जैसे ही लव जिहाद शब्द का प्रयोग किया जाता है, वैसे ही इसे मुस्लिम विरोधी मान लिया जाता है और यह कहा जाता है कि इसे हिन्दू लोगों ने गढ़ा है और इसके माध्यम से मुस्लिम विरोधी विमर्श चलाया जा रहा है। मगर जैसे जैसे ब्रिटेन में चल रहे ग्रूमिंग गैंग्स की असलियत सामने आ रही है, वैसे-वैसे यह भी साफ होता जा रहा है, कि भारत में भी लव जिहाद के मामले दरअसल सच्चाई ही हैं। भारत में भी इस शब्द को हिंदुओं ने नहीं, बल्कि सबसे पहले ईसाई समुदाय के लोगों ने प्रयोग किया था और धीरे धीरे हिंदुओं और सिखों ने अपनी बेटियों को लेकर यह कहा कि उनके समुदाय की बेटियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने महिला अपराध पर उठाई आवाज
अब लद्दाख में भी बौद्ध लड़कियों को लेकर ऐसी ही चिंता व्यक्त की गई है। जनस्कर बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने लद्दाख में बौद्ध लड़कियों के साथ हो रहे संगठित अपराधों के प्रति अपनी आवाज उठाई है। इस एसोसिएशन ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सरकार से अनुरोध किया है कि वह कठोर मतांतरण विरोधी कानून बनाए। 15 जनवरी 2026 को इस एसोसिएशन ने यह पत्र जारी किया है और इस पत्र में जनस्कर से एक युवा बौद्ध लड़की की घटना बताई गई है, जो कई दिनों से गुमशुदा है। अब इस संस्था के अनुसार उस लड़की के घरवालों ने एसोसिएशन को यह बताया कि उन्होनें उस लड़की के हर दोस्त के घर पूछताछ की, मगर उसका कोई पता नहीं चला और उसके बाद उन्हें संदेह है कि उस लड़की का अपहरण कर लिया गया है।
एक्स पर इस पत्र को कई लोगों ने पोस्ट किया है। यदि इस पत्र की बात मानी जाए तो यह समझा जा सकता है कि स्थितियाँ वहाँ पर भयावह हो चुकी हैं। इस पत्र में एसोसिएशन ने लिखा है कि वे अधिकारियों का ध्यान उन घटनाओं की ओर दिलाना चाहते हैं, जिनमें उस क्षेत्र की बौद्ध लड़कियों को बरगलाकर शादी के बहाने धर्म परिवर्तन किया जा रहा है और इस बात पर विश्वास करने के कई कारण हैं, कि ये शादियाँ केवल बौद्ध लड़कियों के धार्मिक विश्वास को परिवर्तित करने के लिए ही की जा रही हैं और इसके पीछे उनकी मर्जी नहीं है, बल्कि वे धोखे और छल का शिकार हो रही हैं।
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Now it is the Ladakh Buddhist Association which brings up grooming and conversion of their girls stating that these incidents have a “consistent and pre-planned pattern”. They clearly call it “love-jihad” and demand anti-love jihad & anti conversion law in the Union Territory of… pic.twitter.com/JZqNgYVHEn
— Manu Khajuria (@KhajuriaManu) January 15, 2026
लड़कियों को फंसाकर कराया जा रहा कन्वर्जन
इस पत्र में संगठन ने पद्धतियों की भी बात की है कि कैसे लोग कुछ तरीका ऐसी लड़कियों को फँसाने के लिए प्रयोग करते हैं। और ये केवल एक दो या छिटपुट घटनाएं ही नहीं हैं, बल्कि ये एक बड़े षड्यन्त्र का हिस्सा हैं। इस पत्र मे एक और महत्वपूर्ण बात लिखी है। यह बात अंतरधार्मिक विवाहों को लेकर है। इसमें लिखा है कि भारत सरकार ने वर्ष 1954 में अंतरधार्मिक विवाह के लिए एक कानून बनाया था और वह था स्पेशल मेरिज एक्ट। मगर यह कानून केवल तभी लागू हो सकता है, जब ये शादियाँ आम सहमति, और बिना किसी धार्मिक दबाव के हों और ये तभी सफल हो सकता है, जब इन्हें किसी भी पक्ष के धर्मपरिवर्तन के बिना लागू किया जाए। यह लगातार देखा गया है कि कानूनी रास्ते का पालन करने के स्थान पर, लड़की को जैसे-तैसे केवल और केवल मतांतरित करा लिया जाता है और यह एकतरफा मतांतरण इस स्वैच्छिक बात पर संदेह उत्पन्न करता है।
मुस्लिम नेताओं से मुसलमानों के कुकृत्य को रोकने की मांग
उन्होंने मुस्लिम नेताओं और नेतृत्व से भी अनुरोध किया कि वे मुस्लिमों के इस कुकृत्य को तत्काल ही रोकें। और साथ ही उन्होने मुस्लिम नेताओं को पूर्व में घटित हो चुकी घटनाओं का हवाला देते हुए चेतावनी भी दी कि यह नहीं भूलना चाहिए कि कैसे पहले भी लव जिहाद का प्रयास करने पर किस प्रकार से घाटी में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो रहा था। और जिस प्रकार से युवा बौद्ध लड़कियों को शादी के बहाने लगातार धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया जा रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है और आने वाले दिनों में सांप्रदायिक तनाव को जन्म दे सकता है।
अपहरण की शिकार लड़िकियों के सुरक्षित वापसी की मांग
एसोसिएशन ने उस अपहरण का शिकार हुई लड़की की सुरक्षित वापसी की भी मांग की। और साथ ही अधिकारियों और सरकार से यह भी मांग की कि वे मतांतरण विरोधी कठोर कानून बनाएं और साथ ही आरोपियों पर एफआईआर भी दर्ज करें। कौन सा समुदाय चाहेगा कि उसकी लड़कियां समुदाय से बाहर जाकर ऐसे समुदाय का हिस्सा बन जाएं, जो उसकी संस्कृति से एकदम अलग है। परंतु दुर्भाग्य की बात यही है कि जब भी किसी समुदाय द्वारा यह मांग की जाती है तो उसे पिछड़ा या फिर मुस्लिम विरोधी कह दिया जाता है, उस पर प्रेम का दुश्मन होने का तमगा लगा दिया जाता है मगर लड़कियों की सुरक्षा पर बात नहीं होती है और जब बात नहीं होती है तो कदम भी नहीं उठाए जाते हैं।
सच कहा जाए तो समस्या को ही नहीं पहचाना जाता है या कहें समस्या को ही नाम देने से बचा जाता है। देखना होगा कि लद्दाख की लड़कियों को बचाने के लिए क्या कोई नियम आदि बनता है?

















