथ संभावित शांति डील पर रेफरेंडम साथ-साथ करवाने की बात की। लेकिन कई लोगों ने इसे “अवास्तविक” या “फैंटास्टिक” बताया। एक सूत्र ने कहा, “अमेरिकी जल्दबाजी में हैं।” दूसरा बोला कि क्षेत्रीय मुद्दों (टेरिटरी) पर अभी कोई प्रगति नहीं हुई, जो सबसे बड़ा झगड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि युद्ध के दौरान भी लोकतंत्र में चुनाव होने चाहिए। पहले भी ट्रंप के एंवॉय कीथ केलॉग ने कहा था कि चुनाव “होने चाहिए” और सीजफायर के बाद साल के अंत तक हो सकते हैं।
यूक्रेन की तरफ से क्या स्थिति है?
ज़ेलेंस्की लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि मार्शल लॉ के दौरान चुनाव नहीं हो सकते। दिसंबर 2025 में उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव करके चुनाव संभव हैं। उन्होंने ये भी कहा कि वोट करवाने में 3 महीने लग सकते हैं और इसके लिए अमेरिका से मजबूत सुरक्षा गारंटी चाहिए। क्योंकि रूस की तरफ से हमले का खतरा बना रहता है।
ज़ेलेंस्की की पॉपुलैरिटी पर भी असर पड़ा है। भ्रष्टाचार के कुछ स्कैंडल्स आए, जिसमें दो मंत्री और चीफ ऑफ स्टाफ एंड्रे यरमाक के इस्तीफे हुए। अब यरमाक की जगह किरिल बुदानोव को लाया गया। पोलिंग में ज़ेलेंस्की 62% पर हैं, जबकि वैलेरी ज़ालुझनी 72% और बुदानोव 70% पर। मतलब अगर चुनाव हुए तो मुश्किल हो सकती है।
फिर भी ज़ेलेंस्की ने कहा कि वो चुनाव के लिए तैयार हैं, लेकिन शर्तें पूरी होनी चाहिए – जैसे कानूनी बदलाव, सुरक्षा और समय।
रूस का क्या रुख है?
रूस अब ज़ेलेंस्की को वैध नेता नहीं मानता। पुतिन ने दिसंबर में कहा था कि अगर चुनाव हुए तो वो उस दिन यूक्रेन पर “डीप स्ट्राइक्स” रोकने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन शांति समझौते के लिए ज़ेलेंस्की की वैधता एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बात ये है कि अमेरिका शांति डील और ट्रूस के साथ चुनाव को जोड़कर देख रहा है, यूक्रेन सुरक्षा और कानूनी आधार चाहता है, और रूस वैधता पर सवाल उठा रहा है। अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही।













