भुवनेश्वर । ओडिशा के जनजाति बहुल मयुरभंज जिले के ठाकुरमुंडा प्रखंड के विभिन्न कारणों से ईसाइयत में कनवर्ट हुए 30 जनजाति परिवारों के 151 पुरुष व महिलाओं ने स्वधर्म में वापसी की । घर वापसी करने वाले लोगों में संथाल, हो व गोंड जनजाति के लोग शामिल हैं । ईसाई मिशनरियों के बहकावे में आकर ईसाई बन गये इन लोगों ने पारंपारिक रीति नीति के साथ स्वधर्म में वापसी की । इस अवसर पर इन जनजाति समुदाय के अन्य लोग भी उपस्थित थे । जनजाति समाज के लोगों ने घर वापसी करने वाले लोगों का स्वागत किया । रविवार 4 जनवरी को आयोजित हुए इस घर वापसी कार्यक्रम में सैकड़ों पुरुष और महिलाएं शामिल हुए।
मिशनरियों के बहकावे में आकर बन गए थे ईसाई
घर वापसी करने वाले परिवारों के सदस्यों ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व वे ईसाई पादरियों के बहकावे में आकर अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं से दूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पादरियों द्वारा स्वास्थ्य को लेकर किए गए भ्रामक दावों के कारण उन्होंने कनवर्जन का निर्णय लिया था। परिवार के कुछ सदस्य जब गंभीर रूप से अस्वस्थ थे, तब पादरियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि ईसाई धर्म अपनाने से उनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी। इसी झांसे में आकर उन्होंने ईसाइयत स्वीकार कर ली।

हालांकि, कनवर्जन के बाद उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक अलगाव का सामना करना पड़ा। वे अपने समाज से कट गए और अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग नहीं ले पा रहे थे। धीरे-धीरे उन्हें यह महसूस होने लगा कि वे अपनी ही जड़ों और अपने ही लोगों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे मानसिक असंतोष और पीड़ा बढ़ती चली गई।
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वनवासी कल्याण आश्रम ने लगातार बनाए रखा संवाद
घरवापसी करने वाले प्रमुख व्यक्ति बंशीधर कालुंडिया ने बताया कि इस दौरान वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं ने उनसे लगातार संवाद बनाए रखा। कार्यकर्ताओं ने उन्हें समझाया कि स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कनवर्जन में नहीं, बल्कि उचित उपचार और जागरूकता में है। उन्होंने यह भी बताया कि कनवर्जन के नाम पर लोगों को उनकी पूर्वजों की संस्कृति से काटना एक साजिश है। इन बातों को समझने के बाद उन्हें वास्तविकता का बोध हुआ और उन्होंने घर वापसी का निर्णय लिया। अपने मूल धर्म और संस्कृति में लौटकर वे स्वयं को गर्व और संतोष से भरा हुआ महसूस कर रहे हैं।
इस इलाके में कार्य कर रहे स्थानीय कार्यकर्ता शिव प्रसाद हेम्ब्रम ने बताया कि राज्य में गैर कानूनी तरीके से कनवर्जन पर रोक लगाने के लिए कानून बना हुआ है । लेकिन इस कानून का सही रुप से अनुपालन नहीं हो रहा है । यही कारण है कि ईसाई मिशनरियां जनजातीय लोगों को विभिन्न प्रकार का झांसा देकर कनवर्ट कर रहे हैं । उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि राज्य में कनवर्जन को रोकने के लिए जो कानून है उसे कडाई से लागू करे ताकि जनजातीय समुदाय के लोगों को अपने पूर्वजों की संस्कृति से उखाडने का जो प्रयास हो रहा वह सफल न हो ।
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घरवापसी करने के बाद इन लोगों को स्वधर्म वापसी का जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से स्वागत किया गया। यह कार्यक्रम मयूरभंज जिले के ठाकुरमुंडा ब्लॉक अंतर्गत बागदफा, जामनांडा और डंगाडिहा गांवों में आयोजित किया गया। इन सभी लोगों की इस अवसर पर बागदफा और डंगाडिहा में आयोजित स्वागत-सम्मान समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री बिश्वेश्वर टुडू, जनजातीय सुरक्षा मंच के राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं मयूरभंज जिले के पूर्व मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन मुर्मू, जिला उपाध्यक्ष तथा रक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भीमचरण माझी, समाजसेवी रामचंद्र साहा, जिला संगठन सचिव बैशाखु सरदार, विभाग संगठन सचिव घनश्याम महांत, समाजसेवी कौशिक साहू, चैतन्य अलडा, शिव प्रसाद हेंब्रम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मंचासीन रहे और अपने विचार रखे। हो जनजाति के धर्मगुरु मानाय पूर्ति ने इस अवसर पर आशीर्वचन प्रदान किया।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने घर वापसी करने वाले परिवारों का स्वागत किया । उन्होंने अपने उदवोधन में बताया कि भारत के महापुरुषों जैसे स्वामी विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक कनवर्जन के खिलाफ थे । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि कुछ शक्तियां विभिन्न उपायों से भोले भाले वनवासियों का कनवर्जन कराने के प्रयास में लगे हुए हैं तथा उनके पूर्वजों की संस्कृति से काट रहे हैं । इससे वनवासी समाज को सचेत रहने की आवश्यकता है । कार्यक्रम का संचालन संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता गोविंद चंद्र महांत ने किया।
















