बांग्लादेश इस्लामिक कट्टरता की आग में सुलग रहा है। छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़के प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने दो बड़े अखबारों – डेली स्टार और प्रथम आलो – के दफ्तरों पर हमला कर दिया। आग लगा दी गई, तोड़फोड़ हुई और अंदर फंसे पत्रकारों की जान को खतरा हो गया। इस घटना के बाद डेली स्टार के संपादक महफूज अनम ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं।
हमले की वजह क्या थी?
शरीफ उस्मान हादी जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे, जो शेख हसीना सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभा चुका था। 12 दिसंबर को मस्जिद से निकलते वक्त उन पर गोली चलाई गई और सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने इन दो अखबारों को निशाना बनाया क्योंकि कुछ लोग इन्हें भारत समर्थक या पुरानी सरकार से जुड़ा मानते हैं। हालांकि ये अखबार लंबे समय से स्वतंत्र और प्रगतिशील पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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हमले में डेली स्टार के दफ्तर में आग लगाई गई, फर्नीचर तोड़ा गया और करीब 25 पत्रकार अंदर फंस गए। उन्हें काफी मुश्किल से बचाया गया। प्रथम आलो के दफ्तर में भी लूटपाट हुई, कंप्यूटर और सामान चोरी हो गए। कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि धुएं से सांस लेना मुश्किल हो रहा था और वे डर के मारे कांप रहे थे।
संपादक महफूज अनम ने क्या कहा?
21 दिसंबर को ढाका के एक होटल में मीडिया वालों की मीटिंग हुई। वहां महफूज अनम ने खुलकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए पार्टियां मीडिया से अच्छे रिश्ते रखती हैं, लेकिन सत्ता में आते ही आलोचना बर्दाश्त नहीं करतीं। अनम ने पूछा, “डेली स्टार ने सरकार को आईना दिखाया है। बांग्लादेश के 53 साल के इतिहास में पहली बार प्रथम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों पर आग लगाई गई। क्यों? हमारा गुनाह क्या है? मैं ये सवाल पूरे विनम्रता से सबको पूछ रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब सिर्फ तारीफ सुनना नहीं, बल्कि आलोचना सहना भी है। बिना आलोचना के अच्छा शासन कैसे चलेगा? अनम ने ये भी बताया कि कोई सरकार कभी आलोचनात्मक पत्रकारिता को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाई है।

















