ट्रंप की महत्वाकांक्षाओं के कारण वह अपने यूरोपीय सहयोगियों के लिए ही सिरदर्द बन गए हैं। वह ग्रीनलैंड को हथियाना चाहते हैं। उनके इसी खतरे को देखते हुए ईयू लीडर्स ब्रुसेल्स में एक इमरजेंसी समिट की, जहां अमेरिका के साथ रिश्तों की नई हकीकत पर बात हुई। इस दौरान ईयू ने कहा कि ये ट्रंप की नीतियों से ट्रांस अटलांटिक संबंधों को बड़ा झटका लगा है।
मीटिंग में EU की फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कल्लास ने कहा कि ट्रांसअटलांटिक रिलेशंस को पिछले हफ्ते “बड़ा झटका” लगा है। उन्होंने बताया, “एक दिन एक तरीके से, दूसरे दिन सब बदल सकता है” – यानी अमेरिका की पॉलिसी में बहुत अनिश्चितता है। फिर भी, यूरोप 80 साल पुराने अच्छे रिश्तों को खत्म नहीं करना चाहता।
समिट में क्या-क्या चर्चा हुई
डेनमार्क की पीएम मेट्टे फ्रेडरिक्सन ने EU की एकजुटता की तारीफ की और कहा कि यूरोप अब खुद के लिए खड़ा होना जानता है। उन्होंने NATO के तहत ग्रीनलैंड के आसपास परमानेंट आर्कटिक प्रेजेंस की बात सपोर्ट की, लेकिन जोर दिया कि अमेरिका और डेनमार्क के बीच रिस्पेक्टफुल कोऑपरेशन होना चाहिए, धमकियां नहीं।
फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोप को बहुत सतर्क रहना होगा और भविष्य में किसी भी थ्रेट के खिलाफ उपलब्ध टूल्स इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहना चाहिए।जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रंप का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने ग्रीनलैंड पर ओरिजिनल प्लान से पीछे हटकर 1 फरवरी से एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं लगाए।
लिथुआनिया के प्रेसिडेंट गितानास नौसेदा ने अमेरिका को सबसे करीबी दोस्त बताया और याद दिलाया कि उनके यहां दो अमेरिकी बटालियन तैनात हैं। वहीं पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क ने EU से एकजुट रहने की अपील की ताकि ट्रांसअटलांटिक रिलेशंस बचें। उनका कहना था कि ट्रस्ट और रिस्पेक्ट पर रिश्ते चलें, डोमिनेशन या कोर्सियन पर नहीं। ग्रीनलैंड के पीएम जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने नूउक से स्टेटमेंट में साफ कहा कि उनकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं। अगर चुनना पड़े तो वो किंगडम ऑफ डेनमार्क, EU और NATO को चुनेंगे।
ट्रेड और टैरिफ
ट्रंप ने जिन टैरिफ की धमकी दी थी, वो वापस ले ली गई। EU-US ट्रेड डील (जो पिछले साल ट्रंप के टर्नबरी गोल्फ रिसॉर्ट में साइन हुई थी) की रैटिफिकेशन पिछले हफ्ते फ्रीज हो गई थी, लेकिन अब यूरोपियन पार्लियामेंट फिर से इस पर विचार करने को तैयार है। पार्लियामेंट प्रेसिडेंट रोबर्टा मेत्सोला और ट्रेड कमिटी हेड बर्न्ड लांगे ने कहा कि अगले हफ्ते इसकी डिस्कशन फिर शुरू होगी। लांगे ने X पर लिखा कि फॉल्स सिक्योरिटी नहीं होनी चाहिए, अगला थ्रेट आ सकता है, इसलिए क्लियर बॉउंड्रीज सेट करनी होंगी और लीगल इंस्ट्रूमेंट्स यूज करने होंगे।
EU ने अगर जरूरत पड़ी तो €93bn के अमेरिकी गुड्स पर ड्यूटी लगाने और एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट यूज करने की तैयारी की बात की थी, लेकिन अभी कोई नया एक्शन नहीं लिया गया।

















