तपस्या ज्ञान प्राप्ति में है, भारतीय संस्कृति स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाती है: आरिफ मोहम्मद खान
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तपस्या ज्ञान प्राप्ति में है, भारतीय संस्कृति स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाती है: आरिफ मोहम्मद खान

बिहार के राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान ने बेतिया में संस्कार भारती के भोजपुरिया कला हाट के समापन समारोह में भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने आत्मा, तपस्या और लोकसंग्रह की भावना पर जोर दिया।

Written byप्रशांत सौरभप्रशांत सौरभ — edited by कुलदीप सिंह
Dec 20, 2025, 10:02 am IST
inबिहार
Bihar Governor Arif Mohd Khan Bettiah indian culture

बेतिया: कला और साहित्य के क्षेत्र में निरंतर काम करने वाली संस्था संस्कार भारती के तत्वाधान में आयोजित ‘भोजपुरिया कला हाट’ में बिहार के राज्यपाल डॉ आरिफ मोहम्मद खान पहुंचे थे, जहां उन्होंने समापन समारोह को संबोधित किया। स्थानीय प्रेक्षागृह के महात्मा गांधी सभागार में उपस्थित नगर के हजारों प्रबुद्ध लोगों के बीच अपने संबोधन में डॉक्टर खान ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है, और सर्वश्रेष्ठ इसलिए है क्योंकि इसमें लोकसंग्रह की भावना है। मैं कौन हूं, मेरा सत्य स्वरूप क्या है इस प्रश्न ने भारतीय मानस को आदिकाल से अपनी और आकर्षित किया है।‌

भारत की संस्कृति से परिचय कराती संस्कार भारती

भारतीय संस्कृति की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि जो देश दुनिया में ज्ञान की संस्कृति के तौर पर पहचाना जाता हो उसका इतना पतन हुआ है, कहीं ना कहीं हमारी जो मुख्य चीजें थी, उसको हमने अनदेखा किया है। आज उन विषयों को जानना जरूरी है। इस क्रम में उन्होंने संस्कार भारती को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की उन्हीं विशेषताओं से संस्कार भारती लोगों को अवगत कराती है। ‌

भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की अन्य सारी संस्कृतियां इस बात से परिभाषित होती है कि उनका रंग क्या है, उनकी भाषा क्या है, उनकी आस्था क्या है या उनकी अभिव्यक्ति का तरीका क्या है, और इन सब चीजों को लेकर वे सब पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं। प्रभुत्व स्थापित करने के लिए वे जोर जबरदस्ती करते हैं। दुनिया में आजकल जो समस्याएं आ रही हैं उन समस्याओं की जड़ में प्रभुत्व स्थापित करने का यही जबरदस्ती वाला तरीका मुख्य है।

भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत

लेकिन भारतीय संस्कृति आत्मा से परिभाषित होती है और इस आधार पर आत्मा केवल भारत में ही नहीं है, केवल एक ही जगह नहीं है, हर जीव में है। केवल मानव में ही नहीं पेड़ पौधों में जीव जंतुओं में भी है। हमारे यहां वे लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि पत्थर में भी चेतना है, इसलिए पत्थर को ठोकर मारने से मना करते हैं। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से यही कहा कि जब इस मर्म को तुम समझ जाओगे कि जैसे मैं तुम्हारे भीतर रहता हूं वैसे ही औरों के भीतर भी रहता हूं तो दुनिया के सब लोगों से तुम्हें प्रेम हो जाएगा, तुम्हारे भीतर अलगाव का भाव ही खत्म हो जाएगा। यही भारत की संस्कृति का मूल सिद्धांत है।

तपस्या के स्वरूप पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा की तपस्या केवल खास रंग के कपड़े पहन कर पेड़ के नीचे बैठने को ही नहीं कहते, बल्कि अपने कर्म को सही तरीके से करने को भी तपस्या कहा जाता है। एक विद्यार्थी की तपस्या है कि वह पढ़ाई करे। भारतीय संस्कृति में निरंतर ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहने को ही तपस्या माना गया है। हर दिन पिछले दिन से बेहतर हो, कुछ ना कुछ ज्ञान प्राप्ति की जाए इसके लिए निरंतर प्रयासरत रहना भी तपस्या ही है।

हमारी संस्कृति को खत्म करने की कोशिशें हुई, हम आज भी बने हैं

उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्कृति को मिटाने के लिए कई प्रयास किए गए। कई हमले हुए, लेकिन भारतीय संस्कृति अगर निरंतर बनी है, इतनी प्राचीन होने के बाद भी अगर जीवित है तो यह इसलिए है क्योंकि यह संस्कृति हमें स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाती है, हमें स्वार्थी नहीं परमार्थी बनाती है। बता दें कि संस्कार भारती के तत्वावधान में बेतिया में दो दिनों का भोजपुरिया कला हाट आयोजित किया गया था, जिसमें थारू संस्कृति, भोजपुरी चित्रकला, हस्तशिल्प जैसे कई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई थी। राज्यपाल ने इन प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया और काफी प्रभावित नजर आए। कार्यक्रम में थारू समाज द्वारा पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति की गई। साथ ही स्वागत गीत के रूप में बिहार में प्रचलित पारंपरिक गीत ‘गाईये के गोबरा महादेव अंगना लिपाई’ की प्रस्तुति की गई जिसे अभिनव प्रयोग के रुप में लोगों ने खूब सराहा। इसी क्रम में स्थानीय सांसद डॉ संजय जयसवाल उपस्थित रहे और उन्होंने चम्पारण की प्राचीनता से राज्यपाल को अवगत कराया।

फनिया बध का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान संस्कार भारती के प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष डॉ दिवाकर राय की पुस्तक ‘फनिया बध’ का लोकार्पण किया गया। बता दें कि कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संस्कार भारती के केंद्रीय मंत्री डॉ संजय चौधरी उपस्थित थे और उन्होंने परिवार व्यवस्था को बचाने का आव्हान किया। वहीं कार्यक्रम का समापन राज्यपाल के हाथों किया गया। मौके पर संघ के उत्तर बिहार प्रांत प्रचारक श्री रविशंकर जी, संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र शरण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रशांत सौरभ ने किया। इस दौरान सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिसमें वनवासी कल्याण आश्रम के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले राधाकांत सिंह, साहित्य के क्षेत्र में पंडित चतुर्भुज मिश्र समेत 17 लोग राज्यपाल के हाथों सम्मानित हुए।

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