लखनऊ । किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में कन्वर्जन के मामले में अभियुक्त डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। डॉ रमीज अब केजीएमयू से अपनी एमडी की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएंगे। केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि डॉ रमीज का प्रवेश निरस्त करने के लिए डीजीएमआई को पत्र भेजा जाएगा। इसके साथ ही डॉ रमीज का केजीएमयू परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।
विशाखा कमेटी के सामने खुलासे
प्रेस कांफ्रेंस में केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ के के सिंह ने बताया कि विशाखा कमेटी के सामने डॉक्टर रमीज मलिक ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई थी। उनके पिता ने भी इस मामले में झूठ बोला। डॉ रमीज की कथित पहली पत्नी ने काजी की मौजूदगी में शादी की पुष्टि की। इसके अलावा, विशाखा कमेटी ने फोन पर पीड़िता के बयान दर्ज किए हैं।
पीड़िता का आरोप और सस्पेंशन
विशाखा कमेटी की अध्यक्ष डॉ मोनिका ने बताया कि 22 दिसंबर को पहली बार पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने इमोशनल, फिजिकल और मेंटल हैरेसमेंट का आरोप लगाया। इसके बाद अभियुक्त को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया।
पीड़िता का आत्महत्या का प्रयास
कुछ दिन पहले, लखनऊ के केजीएमयू की लेडी रेजिडेंट डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ पढ़ने वाले मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर ने उस पर कन्वर्जन का दबाव बनाया। जब पीड़िता ने इंकार किया तो मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
अभियुक्त का शोषण और प्रेमजाल
आरोप है कि मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर ने पीड़िता को प्रेमजाल में फंसा लिया और उसका शोषण किया। उसने शादी का वादा किया, लेकिन कन्वर्जन के दबाव के कारण पीड़िता ने शादी करने से इनकार किया। इसके बाद पीड़िता डिप्रेशन में चली गई। पीड़िता के परिजनों ने राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
मेडिकल विवरण और भर्ती
जानकारी के अनुसार, दोनों एमडी पैथोलॉजी के छात्र हैं। 2025 के जुलाई में दोनों की मुलाकात हुई थी। 17 दिसंबर को पीड़िता ने हॉस्टल में दवा की कई गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसे तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया और बाद में क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद पीड़िता को 19 दिसंबर को डिस्चार्ज किया गया।

















