ईरान : विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं के साथ बलात्कार और नृशंस हरकतें, एक पत्रकार का चौंकाने वाला दावा
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ईरान : विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं के साथ बलात्कार और नृशंस हरकतें, एक पत्रकार का चौंकाने वाला दावा

ईरान में विद्रोह के बाद इस्लामिक रिपब्लिक का दमन भयावह रूप ले चुका है। जर्मन-ईरानी पत्रकार अब्दुल्लाही के खुलासों में महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या, शव जलाने और जहरीली गैस के इस्तेमाल जैसे सनसनीखेज दावे सामने आए हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Feb 3, 2026, 08:00 pm IST
in विश्व

ईरान में विद्रोह हुआ और अब उसे कथित रूप से दबाया जा रहा है। इस्लामिक रिपब्लिक में दमन किस सीमा तक होगा, इसकी कल्पना उन्हीं घटनाओं से की जा सकती है, जो अनिवार्य हिजाब वाले कानून का विरोध करने वालों का दमन करने के लिए की गई थीं। असंख्य लोगों को फांसी पर लटका दिया गया था। महिलाओं को गिरफ्तार किया गया और न जाने कितने अत्याचार किये गए थे। और अब तो यह सरकार के खिलाफ ही आंदोलन था।

अब जो दमन की घटनाएं सामने आ रही हैं, वह वीभत्स हैं। वे डराने वाली हैं। वे बहुत ही भयभीत करने वाली हैं। जर्मन-ईरानी पत्रकार अब्दुल्लाही ने इस दमन को लेकर जो तथ्य बताए हैं, वह पूरी दुनिया को सकते में डाल रहे हैं। उनका जन्म 1981 में तेहरान में हुआ था और वे हैम्बर्ग वर्ष 1986 में चले गए थे।

डेली मेल के अनुसार उन्होनें ईरान में लोगों से बात करने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वे शासन द्वारा लोगों पर किये जा रहे दमनचक्र को बताया रहे हैं।

महिलाओं के साथ नृशंसता की हर सीमा पार

महिलाओं को लेकर उन्होनें कहा कि किसी भी महिला का शव नहीं आ रहा है या फिर बहुत कम आ रहे हैं। और ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है, उनके गर्भाशय हटाए जा रहे हैं और उनकी खोपड़ी छीली जा रही है और साथ ही उनके शरीर\ को सिगरेट से गोदा जा रहा है।

उन्होनें कहा कि खमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक रीपब्लिक बलात्कार को अपने ही लोगों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

पत्रकार ने कहा कि महिलाओं में अधिकतम डर डालने के लिए बलात्कार किया जा रहा है और इसलिए भी कि वे पीछे हट जाएं और साथ ही वे सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ आंदोलन न करें।

अपने ही मुल्क और अपने ही मजहब की महिलाओं के साथ ऐसी नृशंसता?

जब ऐसे समाचार सामने आए हैं, तो ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या अपने ही मुल्क और अपने ही मजहब की महिलाओं के साथ कोई शासन या कोई भी नेतृत्व ऐसी कोई नृशंसता कर सकता है? तो इन घटनाओं को देखते हुए तो यही लगता है कि ईरान में इस समय केवल सत्ता ही एकमात्र उद्देश्य रह गया है और इसे पाने के लिए अपनी ही महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा सकता है और वह भी केवल उन्हें चुपकरने के लिए?

bild ने भी प्रकाशित की है ऐसी ही रिपोर्ट

एक जर्मन पोर्टल bild ने भी अब्दुल्लाही के वीडियो के आधार पर रिपोर्ट बनाई है तो वहीं यह भी लिखा है कि ईरान में अधिकारी कह रहे हैं कि “युवतियों को ऊपर से अलग अलग वाहनों में फेंको और कहो कि हम तुम्हें मारेंगे नहीं। पहले हम तुम्हारा बलात्कार करेंगे और फिर हम तुम्हें मारेंगे!”

