पिछले कुछ दिनों से भारत के पड़ोस में कट्टर इस्लामवादियों की सरपरस्ती में चल रहे बांग्लादेश में आगजनी, उपद्रव और हिन्दुओं के दमन का एक और दौर देखने में आ रहा है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे यूनुस सरकार की आम चुनाव टालने की मंशा है। वे नहीं चाहते कि फरवरी 2026 में ये चुनाव सम्पन्न हों। बांग्लादेश की राजधानी ढाका ही नहीं, बल्कि अन्य शहरों में आगजनी, विरोध-प्रदर्शनों और अल्पसंख्यक हिन्दुओं का उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। ऐसी कई घटनाओं की खबरें दुनियाभर के मीडिया में रोज आ रही हैं। बांग्लादेशी विश्लेषक और विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं कि इन घटनाओं को आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

ढाका सहित अनेक शहरों में हिन्दुओं के घर, दुकानों और मंदिरों पर हमले किए गए हैं, उन पर आगजनी और पथराव की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे स्थानीय हिन्दुओं में एक बार फिर भय का माहौल बना हुआ है। कट्टर मजहबी तत्व किसी न किसी बहाने हिन्दुओं को निशाना बना रहे हैं। इस वक्त वहां सामाजिक-सांस्कृतिक तनाव चरम पर है।
उल्लेखनीय है कि ढाका-गाजीपुर-6 जैसी संसदीय सीटों को लेकर यूनुस सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ रहा है। कुछ मामलों पर अदालत के फैसलों को लेकर आक्रोश और विरोध-प्रदर्शन दिखे है, जिससे राजनीतिक माहौल में अस्थिरता दिखती है।

अमेरिका ने बांग्लादेश में पांथिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का सम्मान करने की बात की है। कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा की जाए। अमेरिकी अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को तो समर्थन दिया है, लेकिन हर तरह की हिंसा को रोकने की जरूरत पर भी बल दिया है।
कनाडा में दिखी प्रतिक्रिया
गत दिनों कनाडा की संसद में भी बांग्लादेशी हिन्दुओं की चिंताजनक स्थिति, विशेषकर दीपू दास की हत्या के प्रकरण का उल्लेख किया गया और अपील की गई कि उस देश में हिन्दुओं की स्थिति पर गौर किया जाना चाहिए। वहां मानवाधिकारों के मानक और पांथिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की बात की गई। अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की गई। नागरिक समूहों के लिए सुरक्षा और न्याय की तुरंत उपलब्धता पर जोर दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ सहित अन्य कई अंतरराष्ट्रीय मंचों ने बांग्लादेश की घटनाओं पर नजर रखी हुई है। उन्होंने भी पांथिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के प्रति संतुलित दृष्टि अपनाने की सलाह दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश सरकार के विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय राजनीतिक गुटों के जरिए मतदान-प्रक्रिया में देरी कराने के इरादे दिख रहे हैं। यूनुस सरकार पर ‘छात्र नेता’ शरीफ उस्मान हादी की हत्या को चुनाव बाधित करने के लिए सुनियोजित साजिश बताया जा रहा है। हादी के भाई ने दावा किया कि सरकार ने उसे मरवाया ताकि हिंसा का बहाना बनाकर चुनाव स्थगित हो सके, क्योंकि हादी जल्द चुनाव चाहता था। इसके अलावा, अवामी लीग सहित अनेक विपक्षी दल इसे सरकार की चाल ही बता रहे हैं। पहले से अस्थिर राजनीतिक माहौल से आर्थिक-व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हैं।

वहां भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध रची जा रहीं साजिशों के पीछे भी कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित कट्टरपंथी ही हैं। जिन्ना के देश ने अपने अंदर का जहर अब बांग्लादेशी अवाम के दिमाग में उड़ेलना शुरू कर दिया है जिसके एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। जबसे पाकिस्तानी नेताओं और फौजी अफसरों का ढाका आना—जाना शुरू हुआ है तबसे ही वहां भारत विरोधी भावनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत ने राजनयिक स्तर पर इन घटनाओं की निंदा की है और वहां के हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

















