छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी प्रश्नपत्र में पूछे गए विवादास्पद सवाल को लेकर हिन्दुत्त्वनिष्ठ संगठनों ने जमकर हंगामा किया। कक्षा चार की अर्द्धवार्षिक परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र में छात्रों से पूछा गया, “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” इसके लिए उन्हें चार विकल्प दिए गए, जिसमें बाला, शेरू, कोई नहीं के अलावा राम का नाम भी शामिल था। इस बात से गुस्साए हिंदू संगठनों ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे के दफ्तर का घेराव किया और जमकर नारेबाजी करते हुए उनका पुतला जलाया।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिन्दुत्त्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इसे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर सात दिनों के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि संबंधित विकल्प को हटा दिया गया है।
जाने क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दिनों सरकारी स्कूलों में बच्चों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। कक्षा चौथी के बच्चे जब बुधवार (7 जनवरी) को अंग्रेजी का पेपर देने स्कूल पहुंचे, तो वे प्रश्न पत्र देखकर हैरान रह गए। मल्टीपल चॉइस का सवाल था, “What is the name of Mona’s dog?” यानी मोना के कुत्ते का क्या नाम है? इसके जवाब के लिए चार विकल्प दिए गए थे- (ए) बाला, (बी) इनमें से कोई नहीं, (सी) शेरू और (डी) राम। इस पर हिन्दुत्त्वनिष्ठ संगठनों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। सोशल मीडिया पर भी देखते ही देखते यह पेपर वायरल हो गया है।
सनातन धर्म, हिंदुओं के आराध्यों का अपमान
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने मीडिया से कहा कि इस तरह का विवादित सवाल पूछना केवल सनातन धर्म और उसके आराध्यों का अपमान करने की मानसिकता को दर्शाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू समाज की सहनशीलता का बार-बार दुरुपयोग किया जा रहा है।
तिवारी के शब्दों में, “यदि ऐसा ही प्रश्न किसी अन्य समुदाय के आराध्य से जुड़ा होता, तो अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती। हिंदू समाज सहनशील है, इसका मतलब यह नहीं कि उसकी भावनाओं से खिलवाड़ किया जाए।” इसके अलावा संस्कृति बचाओ मंच ने भी इस प्रश्न को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह महज शैक्षणिक चूक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की गंभीर कमी का मामला है।
हिंदू संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की
हिन्दुत्त्वनिष्ठ संगठनों ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिस शिक्षक या समिति ने यह प्रश्न पत्र तैयार किया है, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और संबंधित व्यक्ति को तत्काल निष्कासित किया जाए। ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का कृत्य न कर सके। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि प्रश्न पत्रों की जांच व्यवस्था को और सख्त किया जाना चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले पर खेद जताया
जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने गुरुवार (8 जनवरी) को इस घटना पर खेद जताया और आश्वासन दिया कि फिर कभी इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। लहरे के अनुसार विभाग ने इस मामले में संबंधित वेंडर से स्पष्टीकरण मांगा है।
अलग प्रश्न पत्र प्रिंट होने से हुई चूक
जिला शिक्षा अधिकारी लहरे ने बताया कि एक अलग प्रश्न पत्र प्रिंट हो गया, जिससे यह चूक हुई। परीक्षा पत्रों की गोपनीयता के कारण यह मामला परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र खुलने के बाद सामने आया। मामला संज्ञान में आते ही इस विकल्प को तुरंत हटा दिया गया और उसकी जगह नया विकल्प जोड़ दिया गया।

















