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होम भारत

AI से बदलेगा महासागरों का भविष्य! इंडिया AI समिट में दिखी भविष्य की तैयारी

नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि एआई समुद्री शासन, आपदा प्रबंधन और नीली अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। IMD और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने साझा किया भविष्य का विजन।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Feb 19, 2026, 05:07 pm IST
in भारत, विज्ञान और तकनीक, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने यहां के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में समुद्री भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण चर्चा का नेतृत्व किया।

हमारे भविष्य के महासागरों के लिए एआई

“हमारे भविष्य के महासागरों के लिए एआई: डेटा, मॉडल और शासन” विषयक इस उच्चस्तरीय चर्चा सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत के समुद्री शासन और नीली अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि एआई का उपयोग केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इनमें समुद्री शासन और आपदा प्रबंधन, नीली अर्थव्यवस्था, डेटा-आधारित निर्णय शामिल है।

आईएमडी महानिदेशक का बयान और डेटा-संचालित एआई पर जोर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक डॉ. एम. मोहपात्रा ने कहा कि महासागर अवलोकन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में भारत की क्षमताएं अब वैश्विक स्तर की हैं। उन्होंने कहा, “तकनीकी प्रगति और एआई-सक्षम मॉडलों के कारण हमने चरम मौसम की घटनाओं के दौरान होने वाली जानमाल की हानि को न्यूनतम करने में सफलता पाई है। अब हमें महासागरों के गर्म होने और समुद्र के स्तर में वृद्धि जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ‘डेटा-संचालित एआई’ को अपनाना होगा।”

डॉ मोहपात्रा ने ‘डीप ओशन मिशन’ को भारत की एक प्रमुख पहल बताया, जो गहरे समुद्र की खोज और अपतटीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए द्वार खोल रही है।

भारत-नॉर्वे सहयोग और वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने इस सत्र में भारत और नॉर्वे के बीच बढ़ते सहयोग पर कहा कि खुले और विश्वसनीय एआई मॉडल के जरिए मत्स्य पालन, जहाजरानी और बंदरगाह संचालन की दक्षता में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है। साझा मानकों और जिम्मेदार शासन के आधार पर विकसित यह ‘वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा’ न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए नीली अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोलेगा।

समुद्री कार्यक्रमों में एआई का संरचित एकीकरण

मंत्रालय के सलाहकार डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य के सभी समुद्री कार्यक्रमों में एआई को एक संरचित तरीके से एकीकृत किया जाएगा।

डेटा-दुर्लभ महासागर और फिजिक्स-बेस्ड एआई की आवश्यकता

सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने माना कि महासागर एक डेटा-दुर्लभ क्षेत्र है। इसके समाधान के लिए ‘फिजिक्स-बेस्ड एआई’ के विकास की आवश्यकता है। चर्चा का निष्कर्ष यह रहा कि यदि सहायक नीतियों, मिश्रित वित्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिला दिया जाए तो नीली अर्थव्यवस्था भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए रोजगार का सबसे बड़ा इंजन बन सकती है।

Topics: Deep Ocean MissionAI for disaster management IndiaBharat Mandapam summit newsBlue Economy IndiaIndia AI Impact Summit 2026AI in ocean governanceIMD AI weather model
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