ओडिशा में कामधेनु योजना के तहत 18 महीनों में 1.35 लाख लीटर अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन
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ओडिशा में कामधेनु योजना के तहत 18 महीनों में 1.35 लाख लीटर अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन

मुख्यमंत्री माझी ने कामधेनु योजना को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने पहले बजट में ही इस योजना की शुरुआत एक स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ की थी।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jan 22, 2026, 04:53 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: दुग्ध क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार द्वारा शुरु किये गये मुख्यमंत्री कामधेनु योजना ने उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। इस योजना के तहत मात्र डेढ़ वर्ष में राज्य में 1.35 लाख लीटर अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को यह जानकारी दी । उन्होंने यह जानकारी भुवनेश्वर के जनता मैदान में आयोजित तीन दिवसीय “मत्स्य-प्राणी समावेश, ओडिशा–2026” के उद्घाटन अवसर पर दे रहे थे। यह राज्य स्तरीय आयोजन ग्रामीण आय बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए मत्स्य पालन और पशुपालन को प्रमुख साधन के रूप में बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कामधेनु योजना को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने पहले बजट में ही इस योजना की शुरुआत एक स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ की थी—दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और राज्य में एक सतत एवं मजबूत डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना। उन्होंने बताया कि लगभग 1,400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से लागू की गई इस योजना के ठोस और सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

18 महीनों में 1.35 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कहा कि सिर्फ 18 महीनों में 1.35 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि इस योजना की सफलता को दर्शाती है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन को और बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”

दुग्ध उत्पादकों को सशक्त वित्तीय सहयोग
कामधेनु योजना के तहत किसानों को उच्च दुग्ध उत्पादन करने वाली शंकर नस्ल की गायों और भैंसों के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा लागत का 70 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक राज्य भर में 4.73 लाख लाभार्थियों को लगभग ₹262 करोड़ की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पशुधन और आधुनिक डेयरी पद्धतियों तक पहुंच मिली है।

इसके अतिरिक्त, ओडिशा राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (ओमफेड) द्वारा दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर ₹2 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस पहल से राज्य के 2.30 लाख से अधिक गो-पालक लाभान्वित हुए हैं, जिससे डेयरी मूल्य श्रृंखला और अधिक मजबूत हुई है तथा किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ सुनिश्चित हुआ है।

गो-तस्करी पर सख्त चेतावनी
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री माझी ने गो-तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “गो-माता की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। जो भी व्यक्ति गो-तस्करी में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

कृषि विविधीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में लगभग 92 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं और आने वाले समय में भूमि जोत और भी कम होने की संभावना है। ऐसे में किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन और पशुपालन को भी अपनाएं, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार द्वारा कई योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं।

किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि
ग्रामीण समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि समृद्ध किसान योजना, पीएम-किसान, सीएम-किसान और सुभद्रा योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से अब एक किसान परिवार की वार्षिक आय ₹61,000 से अधिक हो चुकी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

मत्स्य और पशुपालन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का लक्ष्य ओडिशा को मछली, मांस, अंडा और पोल्ट्री उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ओडिशा देश में मत्स्य उत्पादन में चौथे स्थान पर है और सरकार इसे प्रथम स्थान तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही बायोफ्लॉक तकनीक और केज कल्चर जैसी आधुनिक पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि उत्पादन क्षमता और स्थिरता दोनों में सुधार हो सके।

लाभ वितरण और सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना के लाभार्थियों को सहायता राशि प्रदान की। इस अवसर पर अनुगुल के दिलीप प्रधान को गोपाल रत्न पुरस्कार तथा जाजपुर के सुकांत कुमार बिस्वाल को नेटिव ब्रीड कंजरवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 12 किसानों को भी सम्मानित किया गया।

गोशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी सरकार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री सुरेश पुजारी ने कहा कि गो-संपदा की रक्षा और गो-माता के कल्याण के लिए राज्य में आवश्यकता अनुसार गोशालाओं का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए राजस्व विभाग द्वारा भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आज के किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन भी ओडिशा की विकसित हो रही कृषि प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 19 महीनों में आयोजित कैबिनेट बैठकों में मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास से संबंधित प्रस्तावों की संख्या सर्वाधिक रही है, जो इस क्षेत्र के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

डेयरी क्रांति को नई दिशा
मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री श्री गोकुलानंद मल्लिक ने कहा कि मुख्यमंत्री कामधेनु योजना ने ओडिशा में दुग्ध क्रांति को एक नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि किसानों को मत्स्य और पशुपालन के अवसरों के प्रति जागरूक करने के लिए राज्य के 314 ब्लॉकों और 30 जिलों में मेलों, प्रदर्शनियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर प्रत्यक्ष किसान सहायता तक, इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

इस कार्यक्रम में राज्य भर से बड़ी संख्या में मत्स्य पालक, पशुपालक, शोधकर्ता, कृषि वैज्ञानिक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जो ओडिशा के एकीकृत और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।

Topics: Mohan Charan Majhimilk production in OdishaChief Minister Kamdhenu Schememilk productionOdisha
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