उत्तराखंड में जुलाई से खत्म होगा मदरसा बोर्ड, धामी सरकार का बड़ा फैसला
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उत्तराखंड में जुलाई से खत्म होगा मदरसा बोर्ड, धामी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तराखंड में इस साल जुलाई माह से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म होने जा रहा है। बीजेपी सरकार ने ट्रिपल तलाक कानून, समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने के बाद मदरसा बोर्ड खत्म करके एक और साहसिक प्रयोग देवभूमि उत्तराखंड में किया है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Feb 4, 2026, 01:05 pm IST
inउत्तराखंड
मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड में इस साल जुलाई माह से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म होने जा रहा है। बीजेपी सरकार ने ट्रिपल तलाक कानून, समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने के बाद मदरसा बोर्ड खत्म करके एक और साहसिक प्रयोग देवभूमि उत्तराखंड में किया है। उल्लेखनीय है कि पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने के लिए मदरसा बोर्ड को ही समाप्त करते हुए आगामी शिक्षा सत्र से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के छतरी के नीचे एकत्र कर दिया है।

अभी तक जो मदरसे चल रहे थे या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाएं चल रही थी उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और उन्हें आगे से प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम ही पढ़ाना होगा और साथ ही उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इन शिक्षण संस्थाओं को प्राधिकरण के छतरी के अधीन इसलिए पंजीकरण जरूरी किया गया है ताकि वे सरकार की आर्थिक सहायता ,वजीफा आदि ले सकेंगे। अब आगे से मदरसा नाम की संस्थाएं राज्य में नहीं चल पाएंगी।

क्यों लिया धामी सरकार ने निर्णय?

धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड समाप्त करने का निर्णय इसलिए लिया था कि उत्तराखंड में सैकड़ों मदरसे बिना सरकार की अनुमति से चल रहे थे और यहां बाहरी राज्यों के मुस्लिम बच्चे लाकर पढ़ाए जा रहे थे। हरिद्वार जिले में बहुत से मदरसे संज्ञान में आए जहां हिन्दू बच्चे भी इस्लाम की मजहबी शिक्षा लेते हुए मिले जिसका संज्ञान राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने लिया था और शासन के उच्च अधिकारियों  का जवाबतलब किया था। धामी सरकार ने 227 अवैध मदरसे बंद कराते हुए उनकी तालाबंदी करवा दी थी। इन अवैध मदरसों को कौन फंडिंग कर रहा था,इनके संचालकों का सत्यापन जब हुआ तब  सरकार की भी नींद टूटी और उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले अपनी कैबिनेट में मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने का फैसला लिया फिर इसे विधानसभा में पारित करवा कर,अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के लिए नई राष्ट्रवादी शिक्षा व्यवस्था को लागूं कराने का फैसला लिया जिसे राज्यपाल ने भी स्वीकृति प्रदान की।

प्राधिकरण का गठन

उत्तराखंड की धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के 12 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है।जिसके अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को बनाया गया है, प्रोफेसर गांधी सिख समुदाय से है और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ है। सदस्यों में दो मुस्लिम प्रोफेसर है जोकि अल्मोड़ा में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में कार्यरत है।इनमें डॉ सैय्यद अली हमीद का नाम भी शामिल है साथ ही एक  मुस्लिम युवक महिला प्रोफसर रोबिना अमन का नाम भी है। इसी तरह से जैन समाज से डॉ राकेश जैन, ईसाई समुदाय से डॉ एल्बा, बौद्ध समुदाय से पेमा तेनजिन और सिख समुदाय से डॉ गुरमीत सिंह का नाम है। समाजसेवी राजेंद्र बिष्ट और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को भी स्थान मिला है,तीन अन्य पदेन सदस्य है जोकि अल्पसंख्यक और शिक्षा विभाग से है ।

क्या कहते हैं विशेष सचिव डॉ धकाते?

अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते कहते है कि प्राधिकरण का काम अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए सेलेव्स तैयार करना है कि बच्चों को यदि उनके धर्म की शिक्षा देने है तो क्या देनी है ? इस पर उन्हें निर्णय लेना है। बाकि पाठ्यक्रम उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का पढ़ाया जाएगा ।

मुस्लिम नेताओं के बयान 

धामी सरकार के इस फैसले का मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शमूम कासमी ने स्वागत करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यक बच्चे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम जब पढ़ेंगे तो वे दुनियां की तरक्की के साथ जुड़ेंगे। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स कहते है,यूसीसी, ट्रिपल तलाक के बाद ये धामी सरकार का ऐतिहासिक फैसला है, मजहबी शिक्षा देने वाले मदरसे अब नए जमाने के शिक्षण संस्थानों में तब्दील हो जाएंगे इससे अल्पसंख्यक बच्चों की तालीम में सुधार होगा। अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा है कि अब हमारे बच्चे भी अच्छी शिक्षा लेकर देश दुनिया के साथ जुड़ेंगे उन्हें कुछ सालों बाद देश विदेश में नौकरी और कारोबार करने के अवसर मिलेंगे।ये एक ऐतिहासिक निर्णय है जिसके लिए वे धामी सरकार का आभार प्रकट करती है।

CM पुष्कर सिंह धामी का तर्क 

मुख्यमंत्री धामी कहते अभी तक ये नहीं पता था कि मदरसों में क्या पढ़ाया जा रहा है? कौन पढ़ रहा है, कौन पढ़ा रहा है ? फंडिंग कैसे हो रही है कोई हिसाब किताब नहीं, सरकार वजीफा दे रही थी कहां जा रहा था पता नहीं।जब जांच पड़ताल हुई तो कई मामले सामने आए। देवभूमि उत्तराखंड में अवैध मदरसे चल रहे थे दो सौ से ज्यादा अवैध मदरसे  बंद कराए गए। सरकार ने उसी दौरान फैसला लिया था कि मदरसे बंद होंगे, कोई मजहबी शिक्षा कोई कबीलाई शिक्षा यहां नहीं दे जाएगी। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम से अल्पसंख्यक बच्चे शिक्षा लेंगे ताकि उनका भविष्य संवारा जा सके।अभी तक अल्पसंख्यक परिभाषा में केवल मुस्लिम समुदाय को ही सरकारी सुविधाएं मिलती थी अब,मुस्लिम के साथ साथ जैन,सिख,ईसाई, पारसी आदि सबके लिए बराबरी के अवसर मिलेंगे।

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