अब्दुल्लाही ने यह भी कहा कि वे यह सब अपने देश के कई लोगों के साथ करेंगे और यह बर्दाश्त करना बहुत कठिन है। वे अपने लोगों के साथ भयानक काम कर रहे हैं, वे परिवारों को उनके लोगों के शव भी नहीं लौटा रहे हैं, बल्कि वे घटनाओं को दबाने के लिए शवों को जलाए दे रहे हैं।“

ईरान में यह भी दावा किया जा रहा है कि विद्रोह को दबाने के लिए जहरीली गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब्दुल्लाही ने कहा कि वे लोगों से लगभग रोज ही बातें करते हैं। हर किसी ने किसी भी अपने को खोया है। हर कोई मातम में है और काले कपड़े पहने हुए हैं, मगर लोग कह रहे हैं कि वे पीछे नहीं हटेंगे।

इस्लामिक रीपब्लिक और महिलाओं का नाता

वर्ष 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति में ईरानी महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। ईरान के शाह के खिलाफ वामपंथी और इस्लामिस्ट ताकतों ने साथ मिलकर क्रांति की थी। परंतु उन्हें यह नहीं पता होगा कि इस क्रांति के बाद वे मजहबी नेताओं के लिए एक वस्तु बनकर रह जाएंगी और उन पर इस्लामिक कानून थोप दिए जाएंगे। हालांकि जब सत्ता संभालने के तुरंत बाद, ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने फरमान जारी किया कि सभी महिलाओं को – धर्म या राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना – हिजाब पहनना अनिवार्य होगा, तो इस फरमान का उस समय भी विरोध दिखा और 8 मार्च – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – को समाज के विभिन्न वर्गों से हजारों महिलाएं इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरीं। इस्लामिक क्रांति से पहले महिलाओं के लिए यह सब पाबंदियाँ नहीं थीं। वे स्वतंत्र थीं और वे तैराकी भी कर सकती थीं, परंतु इस कथित क्रांति के बाद उनके अधिकार सीमित हो गए और उनकी दुनिया सीमित हो गई थी।

शाह को सत्ता से हटाने के बाद जब खुमैनी ने अनिवार्य हिजाब का फरमान निकाला था तो महिलाएं यह कहते हुए सड़कों पर आई थीं, कि उन्होनें क्रांति इसलिए नहीं की थी कि वे पीछे हटें!

ईरान की महिलाओं ने ईरान के शाह की तानाशाही के खिलाफ जो क्रांति की थी, उस क्रांति के परिणामों को इस्लामिस्ट ताकतों ने चुरा लिया और उन्हें एक और अंधेरे कोने में धकेल दिया। जहां से बाहर आने का वे लगातार प्रयास कर रही हैं। और वे इस अनिवार्य हिजाब के विरोध में उस दिन से हैं जिस दिन से इसकी घोषणा की गई थी।

वर्ष 1979 में भी जब उन्होनें इस अनिवार्य हिजाब का विरोध किया था, तब उनका विरोध प्रदर्शन 6 दिनों तक लगातार चला था और उनपर चाकू, पत्थर, ईंटों और टूटे हुए कांच से वार किये गए थे। इस्लामिक क्रांति के बाद उन महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया था, जिन्होनें हिजाब पहहने से इनकार दिया था। नेशनल वेस्टर्न यूनियन की स्थापना वर्ष 1979 में की गई और इसने उन महिलाओं के समर्थन में कार्य किया, जिन्हें बुर्का पहनने से इनकार करने पर नौकरी से निकाल दिया गया था।

इस्लामिस्ट ताकतों के साथ महिलाओं के संघर्ष का इतिहास

यह कहा जा सकता है कि जिस दिन से ईरान में प्रगतिशील क्रांति को इस्लामिस्ट ताकतों ने हाइजैक किया, तभी से मुखर और प्रगतिशील महिलाओं का संघर्ष ईरान की इस्लामिस्ट ताकतों से चल रहा है। और महिलाओं की पीढ़ियाँ बदल रही हैं, परंतु संघर्ष वही है।

ईरानी सरकार के खिलाफ हुए इस आंदोलन में जिस प्रकार महिलाएं मुखर होकर सामने आईं, और उन्होनें खुले बालों के साथ फ़ोटो और वीडियो साझा किये, उससे ईरान की वह सरकार डर गई जो आई तो महिलाओं द्वारा की गई क्रांति के कारण थी, परंतु बाद में उन्हीं महिलाओं के अधिकारों और आजादी पर डाका डालकर बैठ गई।

परंतु अब नृशंसता की हर सीमा पार हो गई है और देखना होगा कि नृशंसता का यह दौर कब थमता है।

Topics: Iran Regime BrutalityWomen Oppression IranIran ProtestIslamic Republic IranIran Women RightsMandatory Hijab IranIranian Women ProtestAbdulllahi JournalistIran CrackdownHuman Rights Violation IranMahsa Amini Aftermath
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