भारत अब अंतरिक्ष में सैटेलाइट को ऑर्बिट में ही रिफ्यूल करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने वाला है। बेंगलुरु की स्पेस स्टार्टअप OrbitAID Aerospace ने अपना 25 किलोग्राम का छोटा सैटेलाइट AayulSAT तैयार किया है, जो इस तकनीक को टेस्ट करेगा। यह सैटेलाइट ISRO के PSLV-C62 रॉकेट से 12 जनवरी 2026 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने वाला है। यह ISRO का साल का पहला लॉन्च है और PSLV का 64वां उड़ान।
यह मिशन क्या करेगा?
AayulSAT असल में एक ही सैटेलाइट के अंदर माइक्रोग्रैविटी में फ्यूल ट्रांसफर की प्रक्रिया को टेस्ट करेगा। मतलब दो अलग-अलग सैटेलाइट्स के बीच अभी रिफ्यूलिंग नहीं होगी, बल्कि एक ही सैटेलाइट के अंदर प्रोपेलेंट (ईंधन) को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में ट्रांसफर करके देखा जाएगा। यह जांचेगा कि अंतरिक्ष की बिना गुरुत्वाकर्षण वाली स्थिति में फ्लूइड (तरल पदार्थ) कैसे बर्ताव करता है। लॉन्च के करीब 4 घंटे के अंदर पहला रिफ्यूलिंग टेस्ट पूरा होने की उम्मीद है।
इसके बाद कंपनी कई रिफ्यूलिंग साइकिल टेस्ट करेगी। मिशन पूरा होने पर 8 से 10 महीने में एक दूसरा ‘चेजर’ सैटेलाइट लॉन्च करने का प्लान है, जो AayulSAT से मिलेगा, डॉक करेगा और फिर भविष्य में फुल ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग सर्विस दिखाएगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अगर सैटेलाइट का ईंधन खत्म हो जाए तो उसकी उम्र बहुत कम हो जाती है। ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग से सैटेलाइट की लाइफ बढ़ाई जा सकती है, बिना नया सैटेलाइट छोड़ने की जरूरत पड़े। यह भविष्य में सैटेलाइट सर्विसिंग, स्पेस डिपो और रोबोटिक आर्म जैसी चीजों का आधार बनेगा।
दुनिया में स्थिति क्या है?
अभी तक सिर्फ चीन ने पिछले साल ऑन-ऑर्बिट सैटेलाइट रिफ्यूलिंग का डेमो किया था, लेकिन इसके बारे में ज्यादा डिटेल्स पब्लिक नहीं हैं। अमेरिका की कंपनी एस्ट्रोस्केल इस पर काम कर रही है, पर अभी लॉन्च नहीं हुआ। यानी चीन के बाद भारत इस फील्ड में दूसरा देश बन सकता है जो यह तकनीक दिखाएगा। यह पूरा कदम ISRO की पिछली SPADeX मिशन (2024-25) पर टिका है, जिसमें जनवरी 2025 में दो सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक डॉक किया गया था। प्राइवेट कंपनी और ISRO मिलकर ऐसे काम कर रहे हैं जो भारत को स्पेस में और मजबूत बनाएंगे।

















