विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए भारत को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा : दत्तात्रेय होसबाले
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होम भारत

विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए भारत को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा : दत्तात्रेय होसबाले

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रोहतक में कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति से आंतरिक मजबूती जरूरी है।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Jan 4, 2026, 09:16 pm IST
inभारत, चण्‍डीगढ़, हरियाणा

चंडीगढ़ (हि.स.) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके, इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा, आंतरिक ताकत देनी होगी। संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है।

सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी में सरकार्यवाह का संबोधन

सरकार्यवाह जी ने यह बात रविवार को रोहतक में “सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका” विषय पर आयोजित सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, क्षेत्र प्रचारक जतिन कुमार, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर, क्षेत्र कार्यवाह रोशन लाल, प्रांत संघचालक प्रताप सिंह, प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल, कार्यवाह डॉ. प्रताप सिंह, सहकार्यवाह राकेश, डॉ. प्रीतम सिंह, प्रचार प्रमुख राजेश कुमार मौजूद रहे।

सज्जन शक्ति के एकजुट होने से राष्ट्र होगा मजबूत

सरकार्यवाह जी ने कहा कि देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सद्भाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होंगी तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा।

भारत की प्राचीन समृद्धि और विदेशी आक्रांताओं का लाभ

उन्होंने कहा कि 1600 ई. में जब इंग्लैंड में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई, उस समय भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार व्यवस्था में 23 प्रतिशत हिस्सा था। इससे यह पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत आर्थिक तौर पर कितना समृद्ध था। हमारी ज्ञान परंपरा, संस्कृति विश्व के सभी देशों से अच्छी थी। हम समस्त विश्व को एक कुटुम्ब तथा भारत के सभी धर्मों, परंपराओं, रीति-रिवाजों को अपना मानते हैं। एक चींटी में भी ईश्वर का अंश देखते हैं, लेकिन हम जाति-पाति, भिन्न-भिन्न पंथों में बंट गए और विदेशी आक्रांताओं ने इसका फायदा उठाया और हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी।

गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान

उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह रहा कि देश की स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हम अपना आत्मविश्वास खो बैठे हैं। इस आत्मविश्वास को पुनः प्राप्त करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को आगे आकर प्रयास करने होंगे।

विश्व को मानवता सिखाने वाली भारतीय संस्कृति

होसबाले ने कहा कि आक्रांता बनकर किसी देश को लूटना, उसकी संस्कृति को खत्म करना, राक्षसी आनंद के लिए किसी को दबाना हमारी प्रवृत्ति नहीं है। हम तो पूरे विश्व को एक कुटुम्ब मानते हैं। हम अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों को आगे बढ़ाने, विश्व को मानवता सिखाने वाली संस्कृति के लोग हैं। संघ पिछले 100 वर्षों से व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है ताकि समाज का हित किया जा सके।

सरकार और समाज की अलग-अलग जिम्मेदारियां

सरकार्यवाह जी ने कहा कि सरकार का काम होता है बाहरी ताकतों से देश की रक्षा करना, देश में संतुलन बनाए रखना, कानून व्यवस्था स्थापित करना, लेकिन युवाओं का मार्गदर्शन करना, उनमें संस्कार का निर्माण करना, संस्कृति को बढ़ावा देना, कुरीतियों को खत्म करना, अच्छे नागरिक तैयार करना समाज की जिम्मेदारी है। इसके लिए समाज की सज्जन शक्ति को ही प्रयास करने होंगे।

जापान का उदाहरण और समाज की शक्ति

उन्होंने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ राष्ट्र धर्म, राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए बताया कि 1946 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान पूरी तरह से धाराशायी हो गया था, लेकिन युद्ध के महज 15 वर्षों बाद ही जापान विश्व के सामने फिर से खड़ा हो गया। इसके पीछे का प्रमुख कारण वहां के लोगों की देशभक्ति, शिक्षा और समाज की शक्ति है।

परिवार व्यवस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत

उन्होंने कहा कि देश पर इतने आक्रमण हुए, आक्रांताओं ने हमारी शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को खत्म करने के अनेक प्रयास किए, लेकिन इतने आक्रमणों के बाद भी हम खत्म नहीं हुए, इसके पीछे हमारी परिवार व्यवस्था की ताकत है। विदेशी यात्रियों ने भी अपने यात्रा विवरणों में भारतीय परिवार व्यवस्था का विशेष उल्लेख किया है। हमारी परिवार व्यवस्था में बच्चों को स्किल और संस्कार दोनों एक साथ दिए जाते हैं।

युवाओं को नशे से बचाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं में प्रतिभा बहुत है, लेकिन आज का युवा नशे के दलदल में फंसकर पथभ्रष्ट हो रहा है। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में आकर अपनी संस्कृति से दूर होता जा रहा है। युवाओं को नशे से बचाने और संस्कारित करने के लिए सामाजिक, धार्मिक संगठनों और समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

पांच संकल्पों के माध्यम से समाज परिवर्तन का लक्ष्य

सरकार्यवाह जी ने कहा कि देश एक बार फिर विश्व का नेतृत्व करे, इसके लिए समाज की सज्जन शक्ति को देश को अंदर से मजबूत करना होगा। निजी स्वार्थों को छोड़कर, जात-पात, भाषा और पंथ से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और समाज परिवर्तन के कार्य करने होंगे। संघ इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए संघ ने समाज परिवर्तन हेतु पांच संकल्प लिए हैं, जिनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, कुटुम्ब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं।

संघ समाज को जोड़ने वाले अदृश्य धागे की तरह

सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में चिंतन-मंथन होते रहना चाहिए, इससे ही समाज की उन्नति होती है और संघ इसी उद्देश्य से कार्य करता है। संघ का कोई विशेष एजेंडा नहीं है। डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना के समय कहा था कि समाज का कार्य पूर्ण होने के बाद संघ को समाज में विलीन हो जाना है। यदि समाज जागृत हो जाए तो संघ को अलग से काम करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

नई शिक्षा नीति और नैतिक शिक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता और धार्मिकता समझाने के लिए नई शिक्षा नीति में प्रयास किए गए हैं। वर्षों से चले आ रहे पाठ्यक्रम से बाहर निकलने में समय लगेगा, तब तक समाज के सभी बुद्धिजीवियों और शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को अपने विद्यालयों में देशभक्ति, संस्कृति और पंच परिवर्तन की जानकारी देनी होगी।

संघ प्रशंसा नहीं, समाज परिवर्तन चाहता है

सरकार्यवाह ने कहा कि समाज में हो रहे अच्छे परिवर्तनों का श्रेय संघ कभी नहीं लेता। संघ समाज में माला के उस धागे की तरह कार्य करता है, जो फूलों को जोड़कर माला बना देता है लेकिन स्वयं दिखाई नहीं देता। ठीक उसी प्रकार संघ समाज से किसी प्रकार की कोई प्रशंसा नहीं चाहता।

Topics: आरएसएससमाज परिवर्तनरोहतक समाचारसज्जन शक्तिBharat Vishwaguru statementDattatreya Hosabale RSS speechSajjan Shakti samaj parivartanRSS Rohtak programHosabale newsराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघदत्तात्रेय होसबाले
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