Explainer: इंफ्रास्ट्रक्चर जाल या फिर भारत को घेरने की चीनी चाल?
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Explainer: इंफ्रास्ट्रक्चर जाल या फिर भारत को घेरने की चीनी चाल?

चीन ने बांग्लादेश और म्यांमार के साथ आर्थिक गलियारा बनाने की घोषणा कर दी है। कुनमिंग से मोंगला बंदरगाह तक मल्टीमॉडल लिंक परियोजना भारत के पूर्वी इलाके में CPEC जैसी रणनीति है। शेख हसीना के बाद बांग्लादेश के साथ बढ़ते चीन संबंध और भारत की सामरिक चिंताओं पर विस्तार से जानें।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 3, 2026, 08:11 am IST
inविश्व
शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति

शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति

चीन ने कहा है कि वह बांग्लादेश और म्यांमार के साथ एक आर्थिक गलियारा बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह परियोजना भारत के पूर्वी हिस्से में है, ठीक वैसे ही जैसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) उसके पश्चिमी हिस्से में काम करता है। चीन के राजदूत याओ वेन ने ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी।

यह मुद्दा हाल ही में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान चर्चा में आया था। चीन का कहना है कि वह इस ट्रांसनेशनल परियोजना में दूसरे देशों को भी शामिल होने के लिए खुला रखता है। लेकिन फैसला उन देशों पर ही छोड़ा गया है कि वे इसमें शामिल होना चाहते हैं या नहीं।

कनेक्टिविटी बढ़ाने का दावा

इस गलियारे को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसका मकसद मुख्य रूप से कनेक्टिविटी बढ़ाना है। खासतौर पर चीन के कुनमिंग से बांग्लादेश के बंदरगाहों तक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट लिंक बनाना। इनमें मोंगला बंदरगाह शामिल है। बांग्लादेश ने पहले भारत के साथ एक डील रद्द की थी और अब मोंगला में आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का ठेका चीन को दे दिया है।

2+2 डायलॉग की बात

चीन और बांग्लादेश के बीच कूटनीति और रक्षा पर ‘2+2’ डायलॉग मैकेनिज्म शुरू करने की भी सहमति बनी है। राजदूत याओ वेन ने इसे भी बताया। साथ ही कहा कि ऐसा गलियारा बनाने का आइडिया नया नहीं है। 1999 में बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) आर्थिक गलियारे की चर्चा हुई थी, जिसमें सड़क, रेल, पानी और हवाई रास्ते से चारों देशों को जोड़ने की बात थी। लेकिन उसमें कोई प्रगति नहीं हुई। अब चीन-बांग्लादेश सहयोग को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पिता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में नहीं होंगे शामिल

शेख हसीना के बाद चीन के करीब आया बांग्लादेश

2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद चीन और बांग्लादेश के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देश कई महत्वपूर्ण कामों पर साथ दे रहे हैं। इनमें टीस्‍ता नदी बहाली परियोजना, लालमोनिरहाट एयरबेस विकसित करने में चीनी मदद की खबरें, ढाका में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्लांट बनाने का सौदा शामिल हैं। मोंगला बंदरगाह का ठेका भी नई दिल्ली का ध्यान खींच रहा है।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गलियारा बन गया तो चीन को बंगाल की खाड़ी तक पहुंच मिल जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे CPEC से अरब सागर तक पहुंच मिली है। चीन की इन चालों पर नजर डालें तो पता चलता है कि तो चीन अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के बहाने भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिशों में लगा हुआ है। दक्षिण में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पास स्थित कोको आईलैंड को म्यांमार पहले ही चीन को दे चुका है, जहां उसने अपने सैन्य बेस बना रखे हैं। पश्चिम में POJK में उसने CPEC कॉरडोर बना रखा है। अब पूर्व में चीन वही रणनीति बांग्लादेश और म्यांमार के साथ मिलकर रच रहा है।

Topics: CPEC पूर्वी हिस्सामोंगला बंदरगाह चीनभारत चीन घेराबंदीबांग्लादेश चीन संबंधचीन बांग्लादेश आर्थिक गलियारा
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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