संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने पाञ्चजन्य गोवा सागर मंथन 4:0 में कहा कि संघ के 100 साल चल रहे हैं। संघ की प्रतिमा संघ ने नहीं बनाई, संघ के विरोधियों ने अधिक बनाई। संघ को जिन्होंने पढ़ा नहीं, देखा नहीं और अनुभूति नहीं ली, ऐसे लोगों ने संघ की प्रतिमा बनाने का प्रयत्न किया है। उन्होंने कहा कि भारत का विचार अध्यात्म का विचार है। विकास की जितनी भी घड़िया चली हैं, उसमें भी अध्यात्म का विषय है। यह हमारी विशेषता रही है। ऐसा समाज यहां रहा है इसलिए वो हिंदू नाम से जाना जाता था। इसलिए भारत का व्यक्तित्व हिंदू से जुड़ गया।

भारत की राष्ट्रीयता हिंदुत्व के आधार पर चलने वाली है
संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने कहा कि धीरे-धीरे भारत की राष्ट्रीयता ही हिंदू बन गई है। यह बहुत पहले से चलते आ रहा है। हम आज उसका सिर्फ उल्लेख कर रहे हैं। इसे आगे लाने के लिए हमारे देश के अनेक साधु-संतों ने प्रयास किया है। वह अपने जीवन में किसी न किसी मूल्य को लेकर चले हैं। भारत की राष्ट्रीयता हिंदुत्व के आधार पर चलने वाली है। यह बहुत पहले से चलते आ रहा है संघ उसका सिर्फ आज उल्लेख कर रहा है। स्वामी विवेकानंद से लेकर आंबेडकर तक ने उसी प्रवाह को आगे लाने की कोशिश की है। संघ भी उसी प्रवाह को आगे ले जाने वाला संगठन है।
संघ संपूर्ण मानवता की एकता चाहता है, यही हमारी घोषणा है
संघ किसी के विरोध में आया हुआ संगठन नहीं है। मिशन को लेकर चलने वाला संगठन है। संघ संपूर्ण मानवता की एकता चहाता है। हमारी घोषणा भी यही है। हमारे यहां यही क्रम भी रहा है कि वसुधैव कुटुंबकम। दुनिया में भारतीय संस्कृति को अधिक पहुंचाने का काम भगवान बुद्ध ने किया ऐसा हम मानते हैं। एक लेखन ने उनके विचार का मूल्यांकन किया तो कहा कि धर्म तत्व को व्यवहार रूप में बताने का कार्य भगवान बुद्ध ने किया। व्यवहार का स्वयं आदर्श बनना। यह दूसरा काम है। स्वयं उदाहरण प्रस्तुत किया। तीसरा उन्होंने कहा कि अखंड परिश्रम। वह भी उनके पास में था। चौथी बात उन्होंने कहा कि लोकलाइज होना। संघ ने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत किया है। देश भर में 1 लाख 14 हजार शाखाएं संघ की चल रही हैं।
संघ की 100 साल की यात्रा विचार की यात्रा है
उन्होंने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा एक विचार की यात्रा है। हम हिंदुत्व को लेकर चलने वाले हैं। इस देश का मूल विचार हिंदुत्व है। हमारी यह यात्रा विचार की यात्रा है। हिंदुत्व यानी सर्वसमावेशी और सर्वव्यापी और सार्वभौमिक। संघ में भी यही विशेषता आई है। इसलिए संघ की विकास यात्रा में हिंदुत्व की यात्रा विचार के रूप में चलती है। संघ उनके प्रकार के सेवा कार्य चलाता है। सेवा के जरिए समाज में भी वही चेतना खड़ी हो जाती है। संघ की यात्रा लोक यात्रा बन गई है। संघ के पास नित्य शक्ति है। लाखों लोगों का वर्ग है। संघ की यात्रा एक विश्वास की यात्रा है। संघ ने राष्ट्रहित को सर्वोच्च माना है।

















