दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे कथित पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को अस्पताल में दिए जा रहे इलाज से मना कर दिया। जबकि, उनकी सेहत को लेकर AIIMS के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने सफदरजंग अस्पताल के आकलन को समर्थन देते हुए कहा कि उन्हें तुरंत फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी की जरूरत है।
वांगचुक अभी होश में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं। परिवार ने अभी तक इलाज की सहमति नहीं दी है।
स्वास्थ्य रिपोर्ट में क्या कहा गया?
AIIMS के एडिशनल प्रोफेसर (इमरजेंसी मेडिसिन) डॉ. अक्षय कुमार ने जांच के बाद साफ कहा कि तुरंत ओरल या इंट्रावेनस फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी जरूरी है। इससे हालत और बिगड़ने से रोका जा सकता है और गंभीर परेशानियां टाली जा सकती हैं। एक AIIMS डॉक्टर अब इलाज करने वाली टीम के साथ जुड़ गए हैं ताकि लगातार निगरानी और देखभाल हो सके।
अस्पताल में भर्ती होने की कहानी
सोनम वांगचुक (59 वर्ष) को दिल्ली पुलिस लेकर 21वें दिन सुबह 7:40 बजे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वे सामान्य कमजोरी की शिकायत लेकर आए थे।
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जांच में पाया गया:
- सीरम पोटैशियम कम
- ब्लड शुगर 78 mg/dL
- कंपेंसेटेड मेटाबोलिक एसिडोसिस (लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन से शरीर में एसिड बढ़ जाता है, लेकिन शरीर अपना बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है)
दोपहर 1 बजे तक यूरिनरी कीटोन्स 1+ से बढ़कर 3+ हो गए, जो भूखे रहने से जुड़ी स्थिति को और बिगड़ते हुए दिखा रहा था। डॉक्टरों और AIIMS विशेषज्ञ ने उन्हें बार-बार समझाया, लेकिन वांगचुक ने इंट्रावेनस फ्लूइड्स, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन और कोई भी दवा लेने से इनकार कर दिया। अस्पताल की तरफ से परिवार और वांगचुक को मनाने की कोशिश जारी है।
परिवार का पक्ष
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि परिवार और पिछले 20 दिनों से उनकी निगरानी कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना कुछ भी न दिया जाए। उन्होंने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को चिट्ठी लिखकर डिस्चार्ज की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को लैब रिपोर्ट्स नहीं दिखाई गईं, दूसरी मेडिकल ओपिनियन लेने से रोका गया। कल उनका पोटैशियम लेवल 4.3 से गिरकर 2.9 हो गया था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल में किए गए भर्ती
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की खराब होती सेहत को लेकर सरकार से उनका ध्यान रखने को कहा था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। लेकिन, वांगचुक का परिवार अस्पताल में इलाज से मना कर रहा है।
















