म्यांमार चुनाव 2025: सेना की 'लोकतंत्र वापसी' या पूरी तरह नकली ड्रामा?
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म्यांमार चुनाव 2025: सेना की ‘लोकतंत्र वापसी’ या पूरी तरह नकली ड्रामा?

म्यांमार में 2021 तख्तापलट के बाद पहला चुनाव तीन चरणों में चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिम इसे शैम (नकली) बता रहे हैं, जबकि जनता डर और निराशा में जी रही है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 2, 2026, 07:06 am IST
in विश्व
Myanmar election 2025

प्रतीकात्मक तस्वीर

म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। सेना इसे लोकतंत्र की वापसी और स्थिरता का रास्ता बता रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी सरकारें इसे पूरी तरह नकली (sham) कह रही हैं। यह चुनाव तीन चरणों में हो रहा है, जो 25 जनवरी तक चलेगा। पहले चरण में 27-28 दिसंबर को वोटिंग हुई, और बाकी के हिस्सों में नए साल यानी कि जनवरी में मतदान करवाया जाएगा।

द गॉर्जियन म्यांमार की आम जनता के हवाले से ये रिपोर्ट छापी है। इसके अनुसार, यांगून की सड़कें आज भी पहले जैसी लगती हैं—लोग आते-जाते हैं, दुकानें चल रही हैं, चाय की टपरी पर भीड़ है। लेकिन अंदर से डर का माहौल है। तख्तापलट के करीब पांच साल बाद भी लोग खुलकर बात नहीं कर पाते। एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम हमेशा डर में जीते हैं।” उम्मीद खत्म हो चुकी है, और आवाज उठाना खतरनाक है।

शहर में अस्थिरता का एहसास है। गांवों और दूर-दराज इलाकों में सेना और विद्रोही गुटों के बीच रोज लड़ाई होती है—हवाई हमले, ड्रोन स्ट्राइक आम हैं। यांगून में भी लोग गायब हो जाते हैं, और 2024 में लागू हुए अनिवार्य सैन्य भर्ती के कानून से युवा खासकर डरे हुए हैं। एक ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर ने कहा, “यांगून अब पुराना यांगून नहीं रहा। सिर नीचा रखना ही सुरक्षित है।”

इसे भी पढ़ें: ईरान में खामनेई के खिलाफ विरोध का पांचवां दिन: तीन मौतें, क़ोम तक पहुंचा आंदोलन, “तनाशाह को मौत” के नारे गूंजे

तख्तापलट के बाद की स्थिति

1 फरवरी 2021 को सेना ने आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार को हटा दिया। उसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए—लाखों लोग सड़कों पर उतरे। सेना ने हिंसा से दबाया, मार्च 2021 तक 400 से ज्यादा मौतें हुईं। हजारों को गिरफ्तार किया गया। कई लोग विरोधी समूहों में शामिल हो गए, कुछ जातीय सशस्त्र गुटों के साथ मिलकर लड़ रहे हैं। 2023 के अंत तक देश के दो-तिहाई हिस्से में युद्ध फैल चुका था।

अब हालात और खराब हैं। 2024 में सैन्य भर्ती अनिवार्य हुई, क्योंकि सेना को इलाके गंवाने पड़े। यांगून में भी लोग घर से कम निकलते हैं। आंग सान सू की की तस्वीरें हटा दी गई हैं। बिजली कटौती आम है, जेनरेटर चलते हैं। कई लोग ड्रग्स लेकर भागने की कोशिश करते हैं।

एक शख्स (नाम बदलकर आंग मो) ने बताया कि उसके दोस्त को अगवा कर लिया गया—आंखों पर पट्टी बांधकर, फोन छीनकर, 1200 डॉलर फिरौती मांगी गई। उसके बाद कोई पता नहीं। मछली पकड़ने वाले भी मारे जा रहे हैं। महंगाई बहुत बढ़ गई—क्यात की वैल्यू 80% गिरी है। गरीबी पहले कम हुई थी (2005 में 48% से 2017 में 25% तक), लेकिन अब सब उलट गया। विदेशी कंपनियां और पर्यटक चले गए। बाजार सूने हैं। ह्निन सैंडर कहती हैं, “तख्तापलट से पहले हम सपने देख रहे थे, तरक्की कर रहे थे। अब सिर्फ जीने की जद्दोजहद है।”

चुनाव कैसे हो रहा है

चुनाव तीन चरणों में है—पहला 27 दिसंबर को शुरू हुआ। टीवी पर चटकते मैसेज आते हैं—“दोस्तों, रंग-बिरंगा भविष्य के लिए वोट दो।” पोलिंग स्टेशनों पर हथियारबंद पुलिस है। सेना का दावा है कि यह फ्री एंड फेयर होगा। पहले चरण में टर्नआउट 52% बताया गया—2020 और 2015 के 70% से काफी कम। कुछ लोग डर से वोट कर रहे हैं—न वोट तो भर्ती या यात्रा रोकने की धमकी। लड़ाई वाले इलाकों में चुनाव नहीं हो रहा।

नकली चुनाव क्यों कहा जा रहा है

संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देश इसे नकली मानते हैं—सेना सिर्फ वैधता हासिल करना चाहती है। आंग सान सू की की पार्टी NLD, जो 2020 में भारी जीती थी, प्रतिबंधित है। सू की 80 साल की उम्र में जेल में हैं। कोई असली विरोधी नहीं है। एक युवक ने कहा, “वे नाटक कर रहे हैं कि लोकतंत्र वापस आ रहा है, लेकिन नतीजा सब जानते हैं। कोई मुकाबला ही नहीं है।” यांगून में कई लोग चुपचाप बॉयकॉट कर रहे हैं। कई कार्यकर्ता कहते हैं कि इससे सेना को विदेश में सपोर्ट मिल सकता है, जबकि देश में संकट जारी है।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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