चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है। ड्राफ्ट के अनुसार, मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के पीछे मुख्य कारण मतदाता की मृत्यु, स्थायी पलायन, डुप्लीकेशन (दो जगह नाम होना) और गणना फॉर्म जमा न करना शामिल हैं।
इस प्रकार, बंगाल में 58 लाख 20 हजार 898 वोटरों के नाम हटाए गए हैं। लेकिन इस सूची को अभी अंतिम नहीं माना जा सकता है। बताया जा रहा है कि अगले साल 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, जिसमें और बदलाव हो सकते हैं।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट मंगलवार (16 दिसंबर) को जारी की। पहले चरण में कुल 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 वोटर शामिल थे। वोटर लिस्ट से कई मतदाताओं के नाम हटाने के बाद अब यह संख्या 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 616 रह गई है। कुल मिलाकर 92.4 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म को डिजिटाइज किया जा चुका है।
इसे एसआईआर प्रक्रिया की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इस प्रक्रिया में 31 लाख 38 हजार 374 ऐसे वोटर सामने आए हैं, जिनका डेटा 2002 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो सका है। इन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। सुनवाई की प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी।
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पश्चिम बंगाल से 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 58,20,898 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 24,16,852 लोग मृत पाए गए हैं। 19,88,076 लोग स्थानांतरित हो चुके हैं। 12,20,038 लोग लापता मिले हैं। 1,38,328 नाम डुप्लीकेट हैं, जबकि 57,604 अन्य श्रेणी में पाए गए हैं।
14 फरवरी 2026 को आएगी अंतिम वोटर लिस्ट
जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिले हैं, वे फॉर्म 6 भरकर संबंधित BLO को जमा कर सकते हैं। इसके अलावा voters.eci.gov.in वेबसाइट या ECINET ऐप के माध्यम से भी आवेदन जमा कर सकते हैं। ड्राफ्ट लिस्ट voters.eci.gov.in वेबसाइट, ECINET ऐप, चुनाव आयोग और CEO पश्चिम बंगाल की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा BDO, SDO, DM कार्यालय या स्थानीय सरकारी कार्यालय और जिला वेबसाइट पर भी देखी जा सकती है। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
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एसआईआर की जरूरत क्यों.?
अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में यहां एसआईआर को लेकर खूब बवाल हो रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने यह साफ कर दिया है कि ये प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। बंगाल से पहले बिहार में भी एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है।

















