भारत में लांच हुआ बच्चों की सुरक्षा के लिए दुनिया का पहला AI आधारित टूल ‘रक्षा’
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भारत में लांच हुआ बच्चों की सुरक्षा के लिए दुनिया का पहला AI आधारित टूल ‘रक्षा’

भारत ने बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और ऑनलाइन यौन शोषण रोकने के लिए AI आधारित पहला टूल ‘रक्षा’ लॉन्च किया।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Jan 13, 2026, 07:20 pm IST
in भारत, दिल्ली

भारत ने बच्चों को निशाना बनाकर किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में स्वयं को अग्रिम पंक्ति में स्थापित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रौद्योगिकी सक्षम टूल ‘रक्षा’ पेश किया है जिसे बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार किया गया है।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लॉन्च

एआई आधारित इस टूल को 16 से 20 फ़रवरी 2026 के बीच आयोजित होने वाले भारत सरकार के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लांच किया गया है। बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित इस क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल ‘रक्षा’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ‘प्रॉस्पेरिटी फ़्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में लांच किया।

सरकारी प्री-समिट कार्यक्रम में हुआ आयोजन

यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया।

451 जिलों में सक्रिय जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क

बच्चों की सुरक्षा के लिए इस टूल ‘रक्षा’ को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया है जिसके 250 से अधिक सहयोगी नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम, पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया को सशक्त बनाने के लिए देश के 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहा है।

डेटा और एआई से बच्चों के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान

‘रक्षा’ देशभर के बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करता है और उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का डिजिटल संबोधन

बाल सुरक्षा पर अपनी तरह के पहले सम्मेलन को डिजिटली संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, “प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों व लोगों की सुरक्षा में निहित है। बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं…”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं का उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आगे कहा कि ‘रक्षा’ टूल बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के मूल्यों को समाहित करने के साथ और एक सुदृढ़ बाल संरक्षण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु का वक्तव्य

इस बात को रेखांकित करते हुए कि ‘रक्षा’ किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है…”

एआई से अपराध रोकथाम पर सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु की बात

बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब कोई भविष्य का वादा नहीं रही, बल्कि मौजूदा समय की सच्चाई बन चुकी है…”

‘रक्षा’ के तीन लक्ष्य केंद्रित टूल

‘रक्षा’ को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर रोकथाम और जांच एजेंसियों- दोनों को सुदृढ़ करे। इसके लिए यह तीन लक्ष्य केंद्रित टूल का उपयोग करता है।

बाल विवाह, ट्रैफिकिंग और डिजिटल शोषण पर फोकस

पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है। तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है।

चार सत्रों में विभाजित रहा शिखर सम्मेलन

यह शिखर सम्मेलन चार पूर्ण सत्रों में विभाजित था, जिनमें ‘सामाजिक परिवर्तन में एआई की भूमिका’, ‘रक्षा: बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल स्पेस की रूपरेखा’, ‘टेक फॉर गुड’ तथा ‘एआई, जागरूकता और कार्रवाई: भविष्य के लिए संप्रेषण और विमर्श’ शामिल थे।

देश-विदेश के विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी

दिन-भर चले इस शिखर सम्मेलन में दया शंकर, प्रियंका ऋभु, मैथिल्द सेरियोली, नोमिशा कुरियन, जी. के. गोस्वामी, हर्षवर्धन, धनंजय टिंगल, अनिल रघुवंशी, बैली सैपल, अनुप्रिया मोहता, डॉ. ई. खलियाराज, मयंक, संपूर्णा बेहुरा, गौरव मित्तल और अतुल अग्रवाल सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद थे।

2025 में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की उपलब्धियां

नीति आयोग के साथ साझेदारी में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अकेले 2025 में आर्थिक रूप से संवेदनशील 20 लाख से ज्यादा परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा, 198,628 बाल विवाह रोके और 55,146 बच्चों को मुक्त कराया।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और आरपीएफ सहयोग

जेआरसी की याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री देखने, डाउनलोड करने व साझा करने को अपराध घोषित किया। नेटवर्क ने सी-सीम के 73,258 मामलों में कार्रवाई शुरू की और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के साथ मिलकर बच्चों की ट्रैफिकिंग रोकने का कार्य किया।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन

भारत सरकार 16 से 20 फरवरी तक इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन कर रही है जो ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला आयोजन है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेता, सीईओ और नीति निर्माता कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करेंगे।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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