सनातन धर्म में हर महीने आने वाली शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व होता है। यह दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा, जप और व्रत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। जब यही एकादशी माघ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है, तो इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। पूरे साल की एकादशियों में इस एकादशी का महत्व सबसे अधिक माना गया है।
षटतिला एकादशी 2026 की तिथि- एकादशी तिथि शुरू: 13 जनवरी 2026, दोपहर 03:17 बजे। एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2026, शाम 05:52 बजे। व्रत पारण: 15 जनवरी 2026, गुरुवार। पारण का समय: सुबह 07:15 से 09:21 बजे तक।
षटतिला एकादशी की पूजा कैसे करें- इस व्रत को करने के लिए सबसे पहले शरीर और मन को शुद्ध करें। स्नान के बाद एक साफ जगह पर चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान श्री विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, केसर, पीले फल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाएं। एकादशी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में भगवान विष्णु की आरती जरूर करें। पूरे दिन व्रत को नियम और संयम से रखें और अगले दिन शुभ समय में पारण करें।
षटतिला एकादशी का महत्व- मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस व्रत को सच्चे मन से करने पर पाप और दोष दूर होते हैं, अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु को तिल से बने भोग अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही तिल और गुड़ का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
षटतिला एकादशी पर क्या करना चाहिए- स्नान से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश करें या तिल का उबटन लगाएं। यदि संभव हो तो गंगा स्नान करें। घर पर स्नान करते समय पानी में तिल, थोड़ी हल्दी और गंगाजल मिलाएं। पूजा में तिल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। हवन करते समय हवन सामग्री में तिल अवश्य डालें। षटतिला एकादशी का व्रत भक्ति, दान और शुद्ध आचरण का पर्व है। इस दिन तिल से जुड़े कार्य करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

















