पिछले सात दिनों में चांदी की कीमतों में ऐसी जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है, जिसने निवेशकों से लेकर कारोबारियों तक सभी को चौंका दिया है। कभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली चांदी अब अपने हाई लेवल से लगभग आधी कीमत पर आ गई है। यह गिरावट इतनी तेज रही कि बाजार में हलचल मच गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी को चांदी ने 4 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर छू लिया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि चांदी की कीमतें और ऊपर जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके अगले ही दिन यानी 30 जनवरी से कीमतों में भारी गिरावट शुरू हो गई।
7 दिनों में चांदी करीब ₹1.90 लाख सस्ती- लगातार तीन कारोबारी सत्रों तक चांदी के दाम गिरते रहे। बीच में दो दिन मामूली तेजी जरूर आई, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। 5 फरवरी से एक बार फिर चांदी की कीमतों में तेज गिरावट शुरू हुई, जो 6 फरवरी यानी शुक्रवार को भी जारी रही। शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक MCX पर चांदी 7 दिन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान चांदी की कीमत गिरकर 2 लाख 29 हजार 187 रुपये प्रति किलो तक आ गई। यानी सिर्फ सात दिनों में चांदी करीब 1 लाख 90 हजार रुपये सस्ती हो गई। हालांकि खबर लिखे जाने तक चांदी लगभग 3 प्रतिशत यानी 7,315 रुपये की गिरावट के साथ 2 लाख 36 हजार 500 रुपये पर कारोबार कर रही थी। इस दौरान चांदी का दिन का उच्चतम स्तर 2 लाख 43 हजार 277 रुपये रहा।
वहीं, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 12 बजे चांदी की कीमत 2 लाख 41 हजार 184 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। जबकि एक दिन पहले यानी 5 फरवरी को इसका भाव 2 लाख 52 हजार 232 रुपये था। इसका मतलब है कि सिर्फ एक दिन में ही चांदी 11 हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई। अगर 29 जनवरी के IBJA रेट की बात करें, जब चांदी 3 लाख 79 हजार 988 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी, तो वहां से अब तक करीब 1 लाख 38 हजार 800 रुपये की गिरावट आ चुकी है। यह गिरावट बेहद बड़ी मानी जा रही है।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है- कमोडिटी मार्केट के जानकार और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि फिलहाल चांदी की कीमतों में गिरावट थमती हुई नजर नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह चीन में शुरू होने वाला लूनर न्यू ईयर उत्सव है। चीन में लूनर न्यू ईयर 17 फरवरी से शुरू होकर करीब 25 फरवरी तक चलता है। इस दौरान चीन में ज्यादातर बाजार, फैक्ट्रियां और औद्योगिक गतिविधियां बंद रहती हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक धातु उपभोक्ता देश है। जब वहां कामकाज बंद हो जाता है, तो चांदी समेत कई कमोडिटी की मांग तेजी से घट जाती है।
डिमांड घटने से कीमतों पर सीधा असर पड़ता है और बाजार में दबाव बनता है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हालात बने रहे, तो आने वाले दिनों में चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलो के नीचे भी जा सकती है।













