करीब साढ़े 14,000 से अधिक कर्मचारियों वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में हाल के महीनों के दौरान कई अहम परियोजनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने इस्तीफे दिए हैं। इससे केंद्र सरकार के माथे पर बल पड़ गए हैं। हालांकि, ये संख्या बहुत छोटी है, लेकिन ये लोग महत्वपूर्ण मिशनों पर काम कर रहे थे। ऐसे में अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने इसरो के वैज्ञानिकों के इस्तीफों को रोकने के लिए एक आंतरिक मेमो जारी किया है। इसमें गगनयान और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के वॉलंटरी रिटायरमेंट और इस्तीफों पर सख्ती बरतने को कहा गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के महीनों में अंतरिक्ष संस्थान के करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है। इसमें URSC (उपग्रह केंद्र) से करीब 80 और VSSC (विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर) से करीब 20 लोगों के नाम शामिल हैं। यह संख्या इसरो की कुल 14,600+ कर्मचारियों की तुलना में छोटी है, लेकिन ये लोग महत्वपूर्ण केंद्रों और प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे।
कुछ तो बड़ी परियोजनाओं पर कर रहे थे कार्य
बताया जाता है कि इन इस्तीफों में LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ (VSSC), SpaDeX प्रोजेक्ट डायरेक्टर (URSC) और चंद्रयान-3 मिशन के सिमुलेशन्स प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य रल्लापल्ली जैसे वैज्ञानिक शामिल हैं। आदित्य ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग की प्रक्रिया को वैलिडेट करने के लिए 1 लाख से ज्यादा टेस्ट्स और 25 टेराबाइट डेटा तैयार करने वाली टीम को लीड किया था।
लोगों का आना और जान हर संगठन का है हिस्सा
इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने इस्तीफों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लोग जाते रहते हैं, यह हर संगठन में होता है। मेमो का मकसद सिर्फ रोकना नहीं, बल्कि ये सुनिश्चित करना भी है कि अचानक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स प्रभावित न हों। अगर कोई जाता भी है तो दूसरा व्यक्ति जिम्मेदारी संभाल लेगा।
बड़ी परियोजनाओं पर असर
URSC में पिछले वित्त वर्ष के अंत में 1,339 कर्मचारी थे और VSSC में 4,577। चिंता इसलिए है क्योंकि इस्तीफे गगनयान जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजना वाले मिशनों से आ रहे हैं। मेमो में साफ लिखा है कि हाल ही में Group ‘A’ वैज्ञानिकों/तकनीकी कर्मचारियों से इस्तीफों और VRS के आवेदनों की संख्या बढ़ी है, जो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को प्रभावित कर रही है।
डायरेक्टर्स की पावर वापस ली गई
गौरतलब है कि 2020 में एक मेमो के जरिए केंद्र डायरेक्टर्स को ग्रुप A वैज्ञानिकों (वैज्ञोनिकों और इंजीनियर्स-SG लेवल तक) के VRS और इस्तीफे स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। नई व्यवस्था में गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े लोगों के मामले में यह अधिकार वापस ले लिया गया है। अब ऐसे सभी निवेदनों को अंतरिक्ष विभाग को भेजना होगा। डायरेक्टर्स सिर्फ अपनी सिफारिश दे सकेंगे, अंतिम फैसला विभाग करेगा। मेमो कहता है कि इन मामलों को रूटीन में स्वीकार नहीं किया जाए।
इस्तीफे कोई नई बात नहीं
इसरो में इस्तीफे पहले भी होते रहे हैं। 2004-2007 के बीच नए भर्ती हुए आधे से ज्यादा लोग चले गए थे। 2012 से 2024 तक करीब 700 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया। 2025-26 के लिए करीब 1,050 वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भर्ती चल रही है। पिछले साल कैडर रीव्यू में 466 प्रोजेक्ट पोस्ट नियमित किए गए और करीब 460 नई हायर ग्रेड पोस्ट्स बनाई गईं।
अचानक क्यों बढ़े इस्तीफे ?
इसरो में अचानक से वैज्ञानिकों के इस्तीफे देने को लेकर दावे किए जा रहे हैं कि बीते कुछ सालों में सरकार के प्रयासों के कारण भारत का अंतरिक्ष सेक्टर तेजी से बढ़ा है। अब इस रेस में कई निजी कंपनियां है, जो कि वैज्ञानिकों को लुभावे ऑफर देकर अपनी ओर आकर्षित करती हैं। बड़ी वजह ये भी है कि निजी सेक्टर की कंपनियां वैज्ञानिकों को मुंह मांगा पैसा दे रही हैं। ऐसे में इस्तीफे बढ़े हैं।

















