जानिए भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी के बारे में, हर माह एक रॉकेट लॉन्च का है लक्ष्य
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जानिए भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी के बारे में, हर माह एक रॉकेट लॉन्च का है लक्ष्य

भारत की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस विक्रम-I रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में छोटे सैटेलाइट्स भेजने की तैयारी में है। इन्फिनिटी कैंपस में हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता, मैक्स-क्यू फैक्ट्री और फाउंडर्स की कहानी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Dec 20, 2025, 09:41 am IST
in भारत
Skyroot

एलन मस्क की प्राइवेट स्पेसएक्स की तरह ही भारत की पहली निजी क्षेत्र की स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस हर महीने एक रॉकेट को अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। ये कंपनी छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाले लॉन्च व्हीकल बनाती है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, स्काईरूट की मैक्स-क्यू नाम की फैक्ट्री और विक्रम-आई रॉकेट के बारे में विस्तार से बताया गया है। ये फैक्ट्री 65,000 स्क्वायर फीट की है, और अब इन्फिनिटी कैंपस के साथ 2 लाख स्क्वायर फीट तक फैल गई है। यहां करीब 1000 कर्मचारी तीन शिफ्टों में काम करते हैं, ताकि हर महीने एक रॉकेट तैयार हो सके। रॉकेट को असेंबल करके लॉन्च के लिए तैयार करने में सिर्फ 72 घंटे लगते हैं।

फैक्ट्री का अंदरूनी नजारा

फैक्ट्री में अलग-अलग एरिया हैं जहां स्ट्रक्चरल पार्ट्स, प्रोपल्शन कंपोनेंट्स को असेंबल और चेक किया जाता है। कार्बन मटेरियल को मोल्ड करने के लिए स्पेशल जगह है, और वैक्यूम चैंबर में पार्ट्स को बेक किया जाता है। ग्लास केबिन्स को मार्स, वीनस, ओरियन जैसे नाम दिए गए हैं। फैक्ट्री के आखिरी छोर पर तिरंगा लगा हुआ है। बाहर इन्फिनिटी कैंपस के सामने विक्रम-आई का 1:1 स्केल मॉडल रखा है।

हर महीने एक रॉकेट बनानाइन्फिनिटी कैंपस में कई स्टेजेस एक साथ बनाए जाते हैं। तीन विक्रम-आई रॉकेट्स अभी डेवलपमेंट में हैं। यहां इन-हाउस इनोवेशंस और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी यूज की जाती है। फैक्ट्री में एग्जॉस्ट नोजल, पेलोड फेयरिंग जैसे पार्ट्स को असेंबल किया जाता है। एवियोनिक्स टीम इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और फ्लाइट सिस्टम्स को वैलिडेट करती है।

विक्रम-आई रॉकेट की डिटेल्स

विक्रम-आई का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। 2022 में स्काईरूट ने विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था श्रीहरिकोटा से। विक्रम-आई चार स्टेज वाला रॉकेट है, 20 मीटर लंबा, पूरा कार्बन कॉम्पोजिट से बना। पहले तीन स्टेज सॉलिड फ्यूल वाले हैं, ऊपरी स्टेज लिक्विड। ये 500 किलो तक पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट या सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में ले जा सकता है। असेंबली और लॉन्च एक दिन में हो सकता है। इसमें 3D प्रिंटेड इंजन, एडवांस्ड एवियोनिक्स और मॉड्यूलर डिजाइन है। पहला स्टेज भारत का सबसे बड़ा मोनोलिथिक कार्बन फाइबर सॉलिड मोटर है। कार्बन कॉम्पोजिट से वजन कम होता है, परफॉर्मेंस बेहतर, और हीट-वाइब्रेशन से बचाव अच्छा। पार्ट्स को ऑटोक्लेव में क्योर किया जाता है, जिसे स्पेस बेकर कहते हैं। फिर एवियोनिक्स, नेविगेशन, प्रोपल्शन, कम्युनिकेशन जैसे सिस्टम्स इंस्टॉल होते हैं।

लॉन्च की तैयारी

पहले विक्रम-आई के कुछ पार्ट्स श्रीहरिकोटा पहुंच चुके हैं। फाइनल इंटीग्रेशन दो महीने में पूरा होगा। लॉन्च इसरो के पैड से होगा। पहली फ्लाइट में 25% कैपेसिटी से 350 किलो पेलोड 450 किमी ऑर्बिट में ले जाएगा। कंपनी बैकअप प्लान रखती है, ताकि फेलियर से सीख सकें। सफलता का मतलब लॉन्च टावर क्लियर करना, मैक्स एरोडायनामिक प्रेशर सर्वाइव करना और पहला स्टेज से अलग करना होता है।

विक्रम-2 है अगला लक्ष्य

स्काईरूट ग्लोबल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में 5% शेयर चाहती है, जो अगले दशक में 1 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है। अगला रॉकेट विक्रम-II होगा, जो ज्यादा पेलोड ले जाएगा। भविष्य में रीयूजेबल रॉकेट्स पर काम। इसरो को बड़े मिशन्स के लिए फ्री करेंगे, जैसे ह्यूमन स्पेसफ्लाइट या मून लैंडिंग। इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया था।

कंपनी और फाउंडर्स की बात

स्काईरूट को पवन चंदाना और नागा भारत डाका ने 2018 में शुरू किया। दोनों IIT ग्रेजुएट हैं और पहले इसरो में काम करते थे। उन्होंने चंद्रयान-3 वाले LVM Mk-III रॉकेट पर काम किया था। इसरो छोड़कर उन्होंने न्यूजीलैंड की रॉकेट लैब से इंस्पिरेशन ली। कंपनी की वैल्यूएशन अब 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। निवेशकों से फंडिंग मिली हुई है। उनका लक्ष्य भारत को छोटे सैटेलाइट्स लॉन्च करने का हब बनाना है।

Topics: ISROस्काईरूट एयरोस्पेसskyroot aerospaceविक्रम-I रॉकेटमैक्स-क्यू फैक्ट्रीभारत निजी स्पेस कंपनीछोटे सैटेलाइट लॉन्चVikram-I rocketMax-Q factoryIndia private space companyइसरोsmall satellite launch
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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