धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश को 'सनातन पवित्र नगरी' घोषित करेगी! 105 घाटों पर गैर-हिंदू प्रवेश प्रतिबंध
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धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र नगरी’ घोषित करेगी! 105 घाटों पर गैर-हिंदू प्रवेश प्रतिबंध

उत्तराखंड की धामी सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को 'सनातन पवित्र नगरी' घोषित करने पर विचार कर रही है। हर की पैड़ी सहित 105 घाटों पर गैर-हिंदू प्रवेश वर्जित करने का प्रस्ताव, 100 साल पुराने बायलॉज को लागू करने की तैयारी। कुंभ 2027 से पहले पवित्रता बनाए रखने की मांग तेज।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Jan 4, 2026, 09:58 am IST
inउत्तराखंड

हरिद्वार: नगर निगम हरिद्वार ऋषिकेश के बायलॉज के अनुसार हर की पैड़ी सहित कुछ घाटों पर गैर हिंदू का प्रवेश वर्जित है। सूत्रों के मुताबिक अब इस बायलॉज को हरिद्वार के 105 घाटों पर लागू किए जाने पर धामी सरकार विचार कर सकती है साथ ही इसे ऋषिकेश सहित संपूर्ण कुंभ क्षेत्र में लागू किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, आगामी कुंभ से पहले इस प्रस्ताव पर विचार मंथन का दौर चल रहा और धामी सरकार गंगा नगरी को “सनातन पवित्र नगरी” घोषित कर सकती है। गंगा तीर्थ नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश को लेकर संपूर्ण सनातन धर्म में श्रद्धा-आस्था है। जानकारी के मुताबिक भारत रत्न प. मदन मोहन मालवीय ने एक बड़े जनांदोलन के बाद ब्रिटिश हुकूमत के साथ 1916 में हरिद्वार ऋषिकेश के संदर्भ में एक समझौता किया था और उस समझौते के अनुसार गंगा की धारा को अविरल बहने के साथ साथ हरिद्वार ऋषिकेश नगरी की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ नियम बनाए गए थे, जिन्हें बाद में नगर पालिका की नियमावली में शामिल किया गया था।

हर की पैड़ी में गैर हिन्दू प्रवेश वर्जित

इन नियमों में एक नियम ये भी था कि हर की पैड़ी सहित गंगा के घाटों में गैर हिंदू का प्रवेश वर्जित किया गया था। इस नियम का पालन आज भी किया जाता रहा है। हर की पैड़ी की श्री गंगा सभा इस नियम का सख्ती से पालन करवाती है। बताया जाता है कि एक नियम ये भी था कि हरिद्वार ऋषिकेश में कोई गैर हिंदू के रात्रि प्रवास नहीं कर सकता, गैर हिंदू ,पालिका क्षेत्र में आयेगा और काम करके वापिस चला जाएगा। दरअसल इसके नियम के पीछे मकसद ये था कि इन दोनों तीर्थ नगरियों में गैर हिंदुओं के बसने की इजाजत नहीं दी गई।
समय के बदलाव के साथ साथ ऐसे नियम ठंडे बस्ते में चले गए या फिर सेकुलर सरकारों द्वारा संशोधन कर बदल दिए गए।

100 साल पहले बने नियम

उल्लेखनीय है कि हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और हिन्दू धर्मशालाएं, अखाड़े, मठ,आश्रम हुआ करते थे आज भी ये विद्यमान है। जहां गैर हिंदुओं के प्रवेश अथवा रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं है। मुख्यतः ये सभी स्थान पावन गंगा के घाटों के एक किमी के दायरे में ही है। जानकारी के मुताबिक करीब सौ साल पहले जब ये नियम बने तब हरिद्वार ऋषिकेश पालिका क्षेत्र परिधि में कुछ ही पक्के घाट थे, चूंकि अब निगम क्षेत्र का दायरा बढ़ गया है इसलिए पालिका के पुराने बायलॉज भी विस्तार पा चुके हैं। पिछले दिनों कुंभ क्षेत्र में गंगा घाटों की गणना और सर्वे का काम मेला प्राधिकरण द्वारा किया गया तो पाया गया कि 105 घाटों की संख्या सामने आई। इन घाटों का कुंभ की दृष्टि से हरित प्रक्रिया से पुनर्निर्माण का काम किया जाना है।

सनातन संगठन, अखाड़ा परिषद, संत समाज, श्री गंगा सभा ये मांग करती आई है कि गंगा तीर्थ नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश के नगर निगम क्षेत्र को   पवित्र तीर्थ नगरी घोषित किया जाए और यहां पर गैर हिंदुओं के रात्रि प्रवास पर और सभी गंगा घाटों पर जाना  प्रतिबंधित रहे साथ ही मांस मदिरा की बिक्री पर भी रोक लगे। जानकारी के मुताबिक राज्य की धामी सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है।

श्री गंगा सभा के अध्यक्ष का बयान

श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम बताते हैं कि हर की पैड़ी और अन्य घाटों में गैर सनातन व्यक्ति के आने की मनाही है और ये आज की नहीं है अपितु सौ साल से भी अधिक समय से पहले से चली आ रही है। श्री गौतम कहते हैं कि हमारी सरकार से ये मांग रही है कुंभ क्षेत्र को या निगम क्षेत्र को पवित्र स्थान घोषित किया जाए क्योंकि ये कुंभ क्षेत्र सनातन की आस्था का सर्वोच्च स्थल है। यहां कुंभ महाकुंभ के अलावा, हर साल शिव भक्त करोड़ों की संख्या में कांवड़ लेने आते है। संक्रांति पूर्णमासी अमावस को लाखों सनातनियों के आस्था हरिद्वार की पावन गंगा से जुड़ी है इस लिए इसकी पवित्रता बनाए रखने की जरूरत है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी का बयान

पुष्कर सिंह धामी, राज्य बनने  के बाद पहले ऐसे सीएम हैं, जिन्होंने देव भूमि उत्तराखंड के सनातन सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखने की चिंता की है। वे अपने बयानों में हमेशा कहते रहे है कि उत्तराखंड के देव स्वरूप को हर हाल में बनाए रखा जाएगा।

आस्था का कुंभ है नजदीक

हरिद्वार ऐसी पावन तीर्थ नगरी है जहां हर साल करीब 4 करोड़ के करीब तीर्थ यात्री आते है, सनातन धर्म में गंगा को “मैय्या” कह कर आस्था व्यक्त की गई है। 2027 में कुंभ (अर्ध कुंभ) होने जा रहा है साथ ही सावन के माह में करोड़ों शिव भक्त कांवड़ियों के यहां हर साल आना होता है, गंगा के  प्रति गहन आस्था का ये वर्ष रहने वाला है। केंद्र और राज्य सरकार हरिद्वार ऋषिकेश कॉरिडोर निर्माण के लिए काम शुरू कर चुकी है। करोड़ों तीर्थ यात्रियों के आवागमन के भार को पावन गंगा नगरी सहन कर ले इस दिशा में योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ऐसे में ऋषिकेश और हरिद्वार को पवित्र नगरी घोषित करके धामी सरकार,सनातन धर्म के प्रति अपने सेवा संकल्प को सिद्धि तक पहुंचा सकती है।

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