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होम भारत

अटल विचारों का आधुनिक विस्तार है मोदी सरकार

अटल जी का सपना था एक सशक्त, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 का संकल्प उसी स्वप्न की सि‌द्धि का मार्ग है। इसी मार्ग पर वर्तमान केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है।

Written byसंजय सेठसंजय सेठ
Dec 25, 2025, 09:50 am IST
inभारत
श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ श्री नरेन्द्र मोदी ( फ़ाइल चित्र)

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ श्री नरेन्द्र मोदी ( फ़ाइल चित्र)

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी यह नाम सुनते ही मन अपने-आप श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता से भर जाता है। वे केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक विचार, एक परंपरा और एक ऐसी प्रेरणा थे जो समय, सत्ता और परिस्थितियों से कहीं ऊपर थी। उन्होंने जिन-जिन पदों को सुशोभित किया, वे पद उनसे बड़े नहीं हुए; बल्कि उनके व्यक्तित्व, उनके आचरण और उनके शब्दों ने हर पद को गरिमा दी। इसलिए वे सिर्फ वाजपेयी नहीं थे, वे अटल थे अडिग, दृढ़ और विचारों में अमर।

25 दिसंबर, 2025 को हम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती मना रहे हैं। यह दिन केवल एक महान नेता का जन्मदिवस नहीं है, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना, शालीन राजनीति और सुशासन की परंपरा का उत्सव है। इसी कारण अटल जी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि उनका संपूर्ण जीवन ही सुशासन की जीवंत परिभाषा था ऐसा शासन जो नियमों से नहीं, मूल्यों से चलता है; जो अधिकार से नहीं, कर्तव्य से प्रेरित होता है।

नई दिल्ली में ‘सदैव अटल’ स्थित उनका स्मारक इस सत्य को मूर्त रूप देता है। काले पॉलिश किए गए ग्रेनाइट के नौ वर्गाकार शिलाखंड, केंद्र में प्रज्ज्वलित दीया और चारों ओर उभरी दीवारों पर अंकित उनके गद्य-द्य यह सब मिलकर बताता है कि अटल जी देह से भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार, उनके शब्द और उनका राष्ट्रबोध आज भी निरंतर प्रकाशित है। देश के विभिन्न भागों से लाए गए पत्थरों से बना यह स्मारक उसी भारत का प्रतीक है, जिसे वे देखते थे विविधता में एकता वाला भारत।

देश समर्पित जीवन

कवि के रूप में अटल जी निर्भीक थे, पत्रकार के रूप में राष्ट्रहित के प्रति सजग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में समाज के लिए समर्पित और राजनेता के रूप में उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश को अर्पित कर दिया। सत्ता उनके लिए कभी साध्य नहीं रही, वह केवल सेवा का माध्यम थी। यही कारण है कि जब सत्ता छोड़ने का समय आया, तो उन्होंने बिना किसी जोड़-तोड़, बिना किसी सौदेबाजी के उसे त्याग दिया।

विकास और समावेशन का संतुलन

1998 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व ने विकास और समावेशन का संतुलन बनाते हुए भारत की आर्थिक प्रशासनिक दिशा को नई परिभाषा दी। राजनीतिक अस्थिरता के दौर में उन्होंने स्थिर और प्रभावी शासन देकर भारत को 21वीं सदी में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया। पोखरण परमाणु परीक्षणों में उनका साहस, और विकास के क्षेत्र में उनकी दूरदृष्टि दोनों समान रूप से निर्णायक रहे।

सुशासन की स्थाई पहचान

स्वर्णिम चतुर्भुज ने देश के आर्थिक मानचित्र को जोड़ा, 1999 की दूरसंचार क्रांति ने डिजिटल इंडिया की नींव रखी, और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से 1.5 लाख से अधिक बस्तियाँ विकास की मुख्यधारा से जुड़ीं। FRBM अधिनियम ने राजकोषीय अनुशासन को सुशासन का आधार बनाया। दिल्ली मेट्रो, आईटी, शिक्षा और दूरसंचार में हुई पहलें उनके सुशासन की स्थायी पहचान हैं।

पेशेवर सोच

रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी जी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता, पेशेवर सोच और दीर्घकालिक दृष्टि दी। कारगिल युद्ध के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना, कमांड ढांचे में सुधार और रणनीतिक योजना को संस्थागत रूप देने से रक्षा प्रशासन मजबूत हुआ। आत्मनिर्भरता पर उनका विश्वास आज आत्मनिर्भर भारत के रूप में आगे बढ़ रहा है, जहाँ हजारों रक्षा MSMEs नवाचार कर रहे हैं, स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और मेक इन इंडिया को ठोस समर्थन मिल रहा है। इसी निरंतर सुधार और संकल्प की कड़ी में ऑपरेशन सिन्दूर भारत की सैन्य तत्परता, स्वदेशी क्षमता और समुद्री शक्ति का प्रतीक है और यह शांति बनाए रखने के लिए सशक्त तैयारी का संदेश देता है। यही सोच विकसित भारत @2047 की नींव है, जहाँ गांवों के सशक्तिकरण, मजबूत रक्षा व्यवस्था और डिजिटल विस्तार के माध्यम से एक समावेशी, सक्षम और आत्मविश्वासी भारत का निर्माण किया जा रहा है।

