ईरान में खामनेई के खिलाफ लगातार लोगों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शनों का आज पांचवा दिन है। इस दौरान अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। ये विरोध आर्थिक परेशानियों, महंगाई, बिजली-पानी की कटौती और सरकार की नीतियों के खिलाफ शुरू हुए, लेकिन अब ये काफी फैल चुके हैं और कई जगहों पर साफ-साफ शासन के खिलाफ नारे लग रहे हैं। खास बात ये कि क़ोम जैसे धार्मिक केंद्र में भी प्रदर्शन पहुंच गए हैं।
अब तक की मौतें और हिंसा
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक कम से कम तीन लोग मारे गए हैं – फूलादशहर में दारियुश अंसारी बख्तियारवंद, कुहदाश्त में अमीर-हेसाम खोदायारिफ़र्द और आज़ना में शायन असदोल्लाही। कुछ रिपोर्टों में चार और मौतों का जिक्र है, जहां क्लैश हुए। सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर गोली चलाई, खासकर नूराबाद (लोरिस्तान) में, लेकिन लोग सड़कों पर डटे रहे।
विरोध कहां-कहां फैले
प्रदर्शन अब दर्जनों शहरों में हैं – तेहरान, मशहद, इस्फहान, लोरिस्तान, खूज़िस्तान, क़ज़वीन, बाबोल, कराज के पास गोहरदाश्त, फार्स प्रांत का कवार, बंदर अब्बास, सिस्तान-बलूचिस्तान और छोटे कस्बे भी शामिल। रात में भी कई जगहों पर लोग निकले। क़ोम में, जो शिया मौलवियों का शहर है, वहां भी “यह आखिरी जंग है, पहलवी वापस आएगा” जैसे नारे लगे।
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लोग अब खुलकर सुप्रीम लीडर और पूरी व्यवस्था के खिलाफ बोल रहे हैं। “डिक्टेटर मुर्दाबाद”, “पूरे सिस्टम को मौत”, “जावीद शाह” (शाह जिंदाबाद) जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं – ये पांच दशक बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रो-मोनार्की नारे हैं। कई जगहों पर दीवारों पर “लॉन्ग लिव द किंग”, इस्फहान में दुकान के दरवाजे पर, सिस्तान-बलूचिस्तान में भी लिखा गया है।
इस दौरान खूज़िस्तान के लाली में कासिम सुलेमानी का पुतला जलाया गया। आंदोलनकारियों ने पश्चिमी ईरान में एक शिया सेमिनरी को आग लगा दी। बंदर अब्बास में “पूरे सिस्टम को मौत” और “जावीद शाह” के नारे लगे।
फार्सन, आज़ना, बाबोल, क़ज़वीन जैसे इलाकों में रात भर विरोध चला।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन
अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज़ ने कहा कि इज़राइल के 12 दिनों के अभियान और ट्रंप के फैसले ने ईरानी रिजीम की कमजोरी दिखा दी, अब लोग उठ खड़े हुए हैं – आयतुल्लाह के दिन गिने जा रहे हैं। वहीं वेंचर कैपिटलिस्ट जोश वोल्फ ने X पर लिखा कि वो “फ्री ईरान” में सबसे पहले निवेश करने वाले होंगे। ईरानी महिलाओं-मर्दों की प्रतिभा को आजाद करो, दुनिया को सबसे बड़ा शांति लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब ईरान “असहिष्णु इस्लामिक तानाशाही” से आजाद होगा, तो वो तेहरान में ऑफिस खोलेंगे।
नार्गेस मोहम्मदी फाउंडेशन (नोबेल विजेता की फैमिली द्वारा चलाया जाता है) ने बयान जारी किया कि अब चुप रहना मुमकिन नहीं। लाइव फायरिंग, आंसू गैस, पिटाई, गिरफ्तारियां और हत्याओं के बीच वो पीड़ितों, बंदियों और आजादी-न्याय-लोकतंत्र मांगने वालों के साथ हैं।

















