रांची, (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले सोमवार को रांची पहुंचे। हरमू स्थित एक बैंक्वेट हॉल में सामाजिक सद्भाव को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। इसमें समाज के विभिन्न संगठन, विभिन्न जाति और समुदाय के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर चर्चा करना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था। श्री होसबाले ने मतांतरण के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की।
मतांतरण पर जताई चिंता
सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने समाज के प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए प्रश्न और विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। मतांतरण पर उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इसमें झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र और दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना राज्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिश के तौर पर चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया और हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। होसबाले ने गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को मतांतरण का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित 3-डी समस्या का उल्लेख किया, जिसमें धर्मांतरण, डीजे संस्कृति और शराब शामिल है।

भेदभाव को करें समाप्त
कन्वर्जन की समस्या को कम करने के उपायों पर समाज में परस्पर सहयोग की अपील की। छुआछूत और जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने और हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।
जातिवाद न करें
सरकार्यवाह ने जातिगत समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं। किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए।
पुरुष-महिला समानता मौजूदा समय की आवश्यकता
उन्होंने महिलाओं-बहनों के सम्मान पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब पुरुष और महिलाएं साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है।
सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव पर जताई चिंता
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति मिलती है। उन्होंने विभिन्न पर्वों पर बनाए जाने वाले पंडालों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मनोरंजन की प्रवृत्ति से जोड़कर देखने की जरूरत बताई।
स्वामी विवेकानंद को किया याद
सरकार्यवाह ने स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए ने भारतीय युवाओं से उनके कथन, थिंक लिटिल लेस, एक्टल लिटिल मोर को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदू समाज के करने योग्य कार्यों के रूप में जोर देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबी, अशिक्षा और अभावग्रस्त लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही।
पारसी समुदाय का उदाहरण दिया
उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की बात कही और बताया कि आज़ादी के समय पारसी समाज ने सरकार से किसी प्रकार के आरक्षण की मांग नहीं की थी। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की ओर से गोद लेने का आग्रह किया और समाज के विभिन्न समूहों से ऐसे बच्चों की सहायता करने की अपील की।
बांग्लादेशी घुसपैठ पर जताई चिंता
बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा पर फेंसिंग एक बड़ी चुनौती है और कई बार हमारे ही लोग घुसपैठियों को शरण देते हैं। सरकार एसआईआर सहित विभिन्न माध्यमों से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रही है।

