आलोचना का सम्मान

अटल जी की राजनीति में कटुता नहीं थी। वे विपक्ष में थे, फिर भी राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में थे। वे विपक्ष में रहते हुए भी मर्यादा नहीं छोड़ते थे और सत्ता में रहते हुए भी आलोचना का सम्मान करते थे। 1996 में सिद्धांतों के लिए त्यागपत्र देना और 1999 में एक वोट से हार स्वीकार करना भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रमाण है। अटल बिहारी वाजपेयी केवल तीन बार के प्रधानमंत्री नहीं थे; वे एक युग थे। एक ऐसे युग का नाम, जिसमें विरोध भी शालीन था और सत्ता भी संवेदनशील। वे कहते थे- “मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज-कल की नहीं।”
उन्होंने जीवन को भी और राजनीति को भी इसी दृष्टि से जिया न भय से, न अवसरवाद से, बल्कि मूल्यों से।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी के देहावसान पर कहा था-“मैं निःशब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है।” यह शून्य एक व्यक्ति के जाने का नहीं, बल्कि एक युग के अवसान का था। फिर भी, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा, अटल जी आज हमारे बीच भौतिक रूप में नहीं हैं, पर उनकी प्रेरणा और उनका मार्गदर्शन हर भारतीय को सदैव मिलता रहेगा।

आत्मीयता भरा जुड़ाव

मेरा यह सौभाग्य रहा कि मुझे अटल जी के साथ कई कार्यक्रमों में काम करने और उन्हें निकट से देखने-समझने का अवसर मिला। उनकी कही बातें आज भी मेरे कानों में गूंजती हैं। एक बार उन्होंने स्नेहपूर्वक कहा था- “संजय, हमेशा संगठन का कार्यकर्ता बने रहना। संगठन कार्यकर्ताओं के बल पर चलता है। और याद रखना, जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
ये शब्द केवल मेरे लिए नहीं थे; ये हर कार्यकर्ता और हर नागरिक के लिए जीवन-मंत्र हैं।
अटल जी से जुड़ी अनेक स्मृतियाँ हैं, जो उनके व्यक्तित्व की सादगी और संवेदनशीलता को उजागर करती हैं। 1980 में दक्षिण छोटानागपुर के दौरे के दौरान रांची के पिस्का मोड़ गुरुद्वारे में शीश नवाने के बाद वे गुमला जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने एक झोपड़ी के पास गाड़ी रुकवाई, भीतर जाकर घर की महिला को “मां” कहकर संबोधित किया और सादा भोजन रोटी, भुजिया, प्याज और हरी मिर्च पूरे सम्मान के साथ ग्रहण किया। उस क्षण में कोई औपचारिकता नहीं थी, केवल एक जननेता था, जो आम जनता से आत्मीयता से जुड़ा था।

1981 में प्रयागराज अधिवेशन के बाद रांची में अचानक सभा का आग्रह हुआ। तैयारी बहुत कम थी। सभा के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। जब छाता आगे बढ़ाया गया, तो अटल जी ने कहा- “जब तक तुम भीगते रहोगे, मैं भी भीगता रहूंगा। जब तक तुम सुनते रहोगे, मैं बोलता रहूंगा।” भीगी हुई भीड़ में उस वाक्य ने नया उत्साह भर दिया। अटल जी बारिश में भीगते हुए बोलते रहे- यह दृश्य आज भी आंखों के सामने जीवंत है। 1983 में पार्टी सहयोग निधि के लिए एक कार्यकर्ता द्वारा अपनी नई कार बेच देने की बात सुनकर उन्होंने मंच से मुस्कराते हुए कहा- “जितना राशन दिया, उतना भाषण दिया। अब और दिया है तो और बोलूंगा।” इस सरल हास्य में भी संगठन और त्याग के प्रति उनका गहरा सम्मान झलकता था।

“भारत माता की जय”

अटल जी के व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति कोई नारा नहीं थी, वह जीवन-शैली थी। जब भी मुझे अवसर मिलता है, मैं उनकी यह कविता अवश्य पढ़ता हूँ और सुनाता भी हूँ, क्योंकि इसमें भारत माता के प्रति उनका अटूट प्रेम और समर्पण झलकता है-
ये वंदन की धरती है, अभिनंदन की धरती है
ये अर्पण की भूमि है, ये तर्पण की भूमि है
हम जियेंगे तो भारत के लिए
इसकी नदी-नदी गंगा है
इसका कंकड़-कंकड़ शंकर है
मरेंगे तो भारत के लिए
मरने के बाद हमारी अस्थियों को
कोई कान लगाकर सुनेगा
तो एक ही आवाज़ आएगी –
“भारत माता की जय”

