भुवनेश्वर: केंद्रापड़ा ज़िले में कई दशकों से अवैध रूप से रह रहे तीन बांग्लादेशी नागरिकों को पिछले महीने केंद्र सरकार के निर्देश पर बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। यह कार्रवाई गृह मंत्रालय ( के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई। पुलिस के अनुसार, ये तीनों व्यक्ति केंद्रापड़ा शहर के बाहरी इलाके स्थित गरापुर गांव में बिना वैध नागरिकता दस्तावेजों के रह रहे थे। उनकी पहचान मुन्ताज़ खान (65), इंसान खान (59) और अमीना बीबी (70) के रूप में हुई है। बताया गया है कि वे पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से इस ज़िले में निवास कर रहे थे।
केंद्रापड़ा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ कटारिया ने बताया कि नागरिकता सत्यापन के दौरान वैध भारतीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने में विफल रहने पर तीनों को 18 नवंबर को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा, “तीनों गरापुर गांव में अवैध रूप से रह रहे थे। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद, केंद्र सरकार द्वारा 24 दिसंबर को गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत उन्हं बांग्लादेश निर्वासित किया गया।” पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तीनों के पास आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज़ पाए गए थे । विस्तृत जांच के बाद उनकी बांग्लादेशी नागरिकता की पुष्टि हुई, जिसके बाद निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की गई।
एसपी कटारिया ने कहा कि ज़िले में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान, हिरासत और निर्वासन राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है और यह एक सतत प्रक्रिया है । अधिकारियों ने बताया कि पूरे ज़िले में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए अभियान तेज़ कर दिया गया है। इस दौरान पहचान दस्तावेज़ों, आवासीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
ओडिशा में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रहा है। 9 जून को केंद्रापड़ा में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ज़िला प्रशासन और पुलिस को अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मार्च में मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया था कि राज्यभर में 3,738 बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान की गई है, जिनमें सबसे अधिक 1,649 केंद्रापड़ा में पाए गए। इसके बाद जगतसिंहपुर (1,112), मलकानगिरी (655), भद्रक (199), नबरंगपुर (106) और भुवनेश्वर (17) का स्थान रहा। 3 दिसंबर को विधानसभा में प्रस्तुत एक अन्य लिखित बयान में मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 51 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाया गया है, जिनमें से 49 को निर्वासित किया जा चुका है, जबकि दो जाली पासपोर्ट का उपयोग करने के आरोप में आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। प्रशासन ने दोहराया कि कानून के अनुपालन और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सत्यापन और निर्वासन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।

















