गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त अभनपुर (छत्तीसगढ़) के सोनपैरी स्थित असंग देव कबीर आश्रम में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ। इस अवसर पर सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि संघ स्थापना का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को गति देने का अवसर है। इस अवसर पर स्वयंसेवक पंच परिवर्तन का विषय लेकर समाज में जा रहे हैं। हम सिर्फ संकट की चर्चा नहीं करते, बल्कि उपाय पर भी बात करते हैं, क्योंकि यदि हम ठीक रहेंगे तो किसी संकट का असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पांच बातें व्यवहार में लानी होगी।
पहला, आपसी भेद को समाप्त करना होगा। समाज के हर वर्ग में हमारा उठना, बैठना, सुख दुःख में सहभागिता हो। सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है।
दूसरा, अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें। आपस के सुख दुःख की चर्चा करें। हम कौन हैं, देश की स्थिति परिस्थिति पर चर्चा करें।
तीसरा, आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूं। इस पर विचार करें। चौथा, स्व के मार्ग पर चलना।
घर, परिवार, समाज में स्व की भाषा बोलूंगा। यदि दूसरे प्रांत में रहता हूं तो वहां की भाषा भी सीख लूंगा। अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता, लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूं। अपनी वेशभूषा पहनना ही न आना ठीक नहीं। स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करेंगे। पांचवां, धर्म-सम्मत आचरण कैसे करें, इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्यों व संस्कृति के दर्शन होते है। उनका पालन करना चाहिए।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री असंग देव जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि संघ हमें और आपको स्वयं-सेवा करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश सहित विश्व में जिस प्रकार की चुनौती है, ऐसे में बंटने का नहीं संगठित होने का समय है। हिंदू सम्मेलन के पश्चात सरसंघचालक जी ने सोनपैरी गांव में कोविदार पौधा लगाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति दायित्व का संदेश दिया।
‘संकटों को पार कर भारत सतत बढ़ रहा आगे’
गत दिनों पटना में वनवासी कल्याण आश्रम का 73वां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर यादव कहा कि भारत पुरातन देश है, लेकिन इसकी एकात्मता एवं अखंडता दुनिया को रास नहीं आती। इसे समाप्त करने का षड्यंत्र लगातार चलता रहा है। कन्वर्जन उनका एक प्रमुख माध्यम है। परंतु भारत की एकता और अखंडता के लिए भी कई संगठन लगातार सक्रिय हैं। सभी के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है कि आज भी अपना देश अखंड रहते हुए प्रगति की राह पर अग्रसर है। उन प्रयासों में श्रद्धेय बाला साहब देशपांडे जी का योगदान अप्रतिम है। उन्होंने सरकारी नौकरी त्याग कर वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की थी। आज उनके प्रयासों से देश में 233 छात्रावास और लगभग 20 हज़ार सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहन सिंह ने वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम वन बंधुओं के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जागरूकता के लिए अभूतपूर्व कार्य कर रहा है। यह कल्याण आश्रम के प्रयत्नों का ही परिणाम है कि आज नगरवासी वनवासियों की पीड़ा को बेहतर ढंग से समझते हैं और यथासंभव मदद करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दक्षिण बिहार के प्रांत संघचालक राजकुमार सिन्हा ने कन्वर्जन से होने वाले खतरों के प्रति लोगों को सचेत किया।
