प्रशासन में विश्वास और पारदर्शिता

1996 में सेवा सदन अस्पताल के उद्घाटन पर उन्होंने कहा- “मैं यह आशीर्वाद नहीं दूँगा कि अस्पताल मरीजों से भरा रहे, बल्कि यह अपेक्षा करता हूँ कि आप सेवा ऐसी करें कि लोग स्वस्थ रहें।” यह अटल जी की सोच थी सेवा का अंतिम लक्ष्य पीड़ा नहीं, स्वास्थ्य और सम्मान है। आज, अटल जी की इसी परंपरा को हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाया जा रहा है। न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की भावना को धरातल पर उतारते हुए मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्ष में पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक केंद्रित प्रशासन को सशक्त किया है। अप्रासंगिक लगभग 2,000 पुराने नियमों को समाप्त कर शासन को सरल बनाया गया। स्व-प्रमाणीकरण, निचले पदों पर साक्षात्कार का उन्मूलन और पेंशन नियमों में सरलीकरण जैसी पहलों ने प्रशासन में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाई। बेहतर सेवा वितरण के लिए डिजिटल इंडिया, आधार-आधारित प्रमाणीकरण, फेसलेस टैक्स असेसमेंट, जीएसटी, सीपीग्राम्स और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं को लागू किया गया।

ठोस परिवर्तन

कल्याण योजनाओं के माध्यम से सेवा को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया गया है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 55.17 करोड़ बैंक खाते खोले गए, उज्ज्वला योजना से 10.33 करोड़ से अधिक परिवारों को रसोई गैस मिली, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है। पीएम-किसान योजना से 12 करोड़ से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष सहायता मिली है। आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई है, जल जीवन मिशन से 13 करोड़ से अधिक घरों में नल से जल पहुँचा है और प्रधानमंत्री आवास योजना से करोड़ों भारतीय परिवारों को पक्के घर मिले हैं। इन सुधारों ने शासन की कार्यप्रणाली और आम नागरिक के जीवन स्तर में ठोस परिवर्तन किया है।
हाल ही में आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा- “आज हम एक ऐसे भारत में खड़े हैं जो न केवल विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, बल्कि अपनी पहचान, अपनी मर्यादा और अपनी आत्मा को भी नए सिरे से गढ़ रहा है।” उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकताओं, प्रतीकों और दमनकारी पहचानों से मुक्त होने का आह्वान किया। पिछले वर्षों में लिए गए निर्णय इसी महापरिवर्तन के साक्षी हैं। 7 रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग बनाया, राजपथ को कर्तव्य पथ का स्वरूप दिया, नए केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन कहा और नया प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर को सेवा तीर्थ नाम दिया। ये केवल नाम परिवर्तन नहीं हैं ये मन परिवर्तन हैं, व्यवस्था परिवर्तन हैं, राष्ट्र-चेतना के पुनर्जागरण हैं। नाम प्रतीक होते हैं, और प्रतीक संस्कृति को जन्म देते हैं। आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश मिलना चाहिए कि भारतीय प्रशासन सेवा का वास्तविक अर्थ है – लोक सेवा और कर्तव्य पालन। अटल जी की कविताएँ आज भी हमें रास्ता दिखाती हैं-

“हार नहीं मानूँगा,
रार नहीं ठानूँगा,
काल के कपाल पर
लिखता-मिटाता हूँ।”

आज का भारत भी यही कर रहा है बीते कल की बेड़ियों को मिटाकर, भविष्य के स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है। अटल जी का सपना था एक सशक्त, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 का संकल्प उसी स्वप्न की सि‌द्धि का मार्ग है। यह केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक पुनर्जागरण का अभियान है।

अटल जी ने कहा था –

“हम जिएंगे तो इस तरह, कि इतिहास को गर्व हो।” आज भारत उसी गर्व के साथ आगे बढ़ रहा है। अंततः भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन एक चलती-फिरती किताब था। उनके विचार, उनकी कविताएँ और उनका आचरण आज भी हमें राह दिखाते हैं। जब भी जीवन या राजनीति में निराशा आए, अटल जी को पढ़िए, उन्हें सुनिए- वे आज भी हमारे बीच अपने शब्दों, अपने विचारों और अपने आदर्शों के साथ जीवित हैं।
सदैव अटल।

Topics: अटल बिहारी बाजपेयीAtal Bihari Vajpayee birth anniversaryArticles on Atal Bihari Vajpayeeअटल बिहारी जीअटल बिहारी बाजपेयी जी की जयंतीअटल बिहारी वाजपेईatal bihari vajpayeeअटल जी का जन्मदिन
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