“हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन” जैसी पंक्तियां पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की वैचारिक दृढ़ता और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती हैं। उनकी कविता राष्ट्र, आत्मबल और निर्भयता का उद्घोष थी, जो आज भी भारतीयता की चेतना को जीवंत करती है।
अटल जी की प्रासंगिकता
आज जब देश अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती मना रहा है, तब उनका विचार और नेतृत्व पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। वे भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पूर्ण कार्यकाल पूरा कर स्थिर शासन का उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक फैसले
अटल जी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था, सामरिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचा विकास को नई दिशा मिली। पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध में दृढ़ नेतृत्व और वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त पहचान उनके कार्यकाल की पहचान बनी।
आर्थिक सुधार
बता दें कि 1998 से 2004 के बीच जीडीपी ग्रोथ लगभग 8 फीसदी तक पहुंची। महंगाई नियंत्रण में रही और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ। विनिवेश मंत्रालय का गठन कर आर्थिक सुधार को गति दी गई, जिससे भारत वैश्विक निवेश मानचित्र पर उभरा।
शिक्षा पर जोर
वहीं अटल जी का मानना था कि व्यक्ति सशक्तिकरण ही राष्ट्र सशक्तिकरण है। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी।
दूरसंचार क्रांति
वहीं नई दूरसंचार नीति और राजस्व-साझाकरण मॉडल से मोबाइल क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश के आर्थिक गलियारों को जोड़ा और विकास को रफ्तार दी।
विदेश नीति से शांति प्रयास
बता दें कि अटल जी ने दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू कर शांति का संदेश दिया। चीन के साथ संवाद बढ़ाया और भारत की विदेश नीति को संतुलित व सम्मानजनक स्वरूप दिया।
लोकतांत्रिक योगदान
चार दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहे अटल जी नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य बने। वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के मजबूत स्तंभ रहे और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में पहचाने गए।
अब अटल जी के विकसित भारत के सपने को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं। धारा 370, राम मंदिर, तीन तलाक और केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसे कदम उनके विचारों की निरंतरता हैं।
अटल जी का व्यक्तित्व और विरासत
25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटल जी पत्रकार, कवि, वक्ता और दूरदर्शी नेता थे। राष्ट्र प्रथम की भावना, लोकतांत्रिक आदर्श और मानवीय संवेदनाओं के साथ वे भारतीय राजनीति के युगपुरुष बने, जो स्मृतियों में नहीं, विचारों में सदैव जीवित रहेंगे।

















