कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का नाटक लगातार जारी है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए फुटबाल खेली जा रही है। खुले तौर पर दोनों ही नेता आपसी तनाव की खबरों को मीडिया की अफवाह बताकर खारिज करने की कोशिशों में लगे हैं। लेकिन अब सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मिलने की गुहार लगाई है, ताकि वो “लगातार हो रही कथित कन्फ्यूजन” को दूर कर सकें।
क्या है विवाद?
कांग्रेस ने 2023 में कर्नाटक में सरकार बनाई थी। 20 मई 2023 को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब से ही कुछ लोगों में यह बात चलती रही कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कोई आंतरिक समझौता हुआ था, जिसमें सीएम का पद 2.5-2.5 साल बांटा जाएगा। मतलब नवंबर 2025 के आसपास (सरकार के आधे कार्यकाल के बाद) नेतृत्व बदला जा सकता था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस वजह से शिवकुमार के कुछ समर्थक विधायक दिल्ली पहुंचे और अपनी बात रखी। पार्टी ने बार-बार साफ कहा है कि ऐसा कोई पावर-शेयरिंग का समझौता नहीं था और सिद्धारमैया पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।
दोनों नेताओं का रुख
सिद्धारमैया ने कई बार कहा है कि उन्हें पार्टी लीडरशिप का पूरा भरोसा है। वे कहते हैं कि वे अपना पूरा टर्म पूरा करेंगे और कोई रोटेशन वाली बात नहीं है। उन्होंने मीडिया से कहा कि विधायक इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे, बल्कि मीडिया ही इसकी बात कर रहा है। वे कैबिनेट विस्तार की भी बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार भी खुले में तो बार-बार यही कहते हैं कि उनके और सिद्धारमैया के बीच कोई मतभेद नहीं है। वे दोनों भाइयों की तरह काम कर रहे हैं। शिवकुमार ने कहा, “मेरे खून में गुटबाजी नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान जब सही समय पर फैसला लेगा, तो दोनों उसका पालन करेंगे। कैबिनेट में बदलाव की अफवाहों पर उन्होंने कहा कि विधायकों का पदों के लिए लॉबिंग करना स्वाभाविक है।
हाईकमान की भूमिका
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पिछले महीने (दिसंबर 2025) कहा था कि हाईकमान की तरफ से कोई कन्फ्यूजन नहीं है। उन्होंने राज्य के नेताओं से कहा कि अपनी आंतरिक बातें आपस में सुलझाएं। खड़गे ने यह भी चेतावनी दी कि कोई भी नेता चुनावी जीत का व्यक्तिगत क्रेडिट न ले, क्योंकि संगठन दशकों से कार्यकर्ताओं ने मिलकर बनाया है। राहुल गांधी से सिद्धारमैया की मीटिंग की मांग इसी कन्फ्यूजन को खत्म करने के लिए है।
ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि बीते दिनों डीके शिव कुमार और उनके खेमे के विधायक दिल्ली में क्यों मौजूद थे? क्यों खड़गे राज्य के आंतरिक मसलों को राज्य में सुलझाने की बात कर रहे हैं?












