दिल्ली साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय निवेश धोखाधड़ी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह लोगों को फर्जी निवेश स्कीम दिखाकर करोड़ों रुपये ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में कई छापेमारी कीं और काफी सबूत जुटाए।
गिरोह कैसे काम करता था
यह सिंडिकेट दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे कई शहरों में फैला हुआ था। मुख्य आरोपी और उनके साथी अलग-अलग फर्जी कंपनी के नाम से काम करते थे। इन कंपनियों के नाम थे – जैसे कि कुछ नामों में 43.50 करोड़, 61.50 करोड़, 38.50 करोड़, 30.50 करोड़, 23.50 करोड़ जैसी रकम जुड़ी हुई दिखाई गई। कुल मिलाकर ठगी की रकम करीब 15.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। गिरोह ने 80 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में लोगों को ठगा।
वे फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप बनाते थे। इनमें बहुत ज्यादा रिटर्न का वादा करके लोगों को लालच देते थे। लोग पैसे निवेश करते, लेकिन बाद में न तो रिटर्न मिलता और न ही मूलधन वापस। संपर्क सोशल मीडिया या फोन कॉल से शुरू होता था। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के लोगों को खास तौर पर टारगेट किया जाता था। जांच में पता चला कि गिरोह ने 63 फर्जी बैंक खाते इस्तेमाल किए, जिनमें से 51 अभी भी सक्रिय थे। पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके ट्रेस मुश्किल बनाया जाता था। कई बार क्रिप्टो या दूसरे तरीकों से पैसा बाहर भेजा जाता था।
पुलिस की छापेमारी
5 जनवरी 2025 को पुलिस ने 58 जगहों पर एक साथ छापे मारे। इन छापों में 42.50 करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति जब्त की गई। जब्त सामान में लैपटॉप, मोबाइल फोन, डॉक्यूमेंट्स, बैंक स्टेटमेंट और चैट रिकॉर्ड शामिल थे। फर्जी निवेश के डिटेल्स, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और आरोपी के बीच की बातचीत के सबूत मिले। पुलिस ने 10 से 13 फर्जी आईडी का भी इस्तेमाल पाया। डेटा रिकवर करने के लिए खास टूल्स जैसे 2G/4G और अन्य का सहारा लिया गया।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार
मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस ने बैंक खातों, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की। कई फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे का लेन-देन ट्रेस किया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने लोगों को ग्रुप में जोड़कर और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दिखाकर ठगा।

















