अटल बिहारी वाजपेयी : भारत के अजातशत्रु राष्ट्र नायक और एक कवि की अनकही कहानी
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होम भारत

अटल बिहारी वाजपेयी : भारत के अजातशत्रु राष्ट्र नायक और एक कवि की अनकही कहानी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी1957 से 2009 तक कुल 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। वे उन दुर्लभ नेताओं में थे जो देश को पार्टी से ऊपर रखते थे। जानिए उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल, पोखरण-II, स्वर्णिम चतुर्भुज, लाहौर बस यात्रा और एनडीए नेतृत्व की पूरी जानकारी।

Written byसुरेश कुमार गोयलसुरेश कुमार गोयल
Dec 25, 2025, 07:06 am IST
in भारत, विश्लेषण
Atal Bihari Vajpayee

Atal Bihari Vajpayee

भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हुए जिन्होंने केवल एक युग का प्रतिनिधित्व नहीं किया बल्कि उससे आगे बढ़कर राष्ट्रीय चेतना का स्थायी आधार बन गए। अटल बिहारी वाजपेयी उन्हीं में से एक हैं। 25 दिसंबर का दिन भारत के इतिहास में एक वही पावन दिन है जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री, महान कवि, ओजस्वी वक्ता और आदर्श राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म हुआ था। यह दिन आज “सुशासन दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि वाजपेयी जी ने राजनीति में स्वच्छता, पारदर्शिता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की परंपरा स्थापित की।

लोकतांत्रिक आदर्श और संवेदनशील नेतृत्व

भारत की राजनीति में ऐसे नेता विरले ही मिलते हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से लोकतांत्रिक संवाद का स्तर ऊँचा हो जाए, जिनकी वाणी में विचारों की गरिमा हो और जिनके व्यक्तित्व में संवेदनशीलता और दृढ़ता का अद्भुत संतुलन दिखाई दे। वाजपेयी ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्व का नाम है जिन्होंने सत्ता या विपक्ष में सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनकी जन्मतिथि 25 दिसंबर हमें न केवल उनके महान योगदानों की याद दिलाती है, बल्कि यह अवसर देता है कि हम उस भारत के निर्माण पर भी विचार करें जिसकी कल्पना अटल जी ने की थी।

सरलता और सहजता

अटल जी को जनता इसलिए प्रिय थी क्योंकि वे सरल और सहज थे। वे आलोचना का सम्मान करते और विरोधियों को भी सम्मान देते थे। सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे और राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान देते थे। वे उन दुर्लभ नेताओं में थे जो देश को पार्टी से ऊपर रखते थे। अटल जी ने संसद की गरिमा को हमेशा सर्वोच्च रखा। अटल जी साहस और संयम, दोनों के प्रतीक थे। जब पोखरण-II परीक्षणों का निर्णय लिया गया, तब यह साहस का क्षण था और जब उन्होंने लाहौर बस यात्रा के माध्यम से शांति की पहल की, तब वह संयम का संदेश था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव

भारतीय राजनीतिज्ञ, कवि, पाँच दशकों तक संसद सदस्य और तीन बार प्रधानमंत्री के रूप मे देश की सेवा करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित वाजपेयी जी ने अपने जीवन मे देश भक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से ऐसी मिसाल कायम की कि विपक्ष वाले भी उनका लोहा मानते थे। वे भारतीय राजनीति में ध्रुव तारे कि तरह हमेशा चमकते रहें।

साहित्यिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

अटल जी का जन्म मध्य प्रदेश में ग्वालियर के एक साधारण, सांस्कृतिक और साहित्यिक वातावरण से समृद्ध परिवार में 25 दिसंबर 1924 को एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में ब्रह्ममुहूर्त में माता कृष्णा देवी की कोख से पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी के घर हुआ। 1939 मे छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने। बाबासाहेब आप्टे से प्रभावित होकर इन्होंने 1940 से 1944 के दौरान आरएसएस के प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया और 1947 में परिवार त्याग कर प्रचारक बन आजीवन अविवाहित रहे। विभाजन के दंगों के कारण उन्होंने कानून की पढ़ाई छोड़ दी।

पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम

इन्हें विस्तारक के रूप में उत्तर प्रदेश भेजा गया और जल्द ही इन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के समाचार पत्रों राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन के लिए काम करना शुरू कर दिया। अगस्त 1942 में, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वाजपेयी और उनके बड़े भाई प्रेम को गिरफ्तार कर लिया गया था।

संसदीय और राजनीतिक सफर

वे 1957 से 2009 तक कुल 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्होंने हिंदी में पहला ऐतिहासिक भाषण 1977 में दिया था। 1975 मे प्रधानमंत्री इन्द्रा गांधी द्वारा आपातकाल का काला कानून देश पर थोपने पर कई अन्य विपक्षी नेताओं के साथ इन्हे गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया और 19 महीने तक जेल में रहे। 1977 मे जनता पार्टी बनाने के लिए भारतीय जनसंघ का कई अन्य दलों के साथ विलय हो गया, जिसने 1977 का आम चुनाव जीता। मार्च 1977 में, वाजपेयी प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री बने।

भारतीय जनता पार्टी का गठन और नेतृत्व

1979 में जनता गठबंधन टूट गया तो भारतीय जनसंघ के पूर्व सदस्यों ने 6 दिसम्बर 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन किया, जिसके वे संस्थापक अध्यक्ष बने। पंजाब के आतंकवाद के काले दिनों में 1986 मे जब देश विरोधी लोगों ने गुरदासपुर जिले के बटाला नगर का घेराव कर आम जनता को बंधक बना लिया, तो विशेष रूप से बटाला पहुँच कर घेराव समाप्त करवा जनता को राहत दिलाई।

अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री बनना

नवंबर 1995 में मुंबई में भाजपा के सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष आडवाणी ने घोषणा की कि वाजपेयी आगामी चुनावों में पार्टी के प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के परिणामस्वरूप देश भर में धार्मिक ध्रुवीकरण से 1996 के आम चुनाव में भाजपा संसद में सबसे बड़ी पार्टी बन गई, तो राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

वाजपेयी जी ने भारत के 10वें प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन भाजपा लोकसभा के सदस्यों के बीच बहुमत जुटाने में विफल रही। उन्होंने देश के 10वें प्रधान मंत्री के रूप में 3 बार (पहली बार 1996 13 दिन, फिर 1998 से 1999 तक 13 महीने और 1999 से 2004 के पूर्ण कार्यकाल) सेवा की।

पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध और कारगिल युद्ध

वाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों में सुधार करने पर ज़ोर दिया और पहल करते हुए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री नवाज शरीफ से मिलने के लिए बस से लाहौर की यात्रा की। पाकिस्तान के साथ 1999 के कारगिल युद्ध के बाद उन्होंने पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के साथ बातचीत के माध्यम से संबंधों को बहाल करने के लिए उन्हें आगरा में एक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आमंत्रित किया। 1999 के आम चुनाव कारगिल ऑपरेशन के बाद हुए थे।

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने लोकसभा की 543 सीटों में से 303 सीटें जीतकर आरामदायक और स्थिर बहुमत हासिल किया। 13 अक्टूबर 1999 को, वाजपेयी ने तीसरी बार भारत के प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली। उनके कार्यकाल के दौरान 2001 के भारतीय संसद हमले और 2002 के गुजरात दंगों सहित कई हिंसक घटनाओं से भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था, जो अंततः 2004 के आम चुनाव में उनकी हार का कारण बना।

अटल सरकार की प्रमुख नीतियाँ और विकास कार्य

अटल जी की सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए, जिनका प्रभाव आज भी भारत अनुभव कर रहा है। 1999 में भारत की पहली राष्ट्रीय दूरसंचार नीति बनी, जिसने मोबाइल सेवाओं में प्रतिस्पर्धा का मार्ग खोला, कॉल रेट्स घटे और भारत डिजिटल क्रांति की दिशा में आगे बढ़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) के अंतर्गत स्वर्णिम चतुर्भुज के अलावा, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर उनके कार्यकाल की बड़ी देन है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ग्रामीण सिंचाई और जल प्रबंधन के सुधारों की नींव अटल जी के समय में रखी गई, जिसे बाद की सरकारों ने विस्तार दिया।

पारमाणु शक्ति और वैश्विक पहचान

अटल सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीक से सम्पन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबन्ध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊँचाईयों को छुआ।

स्वर्णिम चतुर्भुज और सड़क विकास

उन्होंने अपने कार्यकाल में भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुंबई को राजमार्गों से जोड़ा गया। उनके शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ, उतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ।

सम्मान और नागरिक पुरस्कार

इन्हें भारत के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण और पचास से अधिक वर्षों तक देश और समाज की सेवा करने के लिए 1992 में भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण दिया गया। 1994 में इन्हें भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ चुना गया। 2015 में इन्हें भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अटल बिहारी वाजपेयी: कवि और लेखक

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। उनकी कविताएँ—“हार नहीं मानूंगा”, “कदम मिलाकर चलना होगा”, “गीत नया गाता हूँ”, “दूर कहीं कोई रोता है” आज भी हर भारतीय के मन में जोश, संवेदना और राष्ट्रभक्ति का संचार करती हैं।

अटल जी का पारिवारिक जीवन

इन्होंने लंबे समय से दोस्त राजकुमारी कौल और बी॰एन॰ कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया। राजकुमारी कौल की मृत्यु वर्ष 2014 में हो चुकी है। अटल जी के साथ नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य रहते थे।

अंतिम स्वास्थ्य और निधन

अटल बिहारी वाजपेयी जी को 2009 में दिल का एक दौरा पड़ा था, जिसके बाद वह बोलने में असक्षम हो गए थे। उन्हें 11 जून 2018 को किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया, जहाँ 16 अगस्त 2018 को शाम 5.05 बजे उनकी मृत्यु हो गयी।

अंतिम संस्कार और स्मृति स्थल

अगले दिन 17 अगस्त को हिन्दू संस्कृति पद्धति के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनका समाधि स्थल राजघाट के पास शान्ति वन में बने स्मृति स्थल में “सदैव अटल” के नाम से बनाया गया है। उनकी अंतिम यात्रा बहुत भव्य तरीके से निकाली गयी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सैकड़ों नेता गण पैदल चलते हुए गंतव्य तक पहुंचे।

राजकीय शोक और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धांजलि

वाजपेयी के निधन पर भारत भर में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई थी। अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, ब्रिटेन, नेपाल और जापान समेत विश्व के कई राष्ट्रों द्वारा उनके निधन पर दुःख जताया गया। अटल जी की अस्थियों को देश की सभी प्रमुख नदियों में विसर्जित किया गया। उनके नाम पर कई संस्थानों, मार्गों और स्मारकों का नामकरण किया गया है।

अटल जी के विचार

अटल जी ने कहा था, “सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियाँ बनेंगी, बिगड़ेंगी। लेकिन यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।”

Topics: atal bihari vajpayeeDigital IndiaIndia DiplomacyIndia PM HistoryPokhran IIGram Sadak YojanaSwarnim ChaturbhujNDA LeadershipLahore Bus JourneyAtal Poetry
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