‘खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे’ ये कहावत अमेरिका पर पूरी तरह से लागू होती है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ट्रेड डील पर यूरोप की काफी आलोचना की है। यह बात उन्होंने बुधवार को CNBC को दिए इंटरव्यू में कही। बेसेंट ने डोनाल्ड ट्रंप की राह पर चलते हुए इस डील को अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया है।
डील की जानकारी
भारत और EU ने मंगलवार को अपनी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी कर ली। यह डील लगभग 20 साल पुरानी बातचीत के बाद हुई है। भारतीय अधिकारियों ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा है। यह भारत की 19वीं ट्रेड एग्रीमेंट है। इस समझौते से भारत के एक्सपोर्ट EU के 27 देशों में बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही कई घरेलू इंडस्ट्रीज में कॉम्पिटिशन भी बढ़ सकता है। यह सब तब हो रहा है जब ग्लोबल ट्रेड पर अमेरिकी हाई टैरिफ, सप्लाई चेन की दिक्कतें और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी टेंशन्स चल रही हैं।
बेसेंट ने क्या कहा
बेसेंट से जब पूछा गया कि क्या यह भारत-EU डील अमेरिकी हितों के लिए खतरा है, तो उन्होंने कहा कि हर देश को अपने लिए जो ठीक लगे वो करना चाहिए। लेकिन वे यूरोप से बहुत निराश हैं।
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उनके मुख्य पॉइंट्स ये हैं
- अमेरिका ने भारत पर रूसी ऑयल खरीदने के लिए 25% टैरिफ लगा दिए थे।
- लेकिन पिछले हफ्ते यूरोप ने भारत के साथ ट्रेड डील साइन कर ली।
- यूरोप यूक्रेन-रूस युद्ध की फ्रंटलाइन पर है।
- यूरोप ने खुद के खिलाफ युद्ध को फंड किया है, क्योंकि भारत रूसी ऑयल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है और फिर यूरोप वो रिफाइंड प्रोडक्ट्स खरीदता है।
- यूरोप अमेरिका के साथ टैरिफ बढ़ाने में शामिल नहीं हुआ, क्योंकि वे इस ट्रेड डील को फाइनल करना चाहते थे।
- हर बार जब कोई यूरोपियन यूक्रेन के लोगों की अहमियत की बात करता है, याद रखना कि उन्होंने ट्रेड को यूक्रेन के लोगों से ऊपर रखा।
- यूरोपियन ट्रेड ज्यादा अहम है, यूक्रेन युद्ध खत्म करने से ज्यादा।
क्यों गुस्सा हैं बेसेंट
बेसेंट का कहना है कि यूरोप ने ट्रेड को प्राथमिकता दी, जबकि वे खुद युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाकर रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन यूरोप ने अलग रास्ता चुना। इससे अमेरिका को लगता है कि यूरोप ने सिक्योरिटी और यूक्रेन सपोर्ट की बातों को नजरअंदाज कर व्यवसायिक फायदे को चुना।
















