शांति कुंज हरिद्वार : शताब्दी समारोह का भव्य समापन, शांतिकुंज पहुंची ज्योति कलश यात्रा
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शांति कुंज हरिद्वार : शताब्दी समारोह का भव्य समापन, शांतिकुंज पहुंची ज्योति कलश यात्रा

हरिद्वार शांतिकुंज में गायत्री परिवार का शताब्दी समारोह भव्य रूप से सम्पन्न, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने युग-परिवर्तन का संदेश दिया।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Jan 24, 2026, 06:06 pm IST
in उत्तराखंड

हरिद्वार । गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष, माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी तथा सिद्ध अखण्ड दीप के प्राकट्य के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह आज भव्यता एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हो गया। शताब्दी समारोह के प्रथम चरण में निकाली गई ज्योति कलश यात्रा अपनी मातृसंस्था शांतिकुंज पहुंची। उल्लेखनीय है कि यह ज्योति कलश यात्रा भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका सहित 20 से अधिक देशों में निकाली गई, जिससे गायत्री परिवार के संदेश को वैश्विक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाया गया।

मातृ समर्पण समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल श्री गुरमीत सिंह (सेनि) ने शताब्दी समारोह को युग-परिवर्तन का सशक्त संकेत बताते हुए कहा कि यह आयोजन नवयुग के शुभारंभ की घोषणा है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने मानवता को जो मूल संदेश दिया है, हम बदलेंगे तो युग बदलेगा। वही आज ब्रह्मांडीय आदेश के रूप में सामने आ रहा है। माननीय राज्यपाल ने शिवजी के त्रिशूल की उपमा देते हुए विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और विश्वगुरु भारत को उसके तीन स्वरूप बताया।

उन्होंने  51 दिवसीय (वसुधा वंदन समारोह से लेकर समापन तक) इस यात्रा को चेतना-जागरण और नवयुग-जागरण की यात्रा कहा तथा साधकों से आग्रह किया कि वे अपनी सोच, विचार और जीवन-दृष्टि को सर्वजन हिताय, बहुजन सुखाय के भाव से जोड़ने का संकल्प लेकर जाएँ। राज्यपाल ने ज्योति को युग-परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए साधकों और स्वयंसेवकों के समर्पण की सराहना की तथा गायत्री मंत्र को आत्मा और ब्रह्मांडीय चेतना के मिलन का दिव्य माध्यम बताया।

समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या जी ने इस अवसर को “सौभाग्य की त्रिवेणी” बताते हुए माननीय राज्यपाल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा समस्त गायत्री साधकों का आभार प्रकट किया। दलनायक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि आज आध्यात्मिकता को सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ से आँका जा रहा है, जबकि सच्ची साधना चमत्कार नहीं, परिष्कार का मार्ग है। गुरु अनेक मिल सकते हैं, पर पिता समान गुरु, वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाश के लिए आँखें खोलनी पड़ती हैं और जिसने भगवान को दिया है, वह कभी खाली हाथ नहीं रहता। अंत में उन्होंने जीवन में ग्रहणशीलता विकसित करने का आह्वान करते हुए साधना और सेवा को सार्थक बनाने का संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथि केन्द्रीय कैबीनेट मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जीवन के विभिन्न संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि युगऋषि पूज्य गरुदेव, वंदनीया माताजी तथा गायत्री माता की कृपा है कि मैं आगे बढ़ पाया हूं। जब मैं पूज्य गुरुदेव से मिला, उन्होंने तिलक किया, तब से मेरे जीवन की दिशा व दशा दोनों में काफी सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार संस्कृति की सरिता रूप है। संस्कारों का सागर है। अध्यात्म की आलोकित आभा है, जो संपूर्ण विश्व को मानवता का दिग्दर्शन करा रही है। उन्होंने कहा कि अखण्ड ज्योति बाहर से ज्यादा मनुष्य के अंदर को प्रकाशित करती है। यह बुद्धि को विवेक से जोड़ने का काम करती है। यह कर्म को धर्म को जोड़ने का काम करती है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आज चारो ओर अंधेरा दिखाई दे रहा है, ऐसे में प्रकाश दिखाने का कार्य सनातन संस्कृति और गायत्री परिवार कर रहा है। उन्होंने गायत्री परिवार द्वारा मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर अतिथियों को दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या द्वारा रुद्राक्ष माला, युगसाहित्य आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने प्रज्ञा अभियान (ओडिया), ज्योति कलश यात्रा (स्मारिका-गुजराती) रिनासा आदि का विमोचन किया। मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री दयाशंकर मिश्रा, श्री विनय रुहेला, जिला प्रशासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकार सुमित अवस्थी सहित हरिद्वार मीडिया के अनेक पत्रकारगण, देश विदेश से आये हजारों स्वयंसेवकों आदि उपस्थित रहें।

इससे पूर्व माननीय राज्यपाल  गुरमीत सिंह जी, केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बैरागी द्वीप स्थित युगऋषिद्वय की पावन समाधि पर पहुंचकर अपनी भावांजलि अर्पित की।

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