बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथ लगातार बढ़ता जा रहा है। मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में न केवल हिन्दुओं पर हमले बढ़े हैं, बल्कि बांग्लादेश की भारत के खिलाफ चीन के साथ नजदीकियां बढ़ी हैं। इसी क्रम में सोमवार को बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने तीस्ता नदी के एक प्रोजेक्ट इलाके का दौरा किया। ये जगह रंगपुर जिले के तेफामाधुपुर तालुक शाहबाजपुर में है, जो भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक से काफी करीब है।
चिकन नेक क्या है?
दरअसल, चिकन नेक यानि सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। ये महज 22 किलोमीटर चौड़ी पतली पट्टी, जो भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के सात-आठ राज्यों से जोड़ती है। चारों तरफ नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन हैं, इसलिए यहां कोई भी गड़बड़ भारत के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।
दौरे का मकसद क्या था?
ये दौरा कथित तौर पर तीस्ता रीवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट के तहत टेक्निकल असेसमेंट के लिए हुआ। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (जिसके चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस हैं) ने साफ कहा कि राजदूत सिर्फ प्रोजेक्ट का जायजा लेने गए थे। उनके साथ पानी के मामलों की सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी थीं।
रिजवाना हसन ने बताया कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (TMP) को जल्द से जल्द शुरू करना चाहता है। दोनों देश इसके लिए तैयार हैं, लेकिन अभी स्क्रूटनी पूरी नहीं हुई है, इसलिए काम शुरू नहीं हो सका। तीस्ता नदी उत्तरी बांग्लादेश के किसानों और लोगों की जीवनरेखा है, और उतनी ही महत्वपूर्ण पश्चिम बंगाल के लिए भी। कई दशकों से दोनों देश तीस्ता का पानी बांटने की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई फाइनल समझौता नहीं हुआ। वजह? पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियां। इसलिए ये मुद्दा अटका पड़ा है।
दौरे से पहले की बातचीत
रविवार को याओ वेन ने बांग्लादेश के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर खलीलुर रहमान से मुलाकात की। उसके बाद यूनुस के प्रेस विंग ने एक्स पर पोस्ट किया कि दोनों पक्षों ने आपसी हितों पर बात की। चीन ने तीस्ता प्रोजेक्ट और बांग्लादेश-चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल पर भी चर्चा की। राजदूत ने कहा कि वो तीस्ता इलाके जाएंगे और टेक्निकल असेसमेंट जल्द पूरा करेंगे। साथ ही चीन बांग्लादेश की डेमोक्रेटिक ट्रांजिशन और आने वाले चुनावों का समर्थन करता है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले साल यूनुस ने चीन में एक इंटरव्यू में कहा था कि बांग्लादेश इस इलाके में समुद्र का “एकमात्र गार्जियन” है और भारत के पूर्वोत्तर को “लैंडलॉक्ड” बताया था। साथ ही उन्होंने चीन की इकोनॉमी को बांग्लादेश तक बढ़ाने की बात कही थी। इन बातों से दिसंबर में ढाका और दूसरे शहरों में भारत विरोधी प्रदर्शन हुए, जिसमें भारतीय दूतावास और दफ्तरों को निशाना बनाया गया। अभी दोनों देशों के रिश्ते में खटास है, और इस दौरा को भारत की नजर में काफी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि ये चिकन नेक के ठीक पास हुआ।
















