देश भर में ‘लोकतंत्र बचाओ – अभिव्यक्ति की स्वतंत्र’ जैसे भारी भरकम शब्दों का ढिंढोरा पीटने वाले इंडी गठजोड़ के मंचों की शोभा बढ़ाने वाली आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार को पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय की फटकार पड़ी है, फिटकारे जाने का कारण है कि आप सरकार ने पत्रकारों पर इसलिए एफआईआर दर्ज करवा दी क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दुरुपयोग की पोस्टें सोशल मीडिया पर डाली थी। अब इस पर कार्रवाई पर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने एफआईआर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश भी दिया।
याचिकाकर्ता मणिक गोयल और अन्य ने दलील दी कि सीएम की गैर-मौजूदगी में हेलीकॉप्टर के उपयोग से जुड़ी पोस्ट पत्रकारिता के दायरे और जनहित में थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को इतना संवेदनशील नहीं होना चाहिए कि कोई सवाल ही न उठा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यहां पुलिस राज नहीं है। लोग सरकार से सवाल पूछने का अधिकार रखते हैं। किसी की आवाज दबाने की कोशिश न करें। कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि लोगों की आलोचना को दबाने का प्रयास न किया जाए और जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लोग स्वयं जान सकते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। कोर्ट ने मामले में एफआईआर पर आगे की जांच पर तत्काल रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि यह राजनीतिक बहस का मामला नहीं है बल्कि जनता के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा है। इस आदेश से पत्रकारों की स्वतंत्रता और सामाजिक संवाद का अधिकार सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

















