सोशल मीडिया प्लेटफोर्म एक्स पर वायरल एक पोस्ट की इन्फोग्राफिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2007 से 2025 के बीच सामने आए ऐसे सात गंभीर मामलों को संकलित किया गया है, जिनमें मजहबी रीति-रिवाज न मानने पर परिवार के सदस्यों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार ये घटनाएं भारत, पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और कनाडा जैसे देशों में दर्ज की गई हैं।
How radicalization can turn faith into violence within the home.
7 incidents When religious extremists killed their own family members in the name of Islamic customs (2007-2025) #radical #extremist pic.twitter.com/OLScRi42Ui
— The Summary (@SummaryThe) December 20, 2025
ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश शामली का
रिपोर्ट में सबसे ताज़ा मामला 13 दिसंबर 2025 का बताया गया है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी और दो बेटियों की हत्या का आरोप है। आरोप के अनुसार पत्नी का बिना बुर्का बाहर जाना इस घटना का कारण बताया गया है।
नीदरलैंड्स में हिजाब को लेकर हत्या का आरोप
वहीं मई 2024 में नीदरलैंड्स से जुड़ा एक मामला भी रिपोर्ट में शामिल है, जहां एक युवती की हत्या का आरोप उसके परिवार पर लगा। बताया गया कि युवती पश्चिमी जीवनशैली अपनाना चाहती थी और हिजाब पहनने से इनकार कर रही थी, जिसे लेकर पारिवारिक तनाव बढ़ता गया और उसकी हत्या हो गई।
रामपुर, मुंबई और बरेली के मामले
ग्राफिक्स के अनुसार भारत के रामपुर, मुंबई और बरेली से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। इनमें नमाज़ न पढ़ने या हिजाब न पहनने को लेकर पत्नी, नाबालिग बच्ची और चार साल की बेटी की हत्या के आरोप सामने आए हैं। बता दें ये घटनाएं मजहबी दबाव और घरेलू हिंसा के खतरनाक स्वरूप को उजागर करती हैं।
पाकिस्तान कराची का 2023 का मामला
वहीं अगर पाकिस्तान की बात करें तो कराची में 2023 में एक पिता द्वारा अपने बेटे की हत्या का मामला भी इस सूची में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, यह हत्या भी मजहबी मान्यताओं और पारिवारिक मतभेदों से जुड़ी बताई गई है।
सबसे पुराना मामला कनाडा का
रिपोर्ट का सबसे पुराना मामला 2007 का कनाडा से जुड़ा है। यहां हिजाब को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद एक युवती की मौत हुई थी। इस घटना के पीछे भी जबरन मजहबी नियम थोपने का कारण सामने आया था।
मजहबी कट्टरता पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वैसे देखा जाए तो मजहबी कट्टरता की ये घटनाएं केवल नाम मात्र की हैं, जबकि आंकड़े तो इससे कहीं ज्यादा भयावह कर देने वाले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाएं व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता, महिला अधिकार और मानवाधिकार पर गहरी चोट करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जबरन सामाजिक और मजहबी नियम थोपने की प्रवृत्ति हिंसा को जन्म देती है।
भारत में भी तेजी से बढ़ते ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच की आवश्यकता बेहद जरूरी है, जिससे कि मजहबी कट्टरता के नाम पर होने वाली हिंसा पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जा सके।

















